क्या कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला सीएम ममता बनर्जी की पोल खोलता है?

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क्या कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला सीएम ममता बनर्जी की पोल खोलता है?

सारांश

कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले ने ममता बनर्जी सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। भाजपा नेता तरुण चुघ ने ईडी जांच को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। क्या यह एक राजनीतिक खेल है या कुछ और? जानिए इस मामले के पीछे की सच्चाई।

Key Takeaways

  • कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला ममता बनर्जी की नीतियों पर सवाल उठाता है।
  • तरुण चुघ ने ईडी जांच को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
  • टीएमसी के विधायकों पर एसआईआर प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप।
  • लालू यादव पर भी गंभीर टिप्पणियाँ की गई हैं।
  • यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का संकेत देता है।

कोलकाता, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने ममता बनर्जी सरकार और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने ईडी बनाम ममता बनर्जी मामले और पश्चिम बंगाल में हुई छापेमारी को लेकर समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला सीएम ममता बनर्जी के सभी प्रचार और दावों की पोल खोल देता है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि टीएमसी जो बातें कह रही थी, वे गलत थीं।

तरुण चुघ ने सवाल उठाते हुए कहा, "आखिर उस फाइल में ऐसा क्या था, जिसे छिपाने के लिए मुख्यमंत्री को खुद वहां पहुंचना पड़ा? यह भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है जब किसी निजी कंपनी की ईडी जांच में एक राजनीतिक पार्टी, मुख्यमंत्री और पूरी सरकार गैर-संवैधानिक और गैर-कानूनी तरीकों का सहारा ले रही है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम ममता बनर्जी का यह व्यवहार यह दर्शाता है कि अपने करीबी लोगों को बचाने के लिए यह पूरा नाटक किया जा रहा है।

तरुण चुघ ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लालू यादव और उनका पूरा परिवार वर्षों से जंगलराज और लूट-खसोट को बचाने के लिए राजनीतिक प्रतिशोध का रोना रोते रहे हैं, लेकिन अदालत ने ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार कर यह साफ कर दिया है कि मामले में आरोप बेहद गंभीर हैं और इसका जवाब जनता को देना पड़ेगा। चुघ ने कहा कि अदालत का फैसला यह संदेश देता है कि कानून के सामने कोई भी परिवार या राजनीतिक विरासत टिक नहीं सकती।

वहीं दूसरी ओर, कोलकाता में केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनका आरोप है कि टीएमसी के विधायक और उनके समर्थक जानबूझकर एसआईआर प्रक्रिया को रोकने के लिए तोड़फोड़ कर रहे हैं। मजूमदार ने दावा किया कि यह सिर्फ तृणमूल के हित में नहीं किया जा रहा, बल्कि इसका उद्देश्य कथित तौर पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल में बसाना, राज्य की जनसांख्यिकी बदलना और इसके पीछे एक बड़े एजेंडे को आगे बढ़ाना है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि न्यायपालिका का निर्णय राजनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण होता है। जनता को हमेशा पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता होती है। इस तरह के मामलों में, हमें सच्चाई की खोज करनी चाहिए, चाहे वह किसी के भी खिलाफ हो।
NationPress
15/01/2026

Frequently Asked Questions

कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला क्या है?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी जांच को लेकर गंभीर टिप्पणी की है।
तरुण चुघ ने क्या आरोप लगाए हैं?
तरुण चुघ ने कहा कि ममता बनर्जी अपने करीबी लोगों को बचाने के लिए नाटक कर रही हैं।
क्या टीएमसी पर भी आरोप लगाए गए हैं?
हाँ, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने टीएमसी के विधायकों पर एसआईआर प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
लालू यादव के बारे में क्या कहा गया है?
तरुण चुघ ने लालू यादव और उनके परिवार पर भी निशाना साधा है, यह कहते हुए कि वे राजनीतिक प्रतिशोध का रोना रो रहे हैं।
इस मामले का राजनीतिक प्रभाव क्या हो सकता है?
यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है।
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