19 जुलाई 2026
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नेल्सन मंडेला दिवस पर नई दिल्ली में 'नेशनल पीस कॉन्क्लेव 2026', जस्टिस बालकृष्णन समेत दिग्गजों ने साझा किए शांति के संकल्प

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नेल्सन मंडेला दिवस पर नई दिल्ली में 'नेशनल पीस कॉन्क्लेव 2026', जस्टिस बालकृष्णन समेत दिग्गजों ने साझा किए शांति के संकल्प

सारांश

नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर नई दिल्ली में 'नेशनल पीस कॉन्क्लेव 2026' में जस्टिस के. जी. बालकृष्णन, आचार्य लोकेश मुनि और यूनेस्को MGIEP निदेशक समेत दिग्गजों ने शांति, न्याय और मानवाधिकारों पर संकल्प साझा किए — और गांधी-मंडेला के विचारों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

गांधी मंडेला फाउंडेशन (GMF) ने 18 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन (USI) में 'नेशनल पीस कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन किया।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के.
बालकृष्णन ने गांधी-मंडेला की विरासत को मानवता की प्रेरणा बताया।
आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि विश्व शांति के लिए पहले व्यक्ति के भीतर शांति जरूरी है; बचपन से मूल्य-आधारित शिक्षा पर जोर दिया।
यूनेस्को MGIEP निदेशक डॉ.
ओबिजिओफोर एगिनाम ने मंडेला के माफ करने और मेल-मिलाप के संदेश को आज भी प्रासंगिक बताया।
गांधी मंडेला अवॉर्ड अब तक दलाई लामा और नोबेल विजेता रिगोबर्टा मेनचू तुम को दिया जा चुका है।
फाउंडेशन की जूरी में भारत, नेपाल और बांग्लादेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं।

गांधी मंडेला फाउंडेशन (GMF) ने 18 जुलाई 2026 को नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन (USI) में 'नेशनल पीस कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन किया। इस सम्मेलन में शांति, न्याय, समानता और मानवाधिकारों के वैश्विक मूल्यों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। देश-विदेश के राजनयिकों, कानूनविदों, आध्यात्मिक नेताओं, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष महत्व दिया।

कार्यक्रम का आगाज़ और फाउंडेशन के संकल्प

सम्मेलन की शुरुआत नेल्सन मंडेला को पुष्पांजलि अर्पित करने और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। गांधी मंडेला फाउंडेशन के महासचिव एडवोकेट नंदन झा ने फाउंडेशन के उद्देश्यों और सामाजिक पहलों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला के विचार केवल पुस्तकों और चर्चाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें जीवन में उतारने की ज़रूरत है।

झा ने बताया कि फाउंडेशन इन मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित करता है — जिनमें रविवार को फिजिकल ट्रेनिंग सेशन और समय-समय पर जागरूकता अभियान शामिल हैं। इनका उद्देश्य समाज में शांति, अहिंसा और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है।

जस्टिस बालकृष्णन का संबोधन

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष और गांधी मंडेला पुरस्कार जूरी के चेयरमैन जस्टिस के. जी. बालकृष्णन ने कहा कि महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला मानवता के ऐसे महान व्यक्तित्व हैं जिनकी शिक्षाएँ आज भी दुनिया को सामाजिक और नैतिक दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने दोनों नेताओं की विरासत को मानवता के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत बताया।

आध्यात्मिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण

आचार्य लोकेश मुनि ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व शांति के लिए सबसे पहले व्यक्ति के भीतर शांति आवश्यक है। उनके अनुसार, हिंसा की जड़ें मन में होती हैं और इसे रोकने के लिए बचपन से ही शांति, नैतिकता और मूल्य-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन देना चाहिए।

यूनेस्को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन फॉर पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (MGIEP) के निदेशक डॉ. ओबिजिओफोर एगिनाम ने कहा कि मंडेला ने अपना पूरा जीवन न्याय, समानता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित किया। उन्होंने मंडेला के माफ करने और मेल-मिलाप के संदेश को आज के वैश्विक संघर्षों के संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक बताया।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिबद्धता

गांधी मंडेला फाउंडेशन के नेशनल प्रेसिडेंट और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने कहा कि भारत गांधी और मंडेला के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण विकास और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने की दिशा में उठाए गए कदमों के रूप में रेखांकित किया।

फाउंडेशन की वाइस प्रेसिडेंट और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति की पूर्व निदेशक डॉ. सविता सिंह ने गांधीवादी विचारधारा को बढ़ावा देने के अपने अनुभव साझा किए और नेल्सन मंडेला से जुड़े अपने संस्मरण भी सुनाए।

फाउंडेशन की भूमिका और गांधी मंडेला पुरस्कार

गांधी मंडेला फाउंडेशन सत्य, अहिंसा, स्वतंत्रता, नागरिक अधिकार, न्याय और समानता के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है। फाउंडेशन शांति और समाज कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को गांधी मंडेला अवॉर्ड से सम्मानित करता है। अब तक दलाई लामा और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता रिगोबर्टा मेनचू तुम जैसी विश्व-विख्यात हस्तियाँ यह सम्मान पा चुकी हैं। पुरस्कार जूरी में भारत, नेपाल और बांग्लादेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। यह आयोजन इस बात की याद दिलाता है कि शांति और न्याय के मूल्य केवल स्मृति दिवसों तक नहीं, बल्कि नीति और जीवन दोनों में जीवित रखे जाने चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि फाउंडेशन के जागरूकता अभियान और ट्रेनिंग सेशन ज़मीनी स्तर पर कितना बदलाव ला रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर संघर्ष और ध्रुवीकरण बढ़ रहा है — ऐसे में मेल-मिलाप और अहिंसा के मंडेला-मॉडल की प्रासंगिकता पर बहस केवल सभागार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल पीस कॉन्क्लेव 2026 क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
नेशनल पीस कॉन्क्लेव 2026 गांधी मंडेला फाउंडेशन द्वारा 18 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन (USI) में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन है। यह आयोजन नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर शांति, न्याय और मानवाधिकारों पर विचार-विमर्श के लिए किया गया।
गांधी मंडेला फाउंडेशन का उद्देश्य क्या है?
गांधी मंडेला फाउंडेशन (GMF) महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला के सत्य, अहिंसा, न्याय, समानता और नागरिक अधिकारों के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है। फाउंडेशन नियमित जागरूकता अभियान, ट्रेनिंग सेशन और गांधी मंडेला अवॉर्ड के माध्यम से इन आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाता है।
गांधी मंडेला अवॉर्ड किसे और क्यों दिया जाता है?
गांधी मंडेला अवॉर्ड शांति और समाज कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है। अब तक दलाई लामा और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता रिगोबर्टा मेनचू तुम इस सम्मान से नवाज़े जा चुके हैं। पुरस्कार जूरी की अध्यक्षता जस्टिस के. जी. बालकृष्णन करते हैं।
जस्टिस के. जी. बालकृष्णन ने इस सम्मेलन में क्या कहा?
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस के. जी. बालकृष्णन ने कहा कि गांधी और मंडेला की शिक्षाएँ आज भी दुनिया को सामाजिक और नैतिक दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने दोनों नेताओं की विरासत को मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।
नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस प्रत्येक वर्ष 18 जुलाई को मनाया जाता है — यह तारीख मंडेला के जन्मदिन से जुड़ी है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे 2009 में आधिकारिक मान्यता दी, ताकि न्याय, समानता और मानवाधिकारों के प्रति मंडेला की प्रतिबद्धता को वैश्विक स्तर पर याद किया जा सके।
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