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मनरेगा में 10 साल में 1% परिवारों को भी नहीं मिला 100 दिन का रोज़गार: MP के पूर्व मंत्री दीपक जोशी का PM को पत्र

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मनरेगा में 10 साल में 1% परिवारों को भी नहीं मिला 100 दिन का रोज़गार: MP के पूर्व मंत्री दीपक जोशी का PM को पत्र

सारांश

मध्य प्रदेश में 10 साल में 1% मनरेगा जॉब कार्डधारी परिवारों को भी 100 दिन का रोज़गार नहीं मिला — यह दावा है पूर्व राज्य मंत्री दीपक जोशी का, जिन्होंने PM मोदी को पत्र लिखकर नई 125-दिन की योजना को पारदर्शी बनाने की माँग की है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश के पूर्व राज्य मंत्री दीपक जोशी ने 18 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मनरेगा की विफलता उजागर की।
राज्य विधानसभा के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में पिछले 10 वर्षों में 1% जॉब कार्डधारी परिवारों को भी 100 दिन का रोज़गार नहीं मिला।
मनरेगा में वर्तमान में 15 करोड़ जॉब कार्ड के साथ 26 करोड़ मज़दूर पंजीकृत हैं।
वन अधिकार क्षेत्र के पट्टाधारकों को 150 दिन रोज़गार देने का प्रावधान था, किंतु स्थिति 'शून्य' रही।
नई योजना 'वीबी-जीआरएएम जी' में 125 दिन रोज़गार का वादा है; जोशी ने पारदर्शी क्रियान्वयन की माँग की।
आजीविका मिशन में पोषण आहार, गणवेश और भर्ती घोटालों सहित कथित भ्रष्टाचार के आरोप उजागर किए गए।

मध्य प्रदेश के पूर्व राज्य मंत्री दीपक जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मनरेगा योजना की ज़मीनी हकीकत उजागर की है। आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में पिछले 10 वर्षों में कुल जॉब कार्डधारी परिवारों में से 1 प्रतिशत को भी पूरे 100 दिन का रोज़गार नहीं मिल सका। यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार मनरेगा को नए नाम 'विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन' (वीबी-जीआरएएम जी) के तहत 125 दिन के रोज़गार के वादे के साथ पुनः लागू कर रही है।

मुख्य घटनाक्रम

जोशी ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि मनरेगा — जिसे दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार गारंटी योजना माना जाता है — में वर्तमान में 15 करोड़ जॉब कार्ड के साथ 26 करोड़ मज़दूर पंजीकृत हैं। योजना में प्रत्येक जॉब कार्डधारी परिवार को वर्ष में 100 दिन रोज़गार देने का कानूनी प्रावधान है। लेकिन राज्य विधानसभा में पेश आंकड़ों के हवाले से जोशी ने कहा कि मध्य प्रदेश में यह लक्ष्य एक दशक में एक बार भी पूरा नहीं हुआ।

वन अधिकार क्षेत्र और सांसद ग्रामों की स्थिति

पूर्व मंत्री ने बताया कि वन अधिकार क्षेत्र के पट्टाधारकों को मनरेगा के तहत 150 दिन रोज़गार देने का विशेष प्रावधान था, किंतु जानकारी जुटाने पर स्थिति 'शून्य' निकली। इसी प्रकार सांसद आदर्श ग्रामों में भी मनरेगा रोज़गार की स्थिति निराशाजनक बताई गई है। गौरतलब है कि ये वे गाँव हैं जिन्हें सांसदों ने आदर्श ग्राम के रूप में गोद लिया है।

आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार के आरोप

जोशी ने पत्र में यह भी उठाया कि नई योजना के नाम में 'आजीविका मिशन' जोड़ा गया है, जबकि प्रदेश में आजीविका मिशन पहले से कथित भ्रष्टाचार के घेरे में है। उन्होंने पोषण आहार घोटाले, गणवेश घोटाले, मिशन भर्ती घोटाले और ग्रामीण गरीब, दलित व आदिवासी महिलाओं के समूहों — ग्राम संगठनों और फेडरेशनों — के खातों से लाखों-करोड़ों रुपये निकाले जाने के आरोपों का उल्लेख किया। उनके अनुसार जाँच के नाम पर केवल लीपापोती हो रही है।

PM से पारदर्शिता की माँग

पूर्व मंत्री ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि नई योजना 'वीबी-जीआरएएम जी' में भगवान राम का नाम जुड़ा होने के कारण इसे पारदर्शी तरीके से संचालित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक गरीब जॉब कार्डधारी ग्रामीण मज़दूर परिवारों को वास्तव में 125 दिन का रोज़गार मिल सके। यह पत्र ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब ग्रामीण रोज़गार की माँग और आपूर्ति के बीच की खाई को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब उसी ढाँचे पर 125 दिन का नया वादा किया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि जब पुराने लक्ष्य पूरे नहीं हुए तो नई संख्या महज़ घोषणाबाज़ी है। आजीविका मिशन में कथित भ्रष्टाचार के आरोप और 'जाँच में लीपापोती' की शिकायत यह सवाल उठाती है कि क्या प्रशासनिक जवाबदेही के बिना नाम बदलने से ज़मीनी बदलाव संभव है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में मनरेगा के तहत 100 दिन का रोज़गार क्यों नहीं मिला?
राज्य विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में पिछले 10 वर्षों में 1% जॉब कार्डधारी परिवारों को भी 100 दिन का रोज़गार नहीं मिला। पूर्व मंत्री दीपक जोशी के अनुसार, मज़दूर लगातार मज़दूरी माँगते रहे लेकिन उन्हें काम नहीं दिया गया।
वीबी-जीआरएएम जी योजना क्या है?
यह मनरेगा का नया नाम है — 'विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन' (वीबी-जीआरएएम जी)। इस नई योजना में प्रत्येक जॉब कार्डधारी परिवार को 125 दिन का रोज़गार देने का प्रावधान किया गया है, जो पहले के 100 दिन से अधिक है।
दीपक जोशी ने PM मोदी को पत्र में क्या माँग की?
जोशी ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि नई योजना को पारदर्शी तरीके से संचालित किया जाए, ताकि गरीब, दलित और आदिवासी ग्रामीण मज़दूर परिवारों को वास्तव में 125 दिन का रोज़गार मिल सके।
आजीविका मिशन में किस तरह के भ्रष्टाचार के आरोप हैं?
जोशी के अनुसार, मध्य प्रदेश में आजीविका मिशन में पोषण आहार घोटाला, गणवेश घोटाला, भर्ती घोटाला और ग्रामीण महिला समूहों के खातों से लाखों-करोड़ों रुपये निकाले जाने के कथित मामले सामने आए हैं। उनका आरोप है कि जाँच के नाम पर केवल लीपापोती हो रही है।
वन अधिकार क्षेत्र के पट्टाधारकों को मनरेगा में कितने दिन रोज़गार मिलना चाहिए था?
वन अधिकार क्षेत्र के पट्टाधारकों को मनरेगा के तहत 150 दिन रोज़गार देने का विशेष प्रावधान था। किंतु जोशी ने बताया कि जानकारी जुटाने पर स्थिति 'शून्य' निकली, यानी यह प्रावधान व्यवहार में लागू नहीं हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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