क्या पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट मतदाता सूची में बांग्लादेशी महिला वोटर का नाम मिला?
सारांश
Key Takeaways
- बांग्लादेशी महिला का नाम भारतीय मतदाता सूची में पाया गया।
- इस मामले की जांच चल रही है।
- भारतीय वोटर आईडी और आधार कार्ड पर नाम दर्ज है।
- चुनाव आयोग ने फाइनल मतदाता सूची के लिए समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है।
- पश्चिम बंगाल सरकार ने चुनाव आयोग को ग्रुप-बी अधिकारियों की उपलब्धता की सूचना दी।
नई दिल्ली, 9 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी ड्राफ्ट सूची में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, इस सूची में एक बांग्लादेशी महिला का नाम शामिल किया गया। माइक्रो-ऑब्जर्वर द्वारा ड्राफ्ट सूची की समीक्षा के दौरान यह जानकारी सामने आई।
सूत्रों के मुताबिक, ड्राफ्ट मतदाता सूची में बांग्लादेश की एक महिला, मंजू रानी साहा, का नाम पाया गया। यह भी पता चला है कि वह बांग्लादेश में भी वोट डाल चुकी है। उसके पास एक भारतीय वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड है, जिसके आधार पर उसका नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल किया गया। हालांकि, जब माइक्रो-ऑब्जर्वर ने सूची की समीक्षा की, तो यह नाम सामने आया। उसके नाम की पुष्टि बांग्लादेशी वोटर सूची में भी हुई है।
वह भारत के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात की मतदाता है। उसके भारतीय आधार कार्ड के अनुसार, उसका पता बारासात के हृदयपुर में है। वहीं, बांग्लादेशी वोटर लिस्ट में उसका पता नारायणगंज जिले के नारायणगंज सदर में है। जांच में पता चला है कि उसने नारायणगंज गर्ल्स स्कूल में वोट दिया था।
सूत्रों का कहना है कि इस मामले की जांच की जा रही है कि उसका नाम भारतीय वोटर सूची में कैसे आया। यदि उसके खिलाफ आरोप सिद्ध होते हैं, तो उसका नाम फाइनल मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा, जो इस महीने के अंत में जारी होने वाली है।
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, शनिवार एसआईआर सुनवाई का अंतिम दिन था। इस अवधि को बढ़ाने के लिए अनुरोध किया गया है, लेकिन चुनाव आयोग ने इस मामले पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है, क्योंकि यह मामला सोमवार को एसआईआर से संबंधित सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने रविवार को चुनाव आयोग को सूचित किया कि वह राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के शेष कार्य के लिए 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों की उपलब्धता प्रदान कर सकती है। इस संबंध में चुनाव आयोग को एक पत्र भी भेजा गया है।