TASMAC भ्रष्टाचार मामले में सेंथिल बालाजी को झटका, मद्रास हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
सारांश
मुख्य बातें
मद्रास उच्च न्यायालय ने 30 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री एवं द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) विधायक वी. सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (DVAC) द्वारा दर्ज उस एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) के कामकाज में 2021 से 2025 के बीच बड़े पैमाने पर कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति जी.के. इलानथिरायन ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकरण में भारी वित्तीय अनियमितताओं और आपराधिक साजिश के गंभीर आरोप शामिल हैं, जिनकी जाँच के लिए हिरासत में पूछताछ अनिवार्य है। अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस तर्क पर भी ध्यान दिया कि आरोपियों ने कथित तौर पर अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग किया और सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचाया।
DVAC ने यह एफआईआर 28 जुलाई को बालाजी और कई अन्य लोगों के विरुद्ध दर्ज की थी। उस दौरान बालाजी तमिलनाडु में बिजली, निषेध एवं आबकारी मंत्री के पद पर थे। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, रिकॉर्ड में हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।
अभियोजन पक्ष के आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, बालाजी ने सरकारी प्रक्रियाओं में हेरफेर करने और सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए छह अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर कथित साजिश रची। इन छह में निजी व्यक्ति, डिस्टिलरी एवं ब्रुअरी कंपनियाँ, ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर, बॉटलिंग फर्म और अज्ञात TASMAC अधिकारी शामिल बताए गए हैं। जाँचकर्ताओं का आरोप है कि इस साजिश के ज़रिये अवैध धनराशि को वैध बनाने का प्रयास किया गया और राज्य को भारी वित्तीय क्षति पहुँचाई गई।
बचाव पक्ष के तर्क
बालाजी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आर. इलांगो ने दलील दी कि TASMAC एक स्वतंत्र निगम के रूप में कार्य करता है और टेंडर प्रक्रिया अथवा दैनिक परिचालन में मंत्री की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि TASMAC कार्यालयों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूर्व तलाशी को पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है और उससे संबंधित कार्यवाही अभी लंबित है।
बालाजी ने स्वयं सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि एफआईआर अस्पष्ट और सामान्य आरोपों पर आधारित है तथा उन्हें किसी खास टेंडर, अनुबंध या लेन-देन से नहीं जोड़ा गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह मामला करूर भगदड़ विवाद के बाद राजनीतिक कारणों से प्रेरित होकर दर्ज किया गया।
न्यायालय का निष्कर्ष
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोपों की गंभीरता और गहन जाँच की आवश्यकता, बचाव पक्ष के तर्कों से अधिक महत्त्वपूर्ण है। साजिश की जड़ों और वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ को अपरिहार्य मानते हुए न्यायालय ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
आगे की राह
याचिका खारिज होने के बाद बालाजी के समक्ष अब सर्वोच्च न्यायालय में अपील का विकल्प शेष है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब बालाजी किसी बड़े कानूनी विवाद में घिरे हों — 2023 में ED ने उन्हें नकद-के-बदले-नौकरी घोटाले में गिरफ्तार किया था और वे लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहे थे। TASMAC मामले में आगे की जाँच और संभावित गिरफ्तारी की दिशा पर सभी की नज़रें टिकी हैं।