ईडी अधिकारियों पर हमला: तिरुवनंतपुरम अदालत ने 5 आरोपियों की जमानत खारिज, कुल गिरफ्तारियां 25
सारांश
मुख्य बातें
तिरुवनंतपुरम की न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अदालत ने 31 मई 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हमले के मामले में गिरफ्तार पहले पाँच आरोपियों — निधिन राज, मनोज, जीवन, श्रीजीत और शाहीन — की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय जाँच एजेंसी के अधिकारियों पर हमला एक गंभीर अपराध है और इसे किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जा सकता।
आरोपियों पर क्या धाराएं लगाई गई हैं
पाँचों आरोपियों के विरुद्ध हत्या के प्रयास, सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्य-निर्वहन से रोकने, तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने संबंधी कानून (पीडीपीपी अधिनियम) के तहत मामले दर्ज हैं। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जाँच अभी अपने शुरुआती और अत्यंत महत्त्वपूर्ण चरण में है, और आरोपियों को जमानत मिलने से जाँच की दिशा प्रभावित हो सकती है।
बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं अंततः जाँच में टिक नहीं पाएंगी। हालाँकि अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी
इस बीच तिरुवनंतपुरम शहर पुलिस ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। गुरुवार रात पूर्व अट्टुकल पार्षद उन्नीकृष्णन सहित छह और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 25 हो गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं। जाँच एजेंसियां हमले में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान कर उनकी तलाश में जुटी हैं। शहर के पुलिस आयुक्त ने बताया कि जाँच तेजी से आगे बढ़ रही है और कई संदिग्धों को निगरानी में रखा गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मामले के राजनीतिक और कानूनी रूप से संवेदनशील होने के मद्देनज़र गृह मंत्री रमेश चेन्नितला ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को आरोप-पत्र शीघ्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य उच्च अदालतों में आरोपियों द्वारा राहत माँगे जाने से पहले अभियोजन पक्ष की स्थिति को मजबूत करना है।
मामले का राजनीतिक संदर्भ
ईडी अधिकारियों पर हुए इस हमले ने केरल में व्यापक राजनीतिक बहस छेड़ दी है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय जाँच एजेंसियों और राज्य सरकारों के बीच अधिकार-क्षेत्र को लेकर तनाव पहले से चर्चा में रहा है। गौरतलब है कि ईडी अधिकारियों पर सीधे हमले की घटनाएं देश में विरल हैं, जो इस प्रकरण को और अधिक गंभीर बनाती हैं।
आगे क्या होगा
अदालत द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किया जाना इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के लिए पहला बड़ा न्यायिक झटका माना जा रहा है। अब आरोपी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। साथ ही अभियोजन पक्ष द्वारा शीघ्र आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद मामले की अगली सुनवाई की दिशा तय होगी।