मणिपुर शांति वार्ता: असम राइफल्स ने सेनापति में यूएनसी प्रतिनिधिमंडल से की अहम बैठक, उखरुल तनाव पर चर्चा

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मणिपुर शांति वार्ता: असम राइफल्स ने सेनापति में यूएनसी प्रतिनिधिमंडल से की अहम बैठक, उखरुल तनाव पर चर्चा

सारांश

तनाव के बीच असम राइफल्स ने मणिपुर के सेनापति में यूएनसी प्रतिनिधिमंडल से अहम वार्ता की। उखरुल में 24 अप्रैल की गोलीबारी में दो मौतों के बाद कुकी समुदाय की रैलियाँ और नागा संगठन से सैन्य संवाद — मणिपुर में शांति की कोशिशें जारी हैं, पर रास्ता अभी लंबा है।

Key Takeaways

  • असम राइफल्स ने 28 अप्रैल 2025 को सेनापति के ज्वालामुखी गैरीसन में यूएनसी अध्यक्ष एनजी लोरहो के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की।
  • बैठक में उखरुल क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और स्थानीय समुदायों के कल्याण पर केंद्रित रचनात्मक चर्चा हुई।
  • 24 अप्रैल को उखरुल जिले में हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हुई; इसके विरोध में चार जिलों में कुकी समुदाय ने रैलियाँ निकालीं।
  • यूएनसी भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने और मुक्त आवागमन व्यवस्था समाप्त करने का विरोध करता है; 2025 में व्यापार प्रतिबंध की घोषणा की थी।
  • दोनों पक्षों ने तनाव कम करने और स्थायी शांति की दिशा में सहयोगात्मक रूप से काम करने का संकल्प व्यक्त किया।

असम राइफल्स ने सोमवार, 28 अप्रैल 2025 को मणिपुर के सेनापति जिले के लियारोचिंग स्थित ज्वालामुखी गैरीसन में यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) के अध्यक्ष एनजी लोरहो के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ महत्वपूर्ण शांति वार्ता की। गुवाहाटी स्थित रक्षा पीआरओ के अनुसार, यह बैठक विशेष रूप से उखरुल क्षेत्र में जारी तनाव की पृष्ठभूमि में आयोजित की गई। क्षेत्र में 24 अप्रैल को हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत के बाद से माहौल संवेदनशील बना हुआ है।

बैठक में क्या हुआ

रक्षा पीआरओ के मुताबिक, दोनों पक्षों ने सेनापति और उखरुल क्षेत्रों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में शांति, स्थिरता और स्थानीय समुदायों के कल्याण को बनाए रखने के दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान किया गया। असम राइफल्स ने सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संवाद व आपसी विश्वास को प्रोत्साहित करने वाले वातावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक सकारात्मक और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण के साथ समाप्त हुई। दोनों पक्षों ने आपसी समझ बढ़ाने, तनाव को बढ़ने से रोकने और क्षेत्र में स्थायी शांति व सामान्य स्थिति की दिशा में सहयोगात्मक रूप से काम करने का साझा संकल्प व्यक्त किया।

यूएनसी कौन है और इसकी भूमिका क्या है

यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) मणिपुर में नागा जनजातियों का सर्वोच्च संगठन है, जो नागाओं के अधिकारों, उनकी पैतृक भूमि की सुरक्षा और नागा-बहुल क्षेत्रों में राजनीतिक मुद्दों के लिए सक्रिय रहता है। यह संस्था भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने और 'मुक्त आवागमन व्यवस्था' को समाप्त करने का विरोध करती है।

गौरतलब है कि यूएनसी ने 2025 में म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने के सरकार के फैसले के विरोध में नागा-बहुल क्षेत्रों में 'व्यापार प्रतिबंध' की घोषणा की थी। यह संगठन 2015 के फ्रेमवर्क समझौते सहित भारत सरकार के साथ नागा राजनीतिक मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत में शामिल रहता है। इसका प्रभाव सेनापति और चंदेल जैसे नागा-बहुल जिलों में व्यापक है।

उखरुल गोलीबारी और कुकी समुदाय की प्रतिक्रिया

24 अप्रैल को उखरुल जिले के एक गाँव में हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के विरोध में मणिपुर के चार जिलों के कुकी-बहुल इलाकों में बुधवार को हजारों लोगों ने रैलियाँ निकालीं। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर पहले से ही जातीय तनाव की चपेट में है और केंद्र तथा राज्य सरकार पर शांति बहाली का दबाव बना हुआ है।

आगे की राह

असम राइफल्स और यूएनसी के बीच यह वार्ता संकेत देती है कि सुरक्षा बल संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों में केवल बल प्रयोग तक सीमित न रहकर समुदायों के साथ संवाद का रास्ता भी अपना रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे संवाद तभी दीर्घकालिक शांति में परिणत होते हैं जब राजनीतिक स्तर पर भी ठोस कदम उठाए जाएँ। क्षेत्र में स्थायी सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए आने वाले हफ्तों में और बैठकों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Point of View

लेकिन मणिपुर के जातीय संघर्ष की जड़ें इतनी गहरी हैं कि गैरीसन-स्तरीय वार्ताएँ अकेले पर्याप्त नहीं हो सकतीं। उखरुल में दो मौतों के बाद कुकी समुदाय की रैलियाँ और नागा संगठन की माँगें — दोनों एक साथ चल रही हैं, जो दर्शाता है कि राज्य में एक साथ कई मोर्चों पर तनाव है। 2015 के फ्रेमवर्क समझौते के एक दशक बाद भी नागा राजनीतिक मुद्दों का ठोस समाधान नहीं निकला है, जो इन वार्ताओं की सीमाओं को रेखांकित करता है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह संवाद केंद्र सरकार के राजनीतिक हस्तक्षेप में तब्दील होगा।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

असम राइफल्स और यूएनसी के बीच सेनापति में वार्ता क्यों हुई?
यह वार्ता मणिपुर के उखरुल क्षेत्र में जारी तनाव और 24 अप्रैल को हुई गोलीबारी की पृष्ठभूमि में आयोजित की गई, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। असम राइफल्स ने शांति, स्थिरता और सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए यूएनसी प्रतिनिधिमंडल से संवाद का रास्ता चुना।
यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) क्या है?
यूएनसी मणिपुर में नागा जनजातियों का सर्वोच्च संगठन है, जो नागाओं के अधिकारों और पैतृक भूमि की सुरक्षा के लिए काम करता है। यह भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का विरोध करता है और 2015 के फ्रेमवर्क समझौते सहित भारत सरकार के साथ राजनीतिक वार्ता में शामिल रहता है।
उखरुल गोलीबारी में क्या हुआ था?
24 अप्रैल 2025 को उखरुल जिले के एक गाँव में गोलीबारी की घटना में दो लोगों की मौत हो गई। इस घटना के विरोध में मणिपुर के चार जिलों के कुकी-बहुल इलाकों में हजारों लोगों ने रैलियाँ निकालीं।
यूएनसी ने 2025 में व्यापार प्रतिबंध की घोषणा क्यों की थी?
यूएनसी ने 2025 में भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने और मुक्त आवागमन व्यवस्था समाप्त करने के सरकार के फैसले के विरोध में नागा-बहुल क्षेत्रों में व्यापार प्रतिबंध की घोषणा की थी। संगठन का मानना है कि यह कदम नागा समुदायों की पारंपरिक आवाजाही और जीवनयापन को प्रभावित करता है।
मणिपुर में शांति बहाली के प्रयास कहाँ तक पहुँचे हैं?
असम राइफल्स और यूएनसी के बीच ताज़ा वार्ता संवाद की दिशा में सकारात्मक कदम है, लेकिन राज्य में जातीय तनाव अभी भी बना हुआ है। 2015 के फ्रेमवर्क समझौते के बावजूद नागा राजनीतिक मुद्दों का स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकला है।
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