यूएन सुरक्षा परिषद सुधार पर बहस तेज: एनालेना बेयरबॉक बोलीं — भारत समेत कई प्रस्ताव मेज पर
सारांश
Key Takeaways
- यूएनजीए अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने 28 अप्रैल को नई दिल्ली में कहा कि यूएनएससी सुधार पर चर्चा तेज हुई है।
- बेयरबॉक ने सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दो को-फैसिलिटेटर नियुक्त किए हैं।
- भारत और अफ्रीकी संघ समेत कई देशों के प्रस्ताव सुधार चर्चा में शामिल हैं।
- वीटो इनिशिएटिव के तहत सुरक्षा परिषद में अटके मामलों को महासभा में लाने की व्यवस्था की गई है।
- अगले यूएन महासचिव चयन प्रक्रिया में पिछले हफ्ते चार उम्मीदवारों की सुनवाई हुई।
- वर्तमान में यूएनएससी में 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने मंगलवार, 28 अप्रैल को नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार को लेकर चर्चाएँ अब और तेज हुई हैं और इस दिशा में "छोटे-छोटे कदम" उठाए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अफ्रीकी संघ समेत कई देशों के प्रस्ताव इस प्रक्रिया में शामिल हैं।
17 वर्षों से चली आ रही बहस
बेयरबॉक ने कहा, "यह बहस पिछले 17 वर्षों से चल रही है। जैसा कि हम जानते हैं, चार्टर में पाँच स्थायी सदस्य देशों को खास जिम्मेदारी के साथ-साथ वीटो का अधिकार भी दिया गया है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सुधार की यह बहस संयुक्त राष्ट्र की समग्र विश्वसनीयता से सीधे जुड़ी हुई है।
बेयरबॉक ने बताया कि उन्होंने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दो को-फैसिलिटेटर नियुक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग प्रस्ताव सामने आए हैं, जिनमें भारत का प्रस्ताव भी शामिल है। साथ ही अफ्रीकी संघ की ओर से भी प्रस्ताव हैं, क्योंकि पूरा अफ्रीका महाद्वीप अभी तक सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के रूप में प्रतिनिधित्व नहीं रखता।
वीटो इनिशिएटिव: एक अहम कदम
बेयरबॉक ने 'वीटो इनिशिएटिव' का उल्लेख करते हुए बताया कि यह तब चर्चा में आया जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े एक प्रस्ताव पर वीटो लगाया गया था। इस पहल के तहत यदि सुरक्षा परिषद में कोई मामला अटक जाता है, तो उसे महासभा में चर्चा के लिए लाया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह कदम संयुक्त राष्ट्र को मजबूत बनाने और उसकी साख बढ़ाने की दिशा में उठाया गया है। गौरतलब है कि मौजूदा समय में पी-5 देश संयुक्त राष्ट्र के चार्टर पर दबाव बना रहे हैं, जिससे सुधार की माँग और प्रासंगिक हो गई है।
अगले यूएन महासचिव के चयन की प्रक्रिया
बेयरबॉक ने यह भी बताया कि वह अगले संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन की प्रक्रिया की अध्यक्षता कर रही हैं। उन्होंने कहा, "मैं महासभा की अध्यक्ष के तौर पर इसे पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से चला रही हूँ। हर सदस्य देश को अलग-अलग उम्मीदवारों में से चुनने का अधिकार है।"
उन्होंने बताया कि पिछले हफ्ते चार उम्मीदवारों की सुनवाई हुई थी और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। सुरक्षा परिषद भी उम्मीदवारों से बातचीत करेगी और एक खुली टाउन हॉल बैठक भी आयोजित होगी। बेयरबॉक ने भारत के लोगों से विशेष रूप से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में दिलचस्पी लें, क्योंकि अगला महासचिव सिर्फ संयुक्त राष्ट्र के भीतर काम करने वालों के लिए नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों की सेवा के लिए होगा।
भारत की स्थायी सदस्यता की माँग
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र, खासकर सुरक्षा परिषद में सुधार की माँग करता रहा है। भारत का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में व्यापक सुधार अनिवार्य है।
यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता पर वैश्विक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं — 5 स्थायी (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका) और 10 अस्थायी (बहरीन, कोलंबिया, कांगो, ग्रीस, डेनमार्क, पाकिस्तान, लातविया, लाइबेरिया, पनामा और सोमालिया), जिन्हें महासभा द्वारा दो वर्षों के लिए चुना जाता है।
आने वाले महीनों में को-फैसिलिटेटर्स की रिपोर्ट और महासचिव चयन प्रक्रिया के नतीजे यह तय करेंगे कि यूएनएससी सुधार की दिशा में यह बहस ठोस कदमों में बदल पाती है या नहीं।