केरल हाईकोर्ट ने ईडी हमले के मामले में सीपीआई (एम) के 9 कार्यकर्ताओं को दी सशर्त जमानत
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार, 4 अगस्त 2025 को मसाप्पाडी ईडी हमला मामले में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई (एम)] के 9 कार्यकर्ताओं को सशर्त जमानत प्रदान की। इन सभी आरोपियों को 27 मई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर कथित हमले के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और वे 67 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागाथ ने किरण पी.एस., जीवन, अनिल कुमार, श्रीजीत, निशाद, सिद्दार्थ एस., शेफ़ीक, नंदू जी.आर. और राहुल ए. राजन की जमानत याचिकाएँ स्वीकार कर लीं। न्यायालय ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और किसी भी परिस्थिति में उन्हें न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि शेष आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर मंगलवार को विचार किया जाएगा।
अभियोजन पक्ष को झटका
न्यायालय ने अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या के प्रयास के आरोपों को प्रथम दृष्टया स्थापित करने में विफल रहा है, जिसे कानूनी विशेषज्ञ अभियोजन के लिए एक बड़े झटके के रूप में देख रहे हैं। हालाँकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि शेष आरोपों की जाँच जारी रहेगी। जमानत देने में न्यायालय ने तीन प्रमुख बिंदुओं को आधार बनाया — 67 दिनों की लंबी न्यायिक हिरासत, जाँच का लगभग पूर्ण होना, और सभी आरोपियों की कोई पूर्व आपराधिक पृष्ठभूमि न होना।
27 मई की हिंसा की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला 27 मई की उस हिंसा से जुड़ा है जब ईडी अधिकारी मसाप्पाडी मामले में केरल के नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन और उनकी बेटी के आवास पर छापेमारी करके लौट रहे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, करीब 300 लोगों ने अधिकारियों को घेर लिया, उनके वाहनों को रोका और पत्थर, ईंटें, लाठियाँ तथा लोहे की रॉड से हमला किया। इस घटना में सीआरपीएफ और पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे।
ईडी का पक्ष
ईडी ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए तर्क दिया कि यह कोई स्वत:स्फूर्त प्रदर्शन नहीं था, बल्कि केंद्रीय जाँच एजेंसी की कार्रवाई में बाधा डालने के उद्देश्य से किया गया पूर्व नियोजित और संगठित हमला था। ईडी के सहायक निदेशक सनथ रेड्डी के हलफनामे में दावा किया गया कि सभी आरोपी जानलेवा हथियारों के साथ एकत्रित थे, उन्होंने अधिकारियों को जान से मारने की धमकी दी और सरकारी वाहनों को क्षति पहुँचाई। ईडी ने यह भी दावा किया कि छापेमारी और हमले के बीच के अंतराल से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी कार्यकर्ताओं को लामबंद करने के लिए पर्याप्त समय था। एजेंसी के पास कथित तौर पर आरोपियों की समन्वित गतिविधियों के वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं।
कानूनी स्थिति और आगे की राह
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था, जिसमें हत्या के प्रयास का आरोप भी शामिल था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ईडी की छापेमारी और विपक्षी नेताओं के परिजनों से जुड़े मामले राजनीतिक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं। मामले की जाँच अभी भी जारी है और शेष आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई अगले दिन होनी है।