26 जून 2026
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यूएन महासभा में भारत का शांति निर्माण विजन: राष्ट्रीय नेतृत्व और समान साझेदारी पर बल

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यूएन महासभा में भारत का शांति निर्माण विजन: राष्ट्रीय नेतृत्व और समान साझेदारी पर बल

सारांश

यूएन के पहले 'पीसबिल्डिंग वीक' में भारत ने स्पष्ट संदेश दिया — शांति निर्माण डोनर-ड्रिवन नहीं, डिमांड-ड्रिवन होना चाहिए। मेजर अभिलाषा बराक के 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट' सम्मान के साथ भारत ने महिला-शांति एजेंडे पर भी अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्य बातें

हरीश ने 26 जून 2025 को यूएनजीए की उच्चस्तरीय शांति बहस में भारत का पक्ष रखा।
भारत ने पीसबिल्डिंग में राष्ट्रीय स्वामित्व और पारंपरिक दाता-प्राप्तकर्ता ढाँचे से आगे बढ़ने की वकालत की।
यूएनजीए ने पीसबिल्डिंग फंड के लिए 5 करोड़ डॉलर (50 मिलियन डॉलर) के अनिवार्य योगदान को मंजूरी दी।
पिछले तीन वर्षों में पीसबिल्डिंग फंड में स्वैच्छिक योगदान में गिरावट दर्ज की गई है।
मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 का 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' सम्मान मिला।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र की शांति निर्माण संरचना के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अपना विजन साझा किया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 26 जून 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में 'शांति स्थापना और शांति निर्माण' पर आयोजित उच्चस्तरीय बहस में भारत का पक्ष दृढ़ता से रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति निर्माण की प्रक्रिया राष्ट्रीय स्वामित्व पर आधारित होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को पारंपरिक दाता-प्राप्तकर्ता ढाँचे से ऊपर उठना होगा। यह बहस संयुक्त राष्ट्र के पहले 'पीसबिल्डिंग वीक' के दौरान आयोजित की गई, जो शांति निर्माण संरचना के 20 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।

पीसबिल्डिंग आयोग में भारत की भागीदारी

पी. हरीश ने इससे पहले पीसबिल्डिंग आयोग (पीबीसी) के वार्षिक सत्र में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने आयोग के 19वें सत्र की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया, जिनमें संयुक्त राष्ट्र की शांति निर्माण संरचना की चौथी समीक्षा, पहली राष्ट्रीय शांति निर्माण रणनीति की प्रस्तुति, और पीसबिल्डिंग फंड के साथ पहला वार्षिक रणनीतिक संवाद शामिल हैं। गौरतलब है कि यह संवाद यूएनजीए द्वारा पीसबिल्डिंग फंड के लिए 5 करोड़ डॉलर (50 मिलियन डॉलर) के अनिवार्य वित्तीय योगदान को मंजूरी दिए जाने के बाद आयोजित हुआ।

वित्त पोषण की चुनौती और भारत की चिंता

पी. हरीश ने पीसबिल्डिंग फंड को लेकर महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि पिछले तीन वर्षों में स्वैच्छिक योगदान में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि संगठन की मौजूदा तरलता की स्थिति ने शांति निर्माण गतिविधियों के लिए निर्धारित संसाधनों को और सीमित कर दिया है। उनके अनुसार, 'कम संसाधनों में अधिक प्रभाव' सुनिश्चित करने के लिए संसाधनों को संघर्ष के बाद की परिस्थितियों पर केंद्रित किया जाना चाहिए। भारत ने फंड की अगली रणनीति के निर्माण में इस दिशा में ठोस प्रगति की अपेक्षा जताई।

राष्ट्रीय स्वामित्व और समान साझेदारी का आग्रह

पी. हरीश ने इस वर्ष की पीसबिल्डिंग वीक की थीम — 'यूएन पीसबिल्डिंग@20: नवाचार, समावेश और प्रभाव के लिए साझेदारी' — को समयोचित बताया। उन्होंने कहा कि साझेदारी भरोसे, सम्मान और समानता पर टिकी होनी चाहिए। उनका तर्क था कि शांति निर्माण की असली कसौटी राष्ट्रीय क्षमता और संस्थागत लचीलेपन का निर्माण है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका सहायक होनी चाहिए — न कि निर्देशात्मक — जिसमें आर्थिक और तकनीकी सहयोग राष्ट्रीय सरकारों की प्राथमिकताओं के अनुरूप हो।

महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडा पर प्रतिबद्धता

भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस माह की शुरुआत में मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 के 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' सम्मान से नवाजा गया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडा के प्रति भारत की गहरी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। पी. हरीश ने यह भी कहा कि भारत राष्ट्र निर्माण के अपने विशिष्ट अनुभव को सभी साझेदार देशों के साथ साझा करने के लिए तत्पर है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक शांति प्रयासों पर संसाधनों की कमी और भू-राजनीतिक तनावों का दबाव बढ़ रहा है। भारत की इस स्थिति में सक्रिय भागीदारी वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर और मज़बूती से उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पीसबिल्डिंग फंड की अगली रणनीति और चौथी संरचना समीक्षा के क्रियान्वयन पर अब सदस्य देशों की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय महत्वपूर्ण है — जब वैश्विक शांति प्रयासों के लिए स्वैच्छिक वित्त पोषण सिकुड़ रहा है और पश्चिमी देश अपने घरेलू दबावों में उलझे हैं, तब 'डिमांड-ड्रिवन पीसबिल्डिंग' की माँग वास्तव में वैश्विक दक्षिण की व्यापक भावना को प्रतिबिंबित करती है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि 'राष्ट्रीय स्वामित्व' का सिद्धांत कभी-कभी जवाबदेही तंत्र को कमज़ोर कर सकता है, खासकर उन देशों में जहाँ शासन की संस्थाएँ खुद संघर्ष से उबर रही हों। मेजर अभिलाषा बराक का सम्मान भारत की नरम शक्ति कूटनीति का प्रभावी उदाहरण है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि भारत पीसबिल्डिंग फंड की अगली रणनीति में संसाधन प्राथमिकता पर किस हद तक ठोस प्रभाव डाल पाता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएनजीए में भारत ने शांति निर्माण पर क्या रुख अपनाया?
भारत ने 26 जून 2025 को यूएनजीए की उच्चस्तरीय बहस में स्पष्ट किया कि शांति निर्माण राष्ट्रीय स्वामित्व पर आधारित और माँग-संचालित होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका सहायक होनी चाहिए, न कि निर्देशात्मक।
पीसबिल्डिंग फंड के लिए $5 करोड़ डॉलर की मंजूरी का क्या महत्व है?
यूएनजीए ने पीसबिल्डिंग फंड के लिए 5 करोड़ डॉलर (50 मिलियन डॉलर) के अनिवार्य वित्तीय योगदान को मंजूरी दी है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पिछले तीन वर्षों में स्वैच्छिक योगदान में गिरावट आई है और फंड की तरलता पर दबाव बढ़ा है।
मेजर अभिलाषा बराक को कौन सा सम्मान मिला और इसका क्या महत्व है?
मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 का 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' सम्मान दिया गया। यह महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडे के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर रेखांकित करता है।
पीसबिल्डिंग आयोग के 19वें सत्र की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या रहीं?
19वें सत्र में संयुक्त राष्ट्र की शांति निर्माण संरचना की चौथी समीक्षा, पहली राष्ट्रीय शांति निर्माण रणनीति की प्रस्तुति और पीसबिल्डिंग फंड के साथ पहला वार्षिक रणनीतिक संवाद प्रमुख उपलब्धियाँ रहीं।
भारत की 'डोनर-रिसीपिएंट अप्रोच से आगे बढ़ने' की माँग क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत का तर्क है कि पारंपरिक दाता-प्राप्तकर्ता मॉडल संघर्षग्रस्त देशों की वास्तविक जरूरतों को नज़रअंदाज़ करता है। इसके स्थान पर माँग-संचालित और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर आधारित दृष्टिकोण दीर्घकालिक संस्थागत स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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