15 जुलाई 2026
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सेनापति में असम राइफल्स कैंप पर भीड़ का हमला: वाहनों में आग, सुरक्षा अभियान को बाधित करने की कोशिश

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सेनापति में असम राइफल्स कैंप पर भीड़ का हमला: वाहनों में आग, सुरक्षा अभियान को बाधित करने की कोशिश

सारांश

मणिपुर के सेनापति में उग्र भीड़ ने असम राइफल्स कैंप पर हमला किया — वाहनों में आग लगाई, ट्रक पलटे। यह हमला उस वक्त हुआ जब सुरक्षाबल सीजफायर उल्लंघन के आरोपी सशस्त्र कैडरों के खिलाफ अभियान चला रहे थे। उखरूल हमले में भी 3 संदिग्ध हिरासत में।

मुख्य बातें

मंगलवार रात 9:30 बजे उग्र भीड़ ने सेनापति स्थित असम राइफल्स कैंप पर हमला किया — पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी।
एक हल्का वाहन जलाया गया, दो ट्रक पलटे; कथित तौर पर एक नागरिक की कार भी जलाई गई।
हमला उस समय हुआ जब असम राइफल्स मकुइलोंगडी में सशस्त्र कैडरों के खिलाफ तलाशी अभियान चला रही थी।
सेनापति पुलिस और सीआरपीएफ की तैनाती के बाद मध्यरात्रि तक स्थिति नियंत्रित।
6 जुलाई के उखरूल घात हमले — जिसमें वारंट अधिकारी बलवंत सिंह और हवलदार चंद्र मोहन सिंह शहीद हुए — के सिलसिले में 3 संदिग्ध हिरासत में।
एनएससीएन (आईएम) ने उखरूल हमले में संलिप्तता से इनकार किया।

मणिपुर के सेनापति शहर में मंगलवार रात उग्र भीड़ ने असम राइफल्स के कैंप पर हमला बोल दिया — पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी की इस घटना में कई सैन्य वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब सुरक्षा बल मकुइलोंगडी क्षेत्र में सशस्त्र उग्रवादियों के खिलाफ तलाशी अभियान चला रहे थे। 15 जुलाई की सुबह अधिकारियों ने इस घटना की जानकारी दी।

घटनाक्रम: कैसे भड़की हिंसा

रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि मकुइलोंगडी क्षेत्र में — जो ओकलोंग स्थित नामित एनएससीएन (आईएम) कैंप से लगभग दो किलोमीटर पश्चिम में है — विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली थी कि सशस्त्र कैडर निर्धारित कैंपों से बाहर हथियारों और वर्दी के साथ घूम रहे हैं। यह स्थापित युद्धविराम (सीजफायर) नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था।

इसी के आधार पर असम राइफल्स ने क्षेत्र प्रभुत्व गश्त और तलाशी अभियान शुरू किया। अभियान के दौरान मकुइलोंगडी और ओकलोंग गांवों की ओर बढ़ रही टुकड़ियों को बड़ी संख्या में लोगों ने — जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं — रोक लिया। जवानों ने अत्यधिक संयम बरतते हुए स्थानीय प्रतिनिधियों से बातचीत की और आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारियों की अनुमति के बिना कोई भी टुकड़ी किसी गांव में प्रवेश नहीं करेगी।

कैंप पर हमला और संपत्ति का नुकसान

स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब मंगलवार रात लगभग 9 बजे सेनापति शहर में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और असम राइफल्स कैंप की ओर मार्च करने लगे। टुकड़ियों के वापस लौट जाने के बावजूद रात करीब 9:30 बजे भीड़ कैंप तक पहुंच गई।

हिंसा के दौरान एक हल्के वाहन को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि दो ट्रकों को पलटकर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किया गया। कथित तौर पर एक नागरिक की कार को भी जला दिया गया। सेनापति पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को तत्काल तैनात किया गया और मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि तक भीड़ को तितर-बितर कर दिया गया।

सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया

रक्षा प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि सीजफायर मॉनिटरिंग ग्रुप (सीएफएमजी) को इन कथित उल्लंघनों की औपचारिक जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल शांति बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून के शासन को कायम रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं तथा संयम और पेशेवर व्यवहार का निरंतर परिचय दे रहे हैं।

उखरूल हमले में तीन संदिग्ध हिरासत में

इस बीच, एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 6 जुलाई को मणिपुर के उखरूल जिले में हुए घात लगाकर किए गए हमले के सिलसिले में तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। उस हमले में असम राइफल्स के वारंट अधिकारी बलवंत सिंह और हवलदार चंद्र मोहन सिंह शहीद हो गए थे।

यह हमला इंफाल-दीमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-2) पर नुंगशांग कोंग के पास संदिग्ध नागा उग्रवादियों द्वारा किया गया था। टीएम कासोम, लितान और सिकिबुंग क्षेत्रों में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान तीनों को हिरासत में लिया गया।

एनएससीएन (आईएम) का इनकार

नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम-इसाक-मुइवा (एनएससीएन-आईएम) ने 6 जुलाई के उखरूल हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। संगठन का कहना है कि वह केंद्र सरकार के साथ हुए युद्धविराम समझौते और जारी भारत-नागा शांति प्रक्रिया के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मणिपुर पहले से ही जातीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। मणिपुर में स्थिरता बहाल करने की दिशा में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो भी कैडर खुलेआम हथियारों के साथ घूम रहे थे — यह युद्धविराम ढांचे की कमज़ोरी उजागर करता है। उखरूल में दो जवानों की शहादत के बाद तीन संदिग्धों की गिरफ्तारी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन व्यापक जवाबदेही तंत्र के बिना इस क्षेत्र में स्थायी शांति की राह लंबी है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेनापति में असम राइफल्स कैंप पर हमला क्यों हुआ?
रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, असम राइफल्स मकुइलोंगडी क्षेत्र में सशस्त्र कैडरों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी के आधार पर तलाशी अभियान चला रही थी। माना जा रहा है कि भीड़ का हमला इसी सुरक्षा अभियान को बाधित करने के उद्देश्य से किया गया।
हमले में कितना नुकसान हुआ?
भीड़ ने असम राइफल्स के एक हल्के वाहन को आग लगा दी और दो ट्रकों को पलटकर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किया। कथित तौर पर एक नागरिक की कार को भी जलाया गया।
स्थिति को कैसे नियंत्रित किया गया?
सेनापति पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को तत्काल तैनात किया गया। सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि तक भीड़ को तितर-बितर कर दिया गया।
उखरूल घात हमले में क्या हुआ था और अब क्या स्थिति है?
6 जुलाई को इंफाल-दीमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-2) पर नुंगशांग कोंग के पास संदिग्ध नागा उग्रवादियों ने असम राइफल्स के वाहन पर घात लगाकर हमला किया था, जिसमें वारंट अधिकारी बलवंत सिंह और हवलदार चंद्र मोहन सिंह शहीद हो गए थे। इस मामले में अब तक तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया जा चुका है।
एनएससीएन (आईएम) का इस पूरे मामले में क्या रुख है?
नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम-इसाक-मुइवा (एनएससीएन-आईएम) ने 6 जुलाई के उखरूल हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। संगठन का कहना है कि वह केंद्र सरकार के साथ हुए युद्धविराम समझौते और भारत-नागा शांति प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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