देहरादून 'सात मोड़' पर पेड़ कटाई रोकी: CM धामी ने दिए बातचीत के आदेश, 4,000 पेड़ों पर था खतरा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 19 जुलाई 2025 को घोषणा की कि देहरादून के 'सात मोड़' वन क्षेत्र में भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों की कटाई तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है। पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों के बढ़ते विरोध के बीच मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी संबंधित पक्षों के बीच सहमति नहीं बन जाती, तब तक कोई भी निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ेगा।
विरोध की पृष्ठभूमि
यह कदम तब उठाया गया जब 4,000 से अधिक पेड़ों की कटाई के खिलाफ कई दिनों से आंदोलन चल रहा था। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने उत्तराखंड के पारंपरिक 'हरेला' त्योहार — जो पेड़ों और प्रकृति के उत्सव के रूप में मनाया जाता है — को इस बार 'ब्लैक हरेला' के रूप में मनाया। यह प्रतीकात्मक विरोध हाईवे विस्तार परियोजना के खिलाफ जन असंतोष की तीव्रता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री का रुख
मुख्यमंत्री धामी ने एक्स पर लिखा, 'मैंने देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स-लेन प्रोजेक्ट के बारे में हाल के दिनों में कई नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों द्वारा जताई गई चिंताओं और सुझावों पर गंभीरता से ध्यान दिया है।' उन्होंने मुख्य सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्थानीय नागरिकों, जन प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ विस्तृत बातचीत करें।
धामी ने कहा, 'विकास हमारे लिए जरूरी है, लेकिन लोगों की भावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों को नजरअंदाज करके कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि आगे की कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों का पूरा सम्मान करते हुए की जाएगी।
परियोजना का विवरण
लगभग 20 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट ₹743 करोड़ की लागत से हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। NHAI के अनुसार, परियोजना को विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए बचाव उपायों के अनुसार तैयार किया गया है, विशेष रूप से इस मार्ग पर स्थित हाथी कॉरिडोर को ध्यान में रखते हुए। परियोजना में लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास और छोटे वन्यजीवों की आवाजाही के लिए विशेष पुलिया का भी प्रावधान है।
पर्यावरण बनाम विकास का द्वंद्व
गौरतलब है कि उत्तराखंड में यह पहली बार नहीं है जब किसी सड़क चौड़ीकरण परियोजना को पर्यावरणीय विरोध का सामना करना पड़ा हो। चारधाम ऑल-वेदर रोड प्रोजेक्ट भी वनों की कटाई और भूस्खलन के खतरों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में विवादास्पद रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं और पर्यावरण संरक्षण की मांग तेज हो रही है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि पेड़ों की कटाई तब तक स्थगित रहेगी जब तक सभी पक्षों के बीच 'सहमति और भरोसे का संतोषजनक माहौल' नहीं बन जाता। अधिकारियों को स्थानीय लोगों के साथ बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया गया है। परियोजना के भविष्य पर अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों और बहु-पक्षीय परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।