आंध्र प्रदेश ₹60,285 करोड़ राजस्व घाटे के साथ देश में पहले स्थान पर, वाईएसआरसीपी ने नायडू सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के वरिष्ठ नेता बुग्गना राजेंद्रनाथ ने 18 जुलाई को अमरावती में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू सरकार के दो साल के कार्यकाल पर कड़े सवाल उठाए। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ताज़ा रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में आंध्र प्रदेश ₹60,285 करोड़ के राजस्व घाटे के साथ देश का सर्वाधिक राजस्व घाटे वाला राज्य बन गया है।
मुख्य घटनाक्रम
बुग्गना राजेंद्रनाथ ने कहा कि वित्तीय मामलों पर चर्चा करते समय तथ्यों और आंकड़ों का सहारा लेना ज़रूरी है। उन्होंने CAG रिपोर्ट के आधार पर बताया कि ₹60,285 करोड़ का यह राजस्व घाटा नायडू सरकार की आर्थिक नीतियों और शासन-शैली पर सीधा सवाल खड़ा करता है। उनके अनुसार, यह आंकड़ा राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति को उजागर करता है।
कर राजस्व में भी पिछड़ा आंध्र प्रदेश
राजेंद्रनाथ ने कर संग्रह के मोर्चे पर भी राज्य की स्थिति को चिंताजनक बताया। आंकड़ों के अनुसार, कर राजस्व के मामले में आंध्र प्रदेश देशभर के राज्यों में 22वें स्थान पर है। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, केरल और सिक्किम जैसे अपेक्षाकृत छोटे राज्यों से भी पीछे है। इसके अलावा, राज्य के कर राजस्व में वृद्धि दर मात्र 1.97 प्रतिशत रही है, जिसे उन्होंने 'बेहद चिंताजनक' करार दिया।
सरकार के प्रदर्शन पर विपक्ष का कटाक्ष
चंद्रबाबू नायडू सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर पूछे गए सवाल के जवाब में राजेंद्रनाथ ने तंज कसते हुए कहा कि जब पत्रकार सरकार के प्रदर्शन, चुनावी वादों या घोषणापत्र के क्रियान्वयन पर सवाल पूछते हैं, तो उनके चेहरे पर 'हल्की मुस्कान' आ जाती है। उनके अनुसार, यही मुस्कान सरकार के कामकाज की असली तस्वीर बयाँ करती है।
उन्होंने कहा, 'अगर आप राज्य के किसी भी बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, कस्बे या गाँव में जाकर आम लोगों से सरकार के दो साल के कामकाज के बारे में पूछेंगे तो आपको एक ही जवाब मिलेगा कि प्रदर्शन बहुत खराब रहा है। मैं यही कह सकता हूँ कि सरकार का कामकाज बेहद निराशाजनक रहा है।'
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश विभाजन के बाद से ही राजस्व संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। राजस्व घाटे का सीधा असर राज्य की सामाजिक कल्याण योजनाओं, बुनियादी ढाँचे और सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ता है। गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश पहले से ही विशेष राज्य दर्जे की माँग को लेकर केंद्र से संघर्षरत रहा है।
क्या होगा आगे
वाईएसआरसीपी के इस हमले के बाद नायडू सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। विपक्ष के इन आरोपों के मद्देनज़र राज्य सरकार पर वित्तीय पारदर्शिता और राजस्व सुधार के उपायों को सार्वजनिक करने का दबाव बढ़ सकता है।