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केरल ED हमला: 30 सदस्यीय SIT गठित, डिजिटल सबूतों से साजिशकर्ताओं तक पहुँचने की तैयारी

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केरल ED हमला: 30 सदस्यीय SIT गठित, डिजिटल सबूतों से साजिशकर्ताओं तक पहुँचने की तैयारी

सारांश

केरल में ED अधिकारियों पर हुआ हमला अब केवल क़ानून-व्यवस्था का मसला नहीं रहा — यह केंद्रीय एजेंसी और राज्य की सत्ताधारी राजनीति के बीच टकराव का नया मोर्चा बन गया है। 30 सदस्यीय SIT, 25 गिरफ़्तारियाँ और डिजिटल सबूतों पर निर्भर जाँच अब यह तय करेगी कि साजिश का तार कहाँ तक जाता है।

मुख्य बातें

पिनाराई विजयन के आवास पर तलाशी के बाद ED अधिकारियों पर हमले की जाँच के लिए 30 सदस्यीय SIT गठित।
अब तक 25 लोग गिरफ़्तार , लगभग 300 नामज़द , फुटेज के आधार पर 46 की पहचान ।
सहायक निदेशक सनित रेड्डी सहित ED अधिकारियों के बयान कोच्चि में दर्ज।
फ़ोन रिकॉर्ड और व्हाट्सएप संदेशों की साइबर सेल के सहयोग से जाँच जारी।
ED ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को सूचित किया, CBI जाँच की माँग पर विचार।
प्रशांत की नियुक्ति पर विपक्ष ने पक्षपात का सवाल उठाया।

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर हुई तलाशी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों पर हुए हमले की जाँच केंद्रीय एजेंसी और राज्य पुलिस ने तेज कर दी है, और अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य कथित साजिशकर्ताओं की पहचान उजागर कर सकते हैं। मामले की जाँच के लिए 30 सदस्यीय विशेष जाँच टीम (SIT) का गठन किया गया है, जिसने कोच्चि में ED अधिकारियों के बयान दर्ज कर लिए हैं।

SIT की अब तक की कार्यवाही

SIT ने सहायक निदेशक सनित रेड्डी सहित अन्य ED अधिकारियों के बयान दर्ज किए हैं और तलाशी से जुड़े वारंट तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ एकत्र किए हैं। ED अधिकारियों ने कथित तौर पर SIT को बताया है कि यह हमला कोई अचानक भड़का विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक सुनियोजित कार्रवाई थी जिसका मक़सद आधिकारिक कर्तव्यों में बाधा डालना था।

डिजिटल साक्ष्यों पर फ़ोकस

जाँच टीमें कथित हमलावरों के फ़ोन रिकॉर्ड और व्हाट्सएप संदेशों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। तलाशी से ठीक पहले और उसके दौरान हुई कॉल तथा नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संवादों की पड़ताल साइबर सेल के सहयोग से की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार ये रिकॉर्ड यह तय करने में निर्णायक हो सकते हैं कि हिंसा के पीछे कोई समन्वित योजना थी या नहीं।

गिरफ़्तारियाँ और पहचान

पुलिस की ओर से दर्ज मामले में अब तक लगभग 300 लोगों को नामज़द किया गया है, जबकि 25 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। घटना स्थल के फुटेज के आधार पर 46 लोगों की पहचान कर ली गई है और बाक़ी का पता लगाने का प्रयास जारी है। SIT यह जाँच भी कर रही है कि क्या किसी राजनीतिक नेता या स्थानीय पार्टी पदाधिकारी ने हमलावरों को जुटाने में भूमिका निभाई।

ED की चिंताएँ और CBI जाँच की संभावना

ED ने आशंका जताई है कि जाँच केवल निचले स्तर के कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन तक भी पहुँचनी चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर हमले का निर्देश दिया। एजेंसी गिरफ़्तार आरोपियों की ज़मानत कार्यवाही में सत्र न्यायालय के समक्ष हस्तक्षेप करने पर विचार कर रही है और ज़मानत का विरोध करने तथा कथित साजिश साबित करने के लिए वीडियो फुटेज व अन्य साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। एजेंसी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को घटना से अवगत कराया है और CBI जाँच की माँग करने का विकल्प भी तलाश रही है, उन मिलते-जुलते मामलों का हवाला देते हुए जहाँ अन्य राज्यों में ED अधिकारियों पर हमलों के बाद CBI ने जाँच अपने हाथ में ली थी।

जाँच अधिकारी की नियुक्ति पर विवाद

मामले ने तब राजनीतिक मोड़ ले लिया जब SIT प्रमुख आर. प्रशांत को जाँच अधिकारी नियुक्त किया गया। उन्हें वामपंथी संगठनों के क़रीब माना जाता है, जिसके चलते विपक्ष ने संभावित पक्षपात को लेकर आलोचना की है। अब इस अधिकारी के सामने एक राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने की कठिन चुनौती है। आने वाले दिनों में डिजिटल फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट और SIT की प्रगति इस मामले की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ जाँच का असली दबाव अब निचले कार्यकर्ताओं से ऊपर 'निर्देश देने वालों' तक पहुँचने पर है। SIT प्रमुख की वामपंथी झुकाव वाली पृष्ठभूमि और CBI को मामला सौंपने की ED की संभावित माँग — दोनों इस बात की ओर इशारा करते हैं कि निष्पक्षता पर भरोसा अभी से सवालों के घेरे में है। डिजिटल फ़ॉरेंसिक यदि सच में राजनीतिक समन्वय दिखाती है, तो यह केरल की राजनीति में दूरगामी असर डाल सकती है। पर इतिहास बताता है कि ऐसे हाई-प्रोफ़ाइल मामलों में अक्सर कार्यकर्ता पकड़े जाते हैं, और 'साजिशकर्ता' काग़ज़ों में ही रह जाते हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में ED अधिकारियों पर हमला कब और क्यों हुआ?
यह हमला केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर ED की तलाशी कार्रवाई के बाद हुआ था। ED का दावा है कि यह कोई स्वत:स्फूर्त विरोध नहीं, बल्कि एजेंसी के आधिकारिक कर्तव्यों में बाधा डालने के मक़सद से किया गया एक सुनियोजित हमला था।
मामले की जाँच कौन कर रहा है?
केरल पुलिस ने जाँच के लिए 30 सदस्यीय विशेष जाँच टीम (SIT) गठित की है, जिसकी अगुवाई आर. प्रशांत कर रहे हैं। टीम ने कोच्चि में ED अधिकारियों के बयान दर्ज किए हैं और तलाशी संबंधी दस्तावेज़ एकत्र किए हैं।
अब तक कितने लोग गिरफ़्तार हुए हैं?
पुलिस ने अब तक 25 लोगों को गिरफ़्तार किया है, जबकि FIR में लगभग 300 लोगों को नामज़द किया गया है। घटना के फुटेज के आधार पर 46 लोगों की पहचान कर ली गई है और बाक़ी की तलाश जारी है।
क्या यह मामला CBI को सौंपा जा सकता है?
ED ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को घटना की जानकारी दे दी है और CBI जाँच की माँग करने का विकल्प तलाश रही है। एजेंसी ने अन्य राज्यों के समान मामलों का हवाला दिया है, जहाँ ED अधिकारियों पर हमलों के बाद CBI ने जाँच अपने हाथ में ली थी।
SIT प्रमुख की नियुक्ति पर विवाद क्यों है?
SIT प्रमुख आर. प्रशांत को वामपंथी संगठनों के क़रीबी माना जाता है, जिसके चलते विपक्ष ने उनकी नियुक्ति पर संभावित पक्षपात का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं। अब उनके सामने राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले में निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने की चुनौती है।
राष्ट्र प्रेस
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