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भारत ने यूएनएससी में दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता का विरोध किया, वीटो पावर पर सहमति

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भारत ने यूएनएससी में दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता का विरोध किया, वीटो पावर पर सहमति

सारांश

भारत ने यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार की अपनी मांग को फिर से व्यक्त किया है। स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता का विरोध किया और 15 वर्षों तक वीटो पावर टालने के प्रस्ताव पर सहमति जताई। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे की पृष्ठभूमि और भारत के विचार।

मुख्य बातें

भारत ने यूएन में दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता का विरोध किया।
वीटो पावर को 15 वर्षों के लिए टालने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया।
जी4 में भारत, ब्राजील, जर्मनी, और जापान शामिल हैं।
यूएनएससी में सुधार की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
वीटो पावर के उपयोग पर नियंत्रण की मांग की जा रही है।

न्यूयॉर्क, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की अपनी दीर्घकालिक मांग को एक बार फिर से उजागर किया है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने यूएनएससी में दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता के प्रस्ताव का विरोध किया और यह भी बताया कि जी4 के सुधारों के तहत वीटो पावर को 15 वर्षों के लिए टालने के सुझाव पर सहमति व्यक्त की है।

गौरतलब है कि यूएनएससी में 'दो-स्तरीय' स्थायी सदस्यता का प्रस्ताव नए सदस्यों के लिए स्थायी सीटों की एक नई श्रेणी का निर्माण करने की बात करता है। वर्तमान में, पी5 (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) के पास मौजूद वीटो पावर इन नए स्थायी सदस्यों में नहीं होगा, जिसका भारत ने विरोध किया है।

यूएन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पी हरीश ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का ढांचा असंतुलित है, और इसकी वैधता व प्रतिनिधित्व पर प्रश्न उठते हैं, जिसके लिए सदस्यता और वीटो प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। यह स्पष्ट है कि लगभग 80 वर्ष पहले निर्मित यह ढांचा आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं है।"

भारत ने स्थायी वीटो श्रेणी को बढ़ाने पर जोर दिया और पी हरीश ने कहा कि 1960 के दशक में केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने से वीटो रखने वालों की शक्ति में वृद्धि हुई है। वर्तमान में, वीटो वाले स्थायी और अस्थायी सदस्यों का अनुपात 5:10 हो गया है, जिससे असंतुलन और बढ़ गया है। सुधार तभी संभव है जब स्थायी वीटो श्रेणी को बढ़ाया जाए।

उन्होंने यह भी कहा, "सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार के लिए वीटो के साथ स्थायी श्रेणी का विस्तार आवश्यक है।"

इस अवसर पर, भारत ने जी4 के ब्राजील के उपस्थायी प्रतिनिधि नॉरबर्टो मोरेटी के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नए स्थायी सदस्यों को 15 वर्षों तक वीटो का उपयोग नहीं करना चाहिए, जब तक कि इस विषय पर कोई निर्णय नहीं हो जाता।

हालांकि, कुछ देशों ने स्थायी सदस्यता बढ़ाने के खिलाफ आवाज उठाई है, खासकर इटली और पाकिस्तान ने दावा किया है कि वीटो पावर वाले देश सुरक्षा परिषद को और कमजोर कर देंगे। मोरेटी ने कहा कि स्थायी सदस्यता की संख्या बढ़ाने से परिषद में शक्ति संतुलन बदलेगा, जिससे यह और अधिक लोकतांत्रिक बनेगा।

पी हरीश ने यह भी बताया कि 1965 में परिषद में अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने का निर्णय वीटो पावर वाले स्थायी सदस्यों को "रिलेटिव एडवांटेज" प्रदान करता है।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा, "वीटो पर रोक लगाने की मांग उठ रही है। 2022 में प्रस्ताव 76/262 के तहत यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए थे कि वीटो का इस्तेमाल करने के 10 दिनों के भीतर जनरल असेंबली की बैठक बुलाई जाए। हालांकि, यह कोई प्रभावी रोकथाम नहीं है।"

उन्होंने कहा कि स्थायी सदस्य अक्सर अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार वीटो का इस्तेमाल करते हैं। जब तक यूएन चार्टर में स्पष्ट प्रावधान नहीं जोड़े जाते, जो वीटो के उपयोग पर कुछ प्रभावी सीमाएं तय कर सकें, तब तक नियंत्रण संभव नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत ने यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत का यह कदम न केवल अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक राजनीति में एक समान प्रतिनिधित्व की आवश्यकता को भी दर्शाता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने यूएन में स्थायी सदस्यता के लिए क्या प्रस्ताव रखा है?
भारत ने यूएन में दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता का विरोध किया है और वीटो पावर को 15 वर्षों के लिए टालने के प्रस्ताव पर सहमति जताई है।
यूएनएससी में स्थायी सदस्यता का क्या महत्व है?
स्थायी सदस्यता का महत्व इसलिए है क्योंकि यह देशों को निर्णय लेने में प्रभावी भूमिका निभाने की शक्ति प्रदान करती है।
जी4 समूह में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
जी4 समूह में भारत, ब्राजील, जर्मनी, और जापान शामिल हैं।
वीटो पावर का क्या उपयोग होता है?
वीटो पावर का उपयोग सुरक्षा परिषद में किसी प्रस्ताव को रोकने के लिए किया जाता है।
भारत ने वीटो पावर के खिलाफ क्यों आवाज उठाई है?
भारत का मानना है कि वीटो पावर में सुधार की आवश्यकता है ताकि सुरक्षा परिषद का ढांचा अधिक संतुलित हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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