आंध्र प्रदेश में ₹60,285 करोड़ का राजस्व घाटा: वाईएसआरसीपी ने नायडू सरकार की राजकोषीय नीति पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता और आंध्र प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री बुग्गना राजेंद्रनाथ ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य वित्त वर्ष 2024-25 में ₹60,285 करोड़ के राजस्व घाटे के साथ देशभर में सबसे बुरी स्थिति में है। उनके अनुसार, यह आँकड़ा आंध्र प्रदेश को राजस्व घाटे के मामले में देश का नंबर एक राज्य बनाता है — जो किसी भी सत्तारूढ़ दल के लिए शर्मनाक स्थिति है।
मुख्य आरोप: कर राजस्व में नकारात्मक वृद्धि
राजेंद्रनाथ ने एक विशेष साक्षात्कार में दावा किया कि राज्य के अपने कर राजस्व में वृद्धि दर घटकर 1.97 प्रतिशत रह गई है, जबकि राज्य के स्वयं के कर राजस्व में माइनस 3.22 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा, 'राज्य के किसी भी बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन पर किसी भी आम आदमी से पूछिए, आपको जवाब मिल जाएगा।' इस प्रदर्शन के चलते आंध्र प्रदेश कर राजस्व वृद्धि में देशभर में 22वें स्थान पर खिसक गया है और सिक्किम तथा मेघालय जैसे छोटे राज्यों से भी पीछे रह गया है।
सीएजी और आरबीआई के आँकड़ों का हवाला
पूर्व मंत्री ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) और भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के आधिकारिक आँकड़े सत्तारूढ़ कुटमी गठबंधन के उन चुनाव-पूर्व दावों का खंडन करते हैं, जिनमें कहा गया था कि जगन मोहन रेड्डी की पिछली सरकार ने अर्थव्यवस्था का कुप्रबंधन किया। राजेंद्रनाथ के अनुसार, आधिकारिक डेटा एक अलग ही तस्वीर पेश करता है।
ऋण तुलना: वाईएसआरसीपी बनाम टीडीपी कार्यकाल
राजेंद्रनाथ ने आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वाईएसआरसीपी के पाँच साल के कार्यकाल में कुल ऋण लगभग ₹3.3 लाख करोड़ रहा, जो 13.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) पर आधारित था। इसकी तुलना में, उन्होंने दावा किया कि 2014-2019 के टीडीपी शासनकाल में यही सीएजीआर 22.6 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा गठबंधन सरकार ने महज दो वर्षों में ₹3.4 लाख करोड़ का नया कर्ज ले लिया है। गौरतलब है कि वाईएसआरसीपी के कार्यकाल में कोविड-19 महामारी जैसी असाधारण चुनौतियाँ भी थीं, फिर भी राजकोषीय घाटा 2.5 से 2.6 प्रतिशत के बीच बनाए रखने का दावा किया गया।
श्वेत पत्र पर सवाल
राजेंद्रनाथ ने विधानसभा में वित्तीय दावों को सही ठहराने के लिए सरकार की 'श्वेत पत्र' पर निर्भरता को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, 'श्वेत पत्र एक राजनीतिक बयान है, इसकी कोई कानूनी वैधता नहीं होती।' उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जिम्मेदार सरकारी अधिकारी सदन के अंदर और बाहर असंगत आँकड़े पेश करके 'घटिया हथकंडे' अपना रहे हैं।
आगे क्या
यह आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय में आए हैं जब आंध्र प्रदेश की वित्तीय स्थिति और राजकोषीय अनुशासन को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य की वित्तीय सेहत पर सीएजी की अगली रिपोर्ट इस बहस को और गहरा कर सकती है। नायडू सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।