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देहरादून 'सात मोड़' पर पेड़ कटाई रोकी: CM धामी ने दिए बातचीत के आदेश, 4,000 पेड़ों पर था खतरा

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देहरादून 'सात मोड़' पर पेड़ कटाई रोकी: CM धामी ने दिए बातचीत के आदेश, 4,000 पेड़ों पर था खतरा

सारांश

4,000 से अधिक पेड़ों की कटाई और 'ब्लैक हरेला' विरोध के बाद CM धामी ने देहरादून के 'सात मोड़' में पेड़ कटाई पर रोक लगाई। ₹743 करोड़ की NHAI परियोजना अब बहु-पक्षीय बातचीत पर निर्भर — विकास और पर्यावरण के बीच उत्तराखंड का पुराना द्वंद्व एक बार फिर केंद्र में।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के 'सात मोड़' वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई तत्काल रोकने का आदेश दिया।
भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के लिए 4,000 से अधिक पेड़ काटे जाने की योजना थी, जिसका व्यापक विरोध हुआ।
पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों ने 'हरेला' त्योहार को 'ब्लैक हरेला' के रूप में मनाकर विरोध जताया।
लगभग 20 किलोमीटर लंबी यह परियोजना ₹743 करोड़ की लागत से NHAI द्वारा HAM मोड में बनाई जा रही है।
परियोजना में 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास और वन्यजीव पुलिया का प्रावधान है।
पेड़ कटाई तब तक स्थगित रहेगी जब तक सभी पक्षों में सहमति नहीं बन जाती और उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं हो जाता।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 19 जुलाई 2025 को घोषणा की कि देहरादून के 'सात मोड़' वन क्षेत्र में भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों की कटाई तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है। पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों के बढ़ते विरोध के बीच मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी संबंधित पक्षों के बीच सहमति नहीं बन जाती, तब तक कोई भी निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ेगा।

विरोध की पृष्ठभूमि

यह कदम तब उठाया गया जब 4,000 से अधिक पेड़ों की कटाई के खिलाफ कई दिनों से आंदोलन चल रहा था। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने उत्तराखंड के पारंपरिक 'हरेला' त्योहार — जो पेड़ों और प्रकृति के उत्सव के रूप में मनाया जाता है — को इस बार 'ब्लैक हरेला' के रूप में मनाया। यह प्रतीकात्मक विरोध हाईवे विस्तार परियोजना के खिलाफ जन असंतोष की तीव्रता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री का रुख

मुख्यमंत्री धामी ने एक्स पर लिखा, 'मैंने देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स-लेन प्रोजेक्ट के बारे में हाल के दिनों में कई नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों द्वारा जताई गई चिंताओं और सुझावों पर गंभीरता से ध्यान दिया है।' उन्होंने मुख्य सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्थानीय नागरिकों, जन प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ विस्तृत बातचीत करें।

धामी ने कहा, 'विकास हमारे लिए जरूरी है, लेकिन लोगों की भावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों को नजरअंदाज करके कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि आगे की कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों का पूरा सम्मान करते हुए की जाएगी।

परियोजना का विवरण

लगभग 20 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट ₹743 करोड़ की लागत से हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। NHAI के अनुसार, परियोजना को विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए बचाव उपायों के अनुसार तैयार किया गया है, विशेष रूप से इस मार्ग पर स्थित हाथी कॉरिडोर को ध्यान में रखते हुए। परियोजना में लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास और छोटे वन्यजीवों की आवाजाही के लिए विशेष पुलिया का भी प्रावधान है।

पर्यावरण बनाम विकास का द्वंद्व

गौरतलब है कि उत्तराखंड में यह पहली बार नहीं है जब किसी सड़क चौड़ीकरण परियोजना को पर्यावरणीय विरोध का सामना करना पड़ा हो। चारधाम ऑल-वेदर रोड प्रोजेक्ट भी वनों की कटाई और भूस्खलन के खतरों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में विवादास्पद रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं और पर्यावरण संरक्षण की मांग तेज हो रही है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि पेड़ों की कटाई तब तक स्थगित रहेगी जब तक सभी पक्षों के बीच 'सहमति और भरोसे का संतोषजनक माहौल' नहीं बन जाता। अधिकारियों को स्थानीय लोगों के साथ बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया गया है। परियोजना के भविष्य पर अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों और बहु-पक्षीय परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'बातचीत' की यह प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और बाध्यकारी होगी। उत्तराखंड में चारधाम प्रोजेक्ट से लेकर अनेक हाईवे परियोजनाओं तक, 'परामर्श' के बाद भी वन क्षेत्र सिकुड़ते रहे हैं। NHAI की ₹743 करोड़ की परियोजना पर पहले ही हाईकोर्ट के निर्देश और कानूनी मंजूरियाँ हैं — ऐसे में 'सहमति' की शर्त कानूनी रूप से कितनी टिकाऊ है, यह स्पष्ट नहीं। जब तक स्वतंत्र पर्यावरणीय समीक्षा और सत्यापन-योग्य वृक्षारोपण प्रतिबद्धताएँ सामने नहीं आतीं, यह रोक एक अस्थायी राजनीतिक राहत बनकर रह सकती है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देहरादून 'सात मोड़' पर पेड़ कटाई क्यों रोकी गई?
पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों के व्यापक विरोध के बाद CM धामी ने यह रोक लगाई। भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे चौड़ीकरण के लिए 4,000 से अधिक पेड़ काटे जाने की योजना थी, जिसके विरोध में लोगों ने 'ब्लैक हरेला' मनाया।
भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे प्रोजेक्ट क्या है?
यह NHAI की लगभग 20 किलोमीटर लंबी सड़क चौड़ीकरण परियोजना है, जिसकी लागत ₹743 करोड़ है और इसे हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत बनाया जा रहा है। परियोजना में हाथी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए 3.5 किलोमीटर लंबा अंडरपास भी शामिल है।
'ब्लैक हरेला' विरोध क्या था?
हरेला उत्तराखंड का पारंपरिक त्योहार है जो पेड़ों और प्रकृति का उत्सव मनाता है। पेड़ कटाई के विरोध में स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों ने इस बार हरेला को 'ब्लैक हरेला' के रूप में मनाया — यह हाईवे विस्तार परियोजना के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध था।
पेड़ कटाई की रोक कब तक रहेगी?
CM धामी ने कहा है कि पेड़ों की कटाई तब तक स्थगित रहेगी जब तक सभी संबंधित पक्षों — स्थानीय नागरिकों, जन प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों — के बीच सहमति और भरोसे का संतोषजनक माहौल नहीं बन जाता। आगे की कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप होगी।
इस परियोजना में वन्यजीव संरक्षण के क्या प्रावधान हैं?
NHAI के अनुसार, परियोजना में लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास और छोटे वन्यजीवों की आवाजाही के लिए विशेष पुलिया बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य इस मार्ग पर मानव-वन्यजीव टकराव और सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत को कम करना है।
राष्ट्र प्रेस
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