क्या <b>दिल्ली शब्दोत्सव 2026</b> में <b>अनमोल नारंग</b> ने <b>अध्यात्म</b> को <b>एकता का माध्यम</b> बताया?
सारांश
Key Takeaways
- शब्दों की शक्ति महत्वपूर्ण है।
- अध्यात्म एकता को बढ़ावा देता है।
- जेनजी की सोच में स्वतंत्रता है।
- सकारात्मकता का संचार आवश्यक है।
- वैश्विक अशांति को खत्म करने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय शब्दोत्सव 2026 में रविवार को आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षक अनमोल नारंग उपस्थित रहे। उन्होंने श्रीश्री रविशंकर की पुस्तक 'एन इंटीमेट नोट टू दी सिंसियर सीकर' पर चर्चा की। उन्होंने शब्दों की शक्ति, राष्ट्र निर्माण में जेनजी के महत्व और वैश्विक अशांति पर अपने विचार साझा किए।
अनमोल नारंग ने शब्दोत्सव के अनुभव पर राष्ट्र प्रेस से बात की। उन्होंने कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लगा। दिल्ली सरकार ने इसे बहुत अच्छे से आयोजित किया है। आज, जब दुनिया में इतना असंतुलन है, कई युद्ध चल रहे हैं, लोगों के मन में उथल-पुथल है, तो यह समारोह एक माध्यम है। यह हमें सकारात्मक कार्यों में जोड़ने का एक तरीका है। हर इंसान में क्रिएटिविटी होती है, ऐसे कार्यक्रम उन्हें दिशा देते हैं। ऐसे कार्यक्रमों की आज बहुत आवश्यकता है।”
उन्होंने पुस्तक के बारे में कहा, “यह श्री श्री रविशंकर जी की 366 ज्ञान पत्र हैं। 90 के दशक में गुरुजी ने जो महत्वपूर्ण बातें कहीं, वे इस पुस्तक में संकलित की गई हैं। यह एक जादुई पुस्तक है। कोई भी पृष्ठ खोलकर पढ़ें, वह ज्ञान उस समय आपके लिए परफेक्ट होता है। मेरा मानना है कि ज्ञान एक डिटर्जेंट की तरह है, जो मन के स्ट्रेस को हटा देती है।”
जेनजी के राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर अनमोल नारंग ने कहा, “जेनजी स्पष्ट हैं, अपने फैसले के लिए स्वतंत्र हैं, अंदर से संतुलित हैं और आगे बढ़ने के लिए तत्पर हैं। लेकिन, उनका अटेंशन स्पैन कम होता है और वे जल्दी परिणाम चाहते हैं।”
उन्होंने आगे बताया, “हर इंसान के लिए अध्यात्म बहुत आवश्यक है। यह जीवन जीने की कला है, जिससे आप खुद से जुड़ते हैं और जो करना चाहते हैं, वह कर सकते हैं।”
बांग्लादेशसुप्रीम पावर है, सेवा करें, समाज के लिए कार्य करें। अगर हम इसे समझ लें, तो विभिन्नताओं को मिटा सकते हैं। लोगों को जोड़ना और साथ में आगे बढ़ना ही अध्यात्म है। आज देश में अध्यात्म की सबसे ज्यादा आवश्यकता है।”