7 अगस्त 2026
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मद्रास हाई कोर्ट ने हॉर्स-ट्रेडिंग मामले में कृष्णन को दी जमानत, सभी 14 आरोपी रिहा

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मद्रास हाई कोर्ट ने हॉर्स-ट्रेडिंग मामले में कृष्णन को दी जमानत, सभी 14 आरोपी रिहा

सारांश

मद्रास उच्च न्यायालय ने हॉर्स-ट्रेडिंग मामले में अंतिम आरोपी कृष्णन को जमानत देकर सभी 14 गिरफ्तार व्यक्तियों को रिहा कर दिया। पूर्व DMK मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई को पहले ही राहत मिल चुकी है। ट्रिपलिकेन पुलिस की जाँच अभी भी न्यायालय के स्थगन आदेश के अधीन है।

मुख्य बातें

मद्रास उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त 2026 को आरोपी कृष्णन को जमानत दी; हॉर्स-ट्रेडिंग मामले में गिरफ्तार सभी 14 आरोपी अब रिहा।
ट्रिपलिकेन पुलिस ने उथंगराई के थवेका विधायक इलैयाराजा को प्रभावित करने के आरोप में 14 लोगों को गिरफ्तार किया था।
पूर्व DMK मंत्री वी.
सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है; 5 अगस्त को शर्तों में ढील दी गई।
कार्तिकेयराजा की अग्रिम जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 1 सितंबर तक स्थगित; तब तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं।
इलंथिरायण ने सेतुराज और राजसेकर की जमानत शर्तों में भी ढील दी।

मद्रास उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त 2026 को हॉर्स-ट्रेडिंग मामले में आरोपी कृष्णन को जमानत प्रदान कर दी। इस आदेश के साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 14 आरोपी अब जमानत पर रिहा हो चुके हैं। न्यायमूर्ति जी.के. इलंथिरायण ने कृष्णन की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

चेन्नई की ट्रिपलिकेन पुलिस ने इस मामले में कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। इन पर आरोप था कि उन्होंने हॉर्स-ट्रेडिंग के ज़रिए उथंगराई निर्वाचन क्षेत्र के थवेका विधायक इलैयाराजा को प्रभावित करने की कोशिश की। यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में उस समय चर्चा में आया जब विधायक की निष्ठा को प्रभावित करने के प्रयास का आरोप सामने आया।

सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार को पहले मिली राहत

इस मामले में पूर्व द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी थी। 5 अगस्त को न्यायमूर्ति इलंथिरायण ने दोनों की उन याचिकाओं पर आदेश देते हुए अग्रिम जमानत की शर्तों में ढील दी, जिनके तहत उन्हें दिन में दो बार जाँच अधिकारी के सामने उपस्थित होना पड़ता था।

गौरतलब है कि 1 अगस्त को सेंथिल बालाजी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि संबंधित एफआईआर में उनका नाम नहीं है और वे कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग करते हुए लगाए गए आरोपों को झूठा साबित करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि सतर्कता और भ्रष्टाचार-रोधी निदेशालय द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एक अन्य मामले में, जिसमें उनके ठिकानों पर तलाशी भी ली गई थी, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर अग्रिम जमानत हासिल की है।

जाँच पर रोक और अन्य आदेश

मद्रास उच्च न्यायालय ने ट्रिपलिकेन पुलिस की जाँच पर पहले ही रोक लगा दी थी। इसी रोक की अवधि के दौरान कृष्णन ने उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की, जिसे न्यायमूर्ति इलंथिरायण ने स्वीकार किया।

इसके अलावा न्यायालय ने कार्तिकेयराजा द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई 1 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी और निर्देश दिया कि तब तक याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई कठोर कदम न उठाया जाए। न्यायालय ने पूर्व में जमानत पर रिहा किए गए सेतुराज और राजसेकर पर लगाई गई जमानत शर्तों में भी ढील प्रदान की।

राजनीतिक संदर्भ

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में विधायकों की निष्ठा और राजनीतिक दल-बदल को लेकर व्यापक बहस चल रही है। सेंथिल बालाजी, जो DMK विधायक भी हैं, पहले से ही एक अन्य भ्रष्टाचार मामले में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के मामले लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं।

आगे क्या होगा

कार्तिकेयराजा की अग्रिम जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 1 सितंबर को निर्धारित है। ट्रिपलिकेन पुलिस की जाँच अभी भी उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के अधीन है, और मामले की आगे की दिशा न्यायालय के अगले निर्देशों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उस मामले की जाँच ही स्थगित है — ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या यह मामला राजनीतिक दबाव का औज़ार था या वास्तविक भ्रष्टाचार की जाँच। सेंथिल बालाजी का सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचकर राहत पाना दर्शाता है कि उच्च-प्रोफाइल राजनेताओं के लिए न्यायिक रास्ते अपेक्षाकृत सुलभ रहते हैं, जबकि सामान्य आरोपियों को निचली अदालतों में लंबे इंतज़ार का सामना करना पड़ता है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाई कोर्ट का हॉर्स-ट्रेडिंग मामला क्या है?
यह मामला चेन्नई की ट्रिपलिकेन पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था, जिसमें 14 लोगों पर आरोप है कि उन्होंने हॉर्स-ट्रेडिंग के ज़रिए उथंगराई निर्वाचन क्षेत्र के थवेका विधायक इलैयाराजा को प्रभावित करने की कोशिश की। मद्रास उच्च न्यायालय ने इस मामले में पुलिस जाँच पर रोक लगाई हुई है।
कृष्णन को जमानत क्यों दी गई?
न्यायमूर्ति जी.के. इलंथिरायण ने कृष्णन की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। कृष्णन ने यह याचिका तब दायर की जब मद्रास उच्च न्यायालय ने ट्रिपलिकेन पुलिस की जाँच पर रोक लगाई हुई थी। इस आदेश के साथ ही मामले के सभी 14 गिरफ्तार आरोपी जमानत पर रिहा हो गए।
सेंथिल बालाजी का इस मामले से क्या संबंध है?
पूर्व DMK मंत्री और विधायक वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को इस मामले में पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है। 1 अगस्त को सेंथिल बालाजी ने कहा था कि संबंधित एफआईआर में उनका नाम नहीं है और वे सभी आरोपों को झूठा साबित करेंगे।
कार्तिकेयराजा की याचिका पर अगली सुनवाई कब होगी?
मद्रास उच्च न्यायालय ने कार्तिकेयराजा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई 1 सितंबर तक स्थगित कर दी है। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि तब तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाए।
ट्रिपलिकेन पुलिस की जाँच की स्थिति क्या है?
मद्रास उच्च न्यायालय ने ट्रिपलिकेन पुलिस की जाँच पर रोक लगाई हुई है। यह रोक अभी भी जारी है और मामले की आगे की दिशा न्यायालय के अगले आदेशों पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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