सेंथिल बालाजी को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत, TASMAC भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तारी पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 31 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी को तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में अग्रिम जमानत प्रदान की, जिससे उनकी तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लग गई। मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा राहत से इनकार किए जाने के बाद बालाजी ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
बेंच का फैसला और शर्तें
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह राहत दी। सर्वोच्च न्यायालय ने बालाजी को अग्रिम जमानत देते हुए कई शर्तें लगाईं — उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा, जाँच में पूरा सहयोग देना होगा और किसी भी गवाह या जाँच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करना होगा। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
दोनों पक्षों की दलीलें
बालाजी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकार का कोर्ट में रुख बदल गया है और नए हलफनामे के आधार पर ही मद्रास उच्च न्यायालय ने राहत देने से इनकार किया। तमिलनाडु सरकार की ओर से अधिवक्ता गुरु कृष्णकुमार ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मंत्री पद पर रहते हुए बालाजी के विरुद्ध निष्पक्ष जाँच संभव नहीं हो सकी और बाहर रहने पर वे जाँच व गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि बालाजी अब मंत्री नहीं हैं और सरकार को निष्पक्ष जाँच करनी चाहिए — यदि वे दोषी पाए जाते हैं तो परिणाम भुगतना होगा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 2021 से 2025 के बीच TASMAC में ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट, बार लाइसेंस और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। इस अवधि में बालाजी तमिलनाडु के निषेध और आबकारी मंत्री भी थे। 28 जुलाई को विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने बालाजी सहित सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद DVAC के अधिकारियों ने तमिलनाडु में 40 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें करूर स्थित बालाजी का आवास और उनके पूर्व सहयोगियों से जुड़ी जगहें शामिल थीं।
आरोप और बालाजी का पक्ष
DVAC के अनुसार, बालाजी ने कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर आधिकारिक प्रक्रियाओं में हेरफेर करने, सार्वजनिक धन के गबन और अवैध धन की लॉन्ड्रिंग में सहायता करने की कथित साजिश रची, जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। हालाँकि, बालाजी ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताया है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह बालाजी की कानूनी उलझनों का पहला अध्याय नहीं है — वे पहले भी एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी और जमानत की प्रक्रिया से गुजर चुके हैं। अब जाँच एजेंसी पर दबाव होगा कि वह सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच करे। अगली सुनवाई में न्यायालय जाँच की प्रगति का जायजा लेगा।