बलूचिस्तान में धारा 144 लागू: 30 दिनों तक हथियार प्रदर्शन, डबल राइडिंग और भीड़ पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में प्रशासन ने 18 मई 2026 को धारा 144 लागू कर दी है, जो 30 दिनों तक प्रभावी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार यह कदम संभावित आतंकवादी खतरों के मद्देनजर एहतियात के तौर पर उठाया गया है। गृह विभाग की अधिसूचना के तहत ये प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
प्रतिबंधों का दायरा
गृह विभाग की अधिसूचना के अनुसार, इस आदेश के तहत हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर पूर्ण रोक लगाई गई है। इसके साथ ही मोटरसाइकिल पर डबल राइडिंग (पिलियन राइडिंग) और पाँच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर भी प्रतिबंध है। गृह विभाग के सहायक अधिकारी बाबर यूसुफजई ने बताया कि चार से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर भी पाबंदी लागू रहेगी।
उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक स्थानों पर मास्क, मफलर या किसी अन्य वस्तु से चेहरा ढकने पर भी रोक लगाई गई है, ताकि पहचान प्रक्रिया बाधित न हो। सभी डिविजनल कमिश्नरों, डिप्टी कमिश्नरों, पुलिस अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों को इन आदेशों के कड़े पालन के निर्देश जारी किए गए हैं।
सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट
संभावित हमलों के खतरे को देखते हुए सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में सुरक्षा हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं और इस क्षेत्र में उग्रवादी गतिविधियों की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रहीं।
मानवाधिकार आयोग की चिंता
16 मई को पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा स्थिति के बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताई थी। आयोग ने कहा कि इन क्षेत्रों में नागरिक जबरन गायब किए जाने, टारगेट किलिंग और उग्रवादी हमलों के बीच फंसे हुए हैं।
HRCP ने ग्वादर विश्वविद्यालय के कुलपति, प्र-उपकुलपति और दो अन्य कर्मचारियों के मस्तुंग में कथित अपहरण का भी उल्लेख किया। आयोग के अनुसार यह घटना राज्य की प्रमुख राजमार्गों को सुरक्षित रखने और नागरिकों की जान-माल की रक्षा करने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
खैबर पख्तूनख्वा में भी हमले
HRCP ने खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू, बाजौर और लक्की मरवत में हुए घातक हमलों का भी जिक्र किया। आयोग ने सरकार से ठोस कार्रवाई की माँग की है, ताकि मानव जीवन और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। गौरतलब है कि यह पाकिस्तान के दो सबसे अशांत प्रांतों में एक साथ बढ़ते संकट की तस्वीर पेश करता है।
बलूचिस्तान में धारा 144 का यह कदम आने वाले हफ्तों में प्रांतीय सुरक्षा नीति की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकता है।