कोलकाता: ईडी ने तृणमूल विधायक देबाशीष कुमार को अवैध जमीन हड़पने के मामले में समन भेजा
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने तृणमूल विधायक देबाशीष कुमार को समन भेजा है।
- अवैध जमीन कब्जे के मामले में छापेमारी की गई थी।
- तृणमूल का आरोप है कि यह चुनावी राजनीति का हिस्सा है।
- भाजपा ने कहा कि यह अदालत के आदेश पर हो रहा है।
कोलकाता, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को दक्षिण कोलकाता के राशबिहारी विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के विधायक और कोलकाता नगर निगम (एमएमआईसी) के सदस्य देबाशीष कुमार को पश्चिम बंगाल में भूमि पर अवैध कब्ज़े के मामले में समन जारी किया।
जब यह रिपोर्ट तैयार की जा रही थी, तब देबाशीष कुमार पूछताछ के लिए सॉल्ट लेक स्थित केंद्रीय सरकारी कार्यालय (सीजीओ) परिसर में ईडी के दफ्तर पहुंचे थे। इस बार भी कुमार को राशबिहारी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है।
सूत्रों ने बताया कि 28 मार्च को ईडी के अधिकारियों ने कोलकाता और इसके आस-पास कुछ स्थानों पर अवैध कब्जे के मामले में छापेमारी की थी। उसी दिन, एक संगठन के कार्यालय और उससे जुड़े अधिकारियों के निवास पर भी तलाशी ली गई थी।
जानकारी के अनुसार, यह संगठन निवेशकों को बड़ा मुनाफ़ा देने का वादा कर पैसे जुटाता था, लेकिन बाद में लोगों के साथ धोखाधड़ी की जाती थी। जांच के दौरान कुमार का नाम सामने आया और ईडी के अधिकारियों ने अपनी जांच के आधार पर उन्हें समन भेजा।
बताया गया है कि ईडी ने पश्चिम बंगाल के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में इस संगठन के खिलाफ दर्ज करीब 17 प्राथमिकी के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी। 28 मार्च को छापेमारी और तलाशी के दौरान ईडी के अधिकारियों ने संगठन के खातों की किताबों की जांच की और इसके निदेशकों तथा वरिष्ठ अधिकारियों से भी पूछताछ की।
सूत्रों का कहना है कि जांच और पूछताछ के दौरान कुमार का नाम सामने आया और जांच अधिकारियों ने इस मामले में उनसे पूछताछ करने का निर्णय लिया।
तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व ने यह आरोप लगाया है कि अगले महीने पश्चिम बंगाल में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने पार्टी के नेताओं और उम्मीदवारों को परेशान करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया है, और कुमार को भेजा गया समन इसका एक उदाहरण है।
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के राज्य नेताओं ने कहा कि ईडी द्वारा इस मामले की जांच अदालत के आदेश पर की जा रही है, इसलिए इस घटनाक्रम में केंद्र सरकार या भाजपा का कोई हस्तक्षेप नहीं है।