पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई: 16 अवैध कॉल सेंटर पर छापेमारी, 20 करोड़ की संपत्ति जब्त

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पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई: 16 अवैध कॉल सेंटर पर छापेमारी, 20 करोड़ की संपत्ति जब्त

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल में अवैध कॉल सेंटर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। 16 मार्च को 16 स्थानों पर छापेमारी के दौरान 20 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई। यह जांच राजनीतिक फंडिंग के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुख्य बातें

ईडी ने 16 स्थानों पर छापेमारी की।
20 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई।
साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई।
अवैध कॉल सेंटर अमेरिका के नागरिकों को टारगेट करता था।
जांच में और खुलासों की संभावना।

नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में चल रहे अवैध कॉल सेंटर के मामले में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। कोलकाता का जोनल कार्यालय 16 मार्च 2026 को राज्य के विभिन्न शहरों जैसे कोलकाता, हावड़ा, सिलीगुड़ी, और दुर्गापुर में कुल 16 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। ये छापेमारी टेक्नोसोलिस इन्फॉर्मेटिक्स लिमिटेड, सुराश्री कर, सुभाजीत चक्रवर्ती और उनके सहयोगियों से संबंधित हैं।

तलाशी के दौरान, ईडी ने कई महत्वपूर्ण जब्तियां कीं। इनमें 2.5 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), सोने के सिक्के, क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित दस्तावेज, आपत्तिजनक कागजात और कई डिजिटल उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा, जांच में कई अचल संपत्तियों का पता चला है, जिनमें जमीन, होटल और रिसॉर्ट शामिल हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक है। ये संपत्तियां कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन से खरीदी गई थीं।

ईडी ने दो बांग्लादेशी पासपोर्ट और चार लक्जरी वाहन, जिनमें एक मर्सिडीज कार भी शामिल है, जब्त किए। सिलीगुड़ी में एक स्थान से 88 विभिन्न ब्रांड की शराब की बोतलें बरामद की गईं, जिन्हें पश्चिम बंगाल आबकारी विभाग को सौंपा गया। यह कार्रवाई 2026 के विधानसभा चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है, क्योंकि अवैध गतिविधियां राजनीतिक फंडिंग या प्रभाव से जुड़ी हो सकती हैं।

यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें IPC 1860 और भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। आरोपी एक बड़े अवैध कॉल सेंटर नेटवर्क का संचालन कर रहे थे, जो मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को टारगेट करता था। वे लोगों को ठगने के लिए फर्जी तकनीकी सहायता और अन्य सेवाएं देते थे और फिर उनके बैंक खातों से पैसे निकालते थे। इस धोखाधड़ी से प्राप्त धन को गैर-कानूनी चैनलों से भारत लाया जाता था।

पीएमएलए के तहत जांच में सामने आया कि टेक्नोसोलिस इन्फॉर्मेटिक्स लिमिटेड और स्वर्गीय दिबांगकर धारा, सुराश्री कर, सुभाजीत चक्रवर्ती सहित अन्य कंपनियों के नाम पर कई बैंक खाते खोले गए थे। इन खातों का उपयोग विदेशी मुद्रा प्राप्त करने और 'अपराध से प्राप्त धन' को लॉन्डर करने के लिए किया जाता था। ये कंपनियां अवैध कॉल सेंटर के संचालन से जुड़ी हुई हैं।

ईडी के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सख्त रुख का हिस्सा है। छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों और उपकरणों की जांच से और अधिक खुलासे होने की संभावना है। आगे की जांच जारी है, जिसमें और गिरफ्तारियां और जब्तियां हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इससे राजनीतिक फंडिंग भी प्रभावित हो सकती है। सरकार की यह पहल चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के प्रयास का हिस्सा है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने किस तरह की संपत्ति जब्त की?
ईडी ने 2.5 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट, सोने के सिक्के, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े दस्तावेज, और कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए।
यह कार्रवाई कब की गई?
यह कार्रवाई 16 मार्च 2026 को की गई।
ईडी की जांच किस पर आधारित है?
यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है।
कॉल सेंटर का मुख्य लक्ष्य कौन था?
यह अवैध कॉल सेंटर मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को टारगेट करता था।
क्या यह छापेमारी चुनावी प्रक्रिया पर असर डाल सकती है?
हाँ, यह कार्रवाई चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने के प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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