कलकत्ता हाईकोर्ट ने शेख शाहजहां की जमानत याचिका को खारिज किया: ईडी अधिकारी पर हमले का मामला
सारांश
Key Takeaways
- कोलकाता हाईकोर्ट ने शेख शाहजहां की जमानत याचिका खारिज की।
- ईडी टीम पर हमले का मामला गंभीर है।
- सीबीआई ने मामले की जांच की जिम्मेदारी ली है।
- शाहजहां के खिलाफ गवाहों को प्रभावित करने के आरोप भी लगे हैं।
- भविष्य में नई जमानत याचिका दायर करने का अधिकार रहेगा।
कोलकाता, १९ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के विवादास्पद संदेशखाली मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम पर हुए हमले के संदर्भ में गिरफ्तार किए गए आरोपी शेख शाहजहां और उनके भाई आलमगीर को कलकत्ता हाईकोर्ट से एक बड़ा झटका मिला है। अदालत ने दोनों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
यह मामला तब का है जब संदेशखाली में ईडी द्वारा की गई छापेमारी के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं और उनके समर्थकों ने ईडी की टीम पर हमला किया था। ईडी के अधिकारी और उनके साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवान जब राज्य में करोड़ों रुपए के पीडीएस वितरण घोटाले के सिलसिले में शेख शाहजहां के आवास पर छापे के लिए गए थे, तब शाहजहां के समर्थकों ने उन पर प्रहार किया और उन्हें गंभीर रूप से पीटा। इस घटना ने पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल उत्पन्न कर दी थी और इसे देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित कर दी गई थी।
गुरुवार को, जब शाहजहां ने कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच में जस्टिस सुव्रा घोष के सामने जमानत अर्जी प्रस्तुत की, तो सीबीआई के वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यदि शाहजहां को जमानत पर रिहा किया गया, तो वह अपने खिलाफ दर्ज मामलों के गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास करेगा। सीबीआई के वकील ने यह भी कहा कि जेल में रहते हुए भी, उसने पहले अपने अंडरवर्ल्ड सहयोगियों द्वारा मुख्य गवाहों के परिवार को धमकाने और उनकी हत्या की कोशिश की थी; ये साथी अब भी जेल से बाहर हैं।
आखिरकार, जस्टिस घोष ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए शाहजहां की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, सिंगल-जज बेंच ने यह भी कहा कि जांच की प्रगति और नए तथ्यों के आधार पर, शाहजहां के पास भविष्य में नई जमानत अर्जी दायर करने का अधिकार होगा।
सीबीआई ने इस मामले की जांच के दौरान कार्रवाई करते हुए शेख शाहजहां और उनके भाई आलमगीर को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद, दोनों आरोपियों ने अदालत में जमानत याचिका दाखिल की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और आरोपियों को रिहा करने से जांच प्रभावित हो सकती है। कोलकाता हाईकोर्ट ने सीबीआई की दलीलों को मानते हुए दोनों आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि शाहजहां को सबसे पहले पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था और बाद में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया, जो इस मामले की जांच कर रही है।