टीवीके विधायक सेतुपति सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, मद्रास हाई कोर्ट के फ्लोर टेस्ट रोक आदेश को दी चुनौती

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टीवीके विधायक सेतुपति सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, मद्रास हाई कोर्ट के फ्लोर टेस्ट रोक आदेश को दी चुनौती

सारांश

तमिलनाडु की तिरुपत्तूर सीट पर महज एक वोट की जीत अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गई है। टीवीके विधायक सेतुपति को मद्रास हाई कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट में हिस्सा लेने से रोका है — विवाद एक पोस्टल बैलेट के गलत निर्वाचन क्षेत्र में भेजे जाने और वहाँ रद्द किए जाने का है।

मुख्य बातें

श्रीनिवास सेतुपति ने मद्रास उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
उच्च न्यायालय ने सेतुपति को तमिलनाडु विधानसभा में किसी भी फ्लोर टेस्ट या विश्वास मत में भाग लेने से अगले आदेश तक रोका है।
विवाद तिरुपत्तूर सीट पर 83,365 बनाम 83,364 वोट — यानी सिर्फ एक वोट के अंतर से जुड़ा है।
पेरियाकरुप्पन का आरोप है कि एक पोस्टल बैलेट गलत निर्वाचन क्षेत्र में भेजकर रद्द किया गया।
ईवीएम वोटों में दो आधिकारिक स्रोतों के बीच कथित 18 वोटों का अंतर भी विवाद का हिस्सा है।
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मद्रास उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत उन्हें तमिलनाडु विधानसभा में किसी भी फ्लोर टेस्ट, विश्वास मत या अविश्वास प्रस्ताव में भाग लेने से अगले आदेश तक प्रतिबंधित किया गया था। यह पूरा विवाद शिवगंगा जिले की तिरुपत्तूर विधानसभा सीट पर महज एक वोट के अंतर से हुई उनकी जीत को लेकर है।

मामले का पृष्ठभूमि

चुनाव आयोग द्वारा घोषित आधिकारिक नतीजों के अनुसार, सेतुपति को 83,365 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेता और पूर्व तमिलनाडु मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट प्राप्त हुए। पेरियाकरुप्पन ने मतगणना प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

उनका मुख्य आरोप यह था कि तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 185 (शिवगंगा जिला) के लिए डाला गया एक पोस्टल बैलेट गलती से वेल्लोर के निकट तिरुपत्तूर जिले की विधानसभा क्षेत्र संख्या 50 में भेज दिया गया, और वहाँ उसे सही क्षेत्र में लौटाने के बजाय रद्द कर दिया गया।

मद्रास हाई कोर्ट का आदेश

जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार की पीठ ने पेरियाकरुप्पन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सेतुपति को किसी भी फ्लोर टेस्ट, विश्वास मत, अविश्वास प्रस्ताव, ट्रस्ट वोट या सदन की संख्या शक्ति की परीक्षा वाली किसी भी मतदान प्रक्रिया में भाग लेने से अगले आदेश तक रोक दिया।

अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा कि यह मामला एक अजीब संवैधानिक स्थिति को दर्शाता है, जहाँ एक पोस्टल बैलेट को कथित तौर पर समान नाम वाले दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में भेज दिया गया और वहीं रद्द कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल वोटों की पुनर्गणना का सामान्य चुनावी विवाद नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने में प्रशासनिक विफलता से जुड़ा गंभीर मामला है।

उच्च न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि जब चुनाव का फैसला सिर्फ एक वोट के अंतर से हुआ हो, तब हर वोट परिणाम तय करने वाला हो सकता है। इसके अतिरिक्त, ईवीएम वोटों में दो आधिकारिक स्रोतों के बीच कथित 18 वोटों के अंतर और विवादित पोस्टल बैलेट के मद्देनज़र अदालत ने कहा कि इन मुद्दों को शुरुआती स्तर पर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश

उच्च न्यायालय ने चुनाव अधिकारियों को मतगणना प्रक्रिया से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश दिया। इनमें पोस्टल बैलेट रिकॉर्ड, रद्द किए गए पोस्टल बैलेट कवर, ईवीएम वोट रिकॉर्ड, मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य संबंधित सामग्री शामिल हैं। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश का अर्थ सेतुपति का चुनाव रद्द करना नहीं है, और न ही इससे याचिकाकर्ता को विजेता घोषित किए जाने का कोई अधिकार मिलता है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

12 मई 2026 को वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया। सर्वोच्च न्यायालय ने इस याचिका को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी चुनावी विवाद का निपटारा केवल जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत चुनाव याचिका के माध्यम से ही किया जा सकता है। अब सर्वोच्च न्यायालय का फैसला तय करेगा कि क्या हाई कोर्ट का अंतरिम प्रतिबंध बरकरार रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि क्या चुनावी प्रशासन की विफलता को न्यायिक हस्तक्षेप से ठीक किया जा सकता है। चुनाव आयोग का यह तर्क कि विवाद केवल चुनाव याचिका के ज़रिए सुलझाया जाए, प्रक्रियागत रूप से सही हो सकता है, लेकिन जब एक विधायक को विधानसभा की मतदान प्रक्रियाओं से बाहर रखा जाता है, तो यह उनके निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के प्रतिनिधित्व के अधिकार पर भी सवाल उठाता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीवीके विधायक सेतुपति का सुप्रीम कोर्ट मामला क्या है?
टीवीके विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है जो उन्हें तमिलनाडु विधानसभा के किसी भी फ्लोर टेस्ट या विश्वास मत में भाग लेने से रोकता है। यह विवाद तिरुपत्तूर सीट पर महज एक वोट की जीत और एक पोस्टल बैलेट के गलत निर्वाचन क्षेत्र में भेजे जाने के आरोप से उपजा है।
तिरुपत्तूर चुनाव में पोस्टल बैलेट विवाद क्या है?
DMK नेता के.आर. पेरियाकरुप्पन का आरोप है कि शिवगंगा जिले की तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 185 के लिए डाला गया एक पोस्टल बैलेट गलती से वेल्लोर के निकट तिरुपत्तूर जिले की विधानसभा क्षेत्र संख्या 50 में भेज दिया गया। वहाँ उसे सही क्षेत्र में लौटाने के बजाय रद्द कर दिया गया, जिससे एक वोट के अंतर से हुई जीत का नतीजा प्रभावित हो सकता है।
मद्रास हाई कोर्ट ने सेतुपति पर क्यों रोक लगाई?
मद्रास उच्च न्यायालय ने पाया कि जब चुनाव का फैसला सिर्फ एक वोट के अंतर से हुआ हो और ईवीएम वोटों में दो आधिकारिक स्रोतों के बीच कथित 18 वोटों का अंतर भी हो, तो इन मुद्दों को शुरुआती स्तर पर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश सेतुपति का चुनाव रद्द नहीं करता।
चुनाव आयोग का इस मामले में क्या रुख है?
चुनाव आयोग ने उच्च न्यायालय में याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी चुनावी विवाद का निपटारा केवल जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत चुनाव याचिका के ज़रिए ही हो सकता है। आयोग के अनुसार उच्च न्यायालय को इस तरह के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने 12 मई 2026 को वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के उल्लेख के बाद इस याचिका को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में यह सुनवाई होगी।
राष्ट्र प्रेस