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आंध्र प्रदेश में ₹60,285 करोड़ का राजस्व घाटा: वाईएसआरसीपी ने नायडू सरकार की राजकोषीय नीति पर उठाए सवाल

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आंध्र प्रदेश में ₹60,285 करोड़ का राजस्व घाटा: वाईएसआरसीपी ने नायडू सरकार की राजकोषीय नीति पर उठाए सवाल

सारांश

वाईएसआरसीपी नेता बुग्गना राजेंद्रनाथ ने नायडू सरकार पर ₹60,285 करोड़ के राजस्व घाटे और महज दो वर्षों में ₹3.4 लाख करोड़ के कर्ज का आरोप लगाया है। सीएजी और आरबीआई के आँकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य कर राजस्व वृद्धि में देश में 22वें स्थान पर आ गया है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी नेता बुग्गना राजेंद्रनाथ ने दावा किया कि आंध्र प्रदेश वित्त वर्ष 2024-25 में ₹60,285 करोड़ के राजस्व घाटे के साथ देश में पहले स्थान पर है।
राज्य के अपने कर राजस्व में माइनस 3.22 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज, कर राजस्व वृद्धि में राज्य 22वें स्थान पर।
मौजूदा गठबंधन सरकार पर महज दो वर्षों में ₹3.4 लाख करोड़ का कर्ज लेने का आरोप।
वाईएसआरसीपी के पाँच वर्षों में ऋण 13.5% सीएजीआर पर, जबकि 2014-2019 के टीडीपी कार्यकाल में यह 22.6% सीएजीआर था — राजेंद्रनाथ का दावा।
राजेंद्रनाथ ने सरकार के 'श्वेत पत्र' को कानूनी वैधता-रहित 'राजनीतिक बयान' करार दिया।

वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता और आंध्र प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री बुग्गना राजेंद्रनाथ ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य वित्त वर्ष 2024-25 में ₹60,285 करोड़ के राजस्व घाटे के साथ देशभर में सबसे बुरी स्थिति में है। उनके अनुसार, यह आँकड़ा आंध्र प्रदेश को राजस्व घाटे के मामले में देश का नंबर एक राज्य बनाता है — जो किसी भी सत्तारूढ़ दल के लिए शर्मनाक स्थिति है।

मुख्य आरोप: कर राजस्व में नकारात्मक वृद्धि

राजेंद्रनाथ ने एक विशेष साक्षात्कार में दावा किया कि राज्य के अपने कर राजस्व में वृद्धि दर घटकर 1.97 प्रतिशत रह गई है, जबकि राज्य के स्वयं के कर राजस्व में माइनस 3.22 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा, 'राज्य के किसी भी बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन पर किसी भी आम आदमी से पूछिए, आपको जवाब मिल जाएगा।' इस प्रदर्शन के चलते आंध्र प्रदेश कर राजस्व वृद्धि में देशभर में 22वें स्थान पर खिसक गया है और सिक्किम तथा मेघालय जैसे छोटे राज्यों से भी पीछे रह गया है।

सीएजी और आरबीआई के आँकड़ों का हवाला

पूर्व मंत्री ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) और भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के आधिकारिक आँकड़े सत्तारूढ़ कुटमी गठबंधन के उन चुनाव-पूर्व दावों का खंडन करते हैं, जिनमें कहा गया था कि जगन मोहन रेड्डी की पिछली सरकार ने अर्थव्यवस्था का कुप्रबंधन किया। राजेंद्रनाथ के अनुसार, आधिकारिक डेटा एक अलग ही तस्वीर पेश करता है।

ऋण तुलना: वाईएसआरसीपी बनाम टीडीपी कार्यकाल

राजेंद्रनाथ ने आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वाईएसआरसीपी के पाँच साल के कार्यकाल में कुल ऋण लगभग ₹3.3 लाख करोड़ रहा, जो 13.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) पर आधारित था। इसकी तुलना में, उन्होंने दावा किया कि 2014-2019 के टीडीपी शासनकाल में यही सीएजीआर 22.6 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा गठबंधन सरकार ने महज दो वर्षों में ₹3.4 लाख करोड़ का नया कर्ज ले लिया है। गौरतलब है कि वाईएसआरसीपी के कार्यकाल में कोविड-19 महामारी जैसी असाधारण चुनौतियाँ भी थीं, फिर भी राजकोषीय घाटा 2.5 से 2.6 प्रतिशत के बीच बनाए रखने का दावा किया गया।

श्वेत पत्र पर सवाल

राजेंद्रनाथ ने विधानसभा में वित्तीय दावों को सही ठहराने के लिए सरकार की 'श्वेत पत्र' पर निर्भरता को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, 'श्वेत पत्र एक राजनीतिक बयान है, इसकी कोई कानूनी वैधता नहीं होती।' उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जिम्मेदार सरकारी अधिकारी सदन के अंदर और बाहर असंगत आँकड़े पेश करके 'घटिया हथकंडे' अपना रहे हैं।

आगे क्या

यह आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय में आए हैं जब आंध्र प्रदेश की वित्तीय स्थिति और राजकोषीय अनुशासन को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य की वित्तीय सेहत पर सीएजी की अगली रिपोर्ट इस बहस को और गहरा कर सकती है। नायडू सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनकी असली ताकत यह है कि वे सीएजी और आरबीआई जैसे संस्थागत स्रोतों का सहारा लेते हैं — जिन्हें खारिज करना नायडू सरकार के लिए आसान नहीं होगा। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि ये आँकड़े एक विपक्षी नेता द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं और स्वतंत्र सत्यापन की प्रतीक्षा में हैं। आंध्र प्रदेश की राजकोषीय चुनौतियाँ राज्य के विभाजन (2014) के बाद से संरचनात्मक हैं — इसलिए किसी एक सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराना सरलीकरण होगा। असली सवाल यह है कि क्या वर्तमान सरकार इन आँकड़ों का पारदर्शी और विस्तृत जवाब देगी, या श्वेत पत्र की आड़ में बहस को टालती रहेगी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश का राजस्व घाटा 2024-25 में कितना है?
वाईएसआरसीपी नेता बुग्गना राजेंद्रनाथ के दावे के अनुसार, आंध्र प्रदेश वित्त वर्ष 2024-25 में ₹60,285 करोड़ के राजस्व घाटे के साथ देशभर में सबसे ऊपर है। यह आँकड़ा राज्य को राजस्व घाटे के मामले में देश का सबसे बुरी स्थिति वाला राज्य बनाता है।
बुग्गना राजेंद्रनाथ ने नायडू सरकार पर क्या आरोप लगाए?
राजेंद्रनाथ ने आरोप लगाया कि नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने महज दो वर्षों में ₹3.4 लाख करोड़ का कर्ज लिया है और राज्य के अपने कर राजस्व में माइनस 3.22 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सदन के अंदर और बाहर असंगत आँकड़े पेश कर रही है।
वाईएसआरसीपी और टीडीपी के कार्यकाल में ऋण की तुलना कैसी है?
राजेंद्रनाथ के अनुसार, वाईएसआरसीपी के पाँच वर्षों में कुल ऋण ₹3.3 लाख करोड़ रहा और सीएजीआर 13.5 प्रतिशत था, जबकि 2014-2019 के टीडीपी कार्यकाल में यह सीएजीआर 22.6 प्रतिशत था। ये दावे विपक्षी नेता के हैं और स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता है।
आंध्र प्रदेश कर राजस्व वृद्धि में किस स्थान पर है?
राजेंद्रनाथ के दावे के अनुसार, राज्य के कर राजस्व में वृद्धि दर घटकर 1.97 प्रतिशत रह गई है, जिससे आंध्र प्रदेश इस मामले में देशभर में 22वें स्थान पर आ गया है। राज्य सिक्किम और मेघालय जैसे छोटे राज्यों से भी पीछे रह गया है।
सरकार के श्वेत पत्र पर विपक्ष की क्या आपत्ति है?
राजेंद्रनाथ ने कहा कि श्वेत पत्र एक राजनीतिक बयान है जिसकी कोई कानूनी वैधता नहीं होती। उनका तर्क है कि वित्तीय दावों को सही ठहराने के लिए सीएजी और आरबीआई जैसे आधिकारिक स्रोतों का सहारा लेना चाहिए, न कि सरकार द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज़ का।
राष्ट्र प्रेस
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