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गरुड़ासन: तनाव से राहत और एकाग्रता बढ़ाने वाला शक्तिशाली योगासन

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गरुड़ासन: तनाव से राहत और एकाग्रता बढ़ाने वाला शक्तिशाली योगासन

सारांश

बाज की स्थिरता से प्रेरित गरुड़ासन सिर्फ एक योगमुद्रा नहीं — यह शरीर और मन दोनों को साधने का एक सिद्ध तरीका है। आयुष मंत्रालय द्वारा अनुशंसित यह आसन तनाव, जोड़ों की जकड़न और एकाग्रता की कमी से जूझ रहे आधुनिक जीवन के लिए एक सरल और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है।

मुख्य बातें

गरुड़ासन एक बैलेंसिंग योगासन है जो शरीर की स्थिरता और मन की एकाग्रता दोनों को एक साथ बेहतर बनाता है।
आयुष मंत्रालय ने इसे संतुलन, जोड़ों की सक्रियता और मानसिक स्पष्टता के लिए उत्कृष्ट योगासन बताया है।
टखनों, पिंडलियों, जांघों और कंधों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है।
इस मुद्रा में 20 से 30 सेकंड तक रुकते हुए एक बिंदु पर दृष्टि केंद्रित करना आवश्यक है।
घुटने, टखने या कंधे में हालिया चोट होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए।

नई दिल्ली, 29 अप्रैल — आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। गरुड़ासन एक ऐसा योगाभ्यास है जो एक साथ शरीर की स्थिरता, मांसपेशियों की मजबूती और मन की एकाग्रता को बेहतर बनाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन संतुलन, मानसिक स्पष्टता और जोड़ों की सक्रियता के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।

गरुड़ासन क्या है और इसका अर्थ

गरुड़ासन एक संस्कृत शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना है — 'गरुड़' अर्थात 'ईगल' (बाज) और 'आसन' अर्थात 'मुद्रा'। जिस प्रकार बाज आकाश में स्थिर रहकर अपनी पैनी दृष्टि बनाए रखता है, उसी प्रकार इस आसन का नियमित अभ्यास शरीर में स्थिरता और मन में एकाग्रता विकसित करता है। यह एक 'बैलेंसिंग' आसन है जिसमें अभ्यासकर्ता एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर और दोनों भुजाओं को आपस में गूंथता है।

आयुष मंत्रालय की अनुशंसा

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने गरुड़ासन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे एक उत्कृष्ट योगासन बताया है। मंत्रालय के अनुसार, यह आसन संतुलन और शारीरिक मजबूती को बढ़ावा देने के साथ-साथ जोड़ों की सक्रियता और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने में भी कारगर है। गौरतलब है कि आयुष मंत्रालय नियमित रूप से ऐसे योगासनों को प्रोत्साहित करता है जो दैनिक जीवन में सरलता से अपनाए जा सकें।

गरुड़ासन के प्रमुख शारीरिक लाभ

इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर को कई स्तरों पर लाभ मिलता है। यह टखनों, पिंडलियों, जांघों और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। पैरों और कूल्हों की जकड़न दूर होती है तथा कंधों और ऊपरी पीठ की अकड़न में भी राहत मिलती है। इसके अलावा, यह आसन नसों को सक्रिय कर तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को बेहतर बनाता है और संतुलन व एकाग्रता में उल्लेखनीय सुधार लाता है।

गरुड़ासन करने की सही विधि

इस आसन को सही तरीके से करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें। सबसे पहले ताड़ासन की मुद्रा में सीधे खड़े हों। इसके बाद दाएं पैर का पंजा बाईं पिंडली के पीछे लॉक करें और दोनों हाथों को आगे लाकर बाईं भुजा को दाईं भुजा के ऊपर से लपेटें। दोनों हथेलियों को आपस में जोड़कर गरुड़ की चोंच जैसी आकृति बनाएं और शरीर का पूरा भार बाएं पैर पर डालकर संतुलन बनाए रखें। इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक रुकें, गहरी सांस लें और दृष्टि एक बिंदु पर केंद्रित रखें। तत्पश्चात सामान्य सांस के साथ धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं।

सावधानियाँ और किसे बचना चाहिए

यह आसन शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए धैर्य के साथ अभ्यास करना आवश्यक है। जिन व्यक्तियों को घुटने, टखने या कंधे में हाल ही में कोई चोट लगी हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। नियमित अभ्यास से यह आसन न केवल शरीर को लचीला और मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव को कम करने में भी सहायक सिद्ध होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के जटिल बैलेंसिंग आसन करने से चोट का जोखिम हो सकता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर योग के लाभ तो गिनाती है, पर सावधानियों और contraindications को उचित महत्व नहीं देती।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गरुड़ासन क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा?
गरुड़ासन एक संस्कृत शब्द है जिसमें 'गरुड़' का अर्थ बाज (ईगल) और 'आसन' का अर्थ मुद्रा है। बाज की आकाश में स्थिर और एकाग्र दृष्टि से प्रेरित यह आसन शरीर में स्थिरता और मन में एकाग्रता विकसित करता है।
गरुड़ासन के क्या-क्या फायदे हैं?
गरुड़ासन के नियमित अभ्यास से टखनों, पिंडलियों, जांघों और कंधों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। साथ ही पैरों और कूल्हों की जकड़न दूर होती है, तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है और मानसिक एकाग्रता व संतुलन में सुधार आता है।
गरुड़ासन कैसे करें — सही विधि क्या है?
ताड़ासन में सीधे खड़े होकर दाएं पैर को बाईं पिंडली के पीछे लॉक करें, दोनों भुजाओं को आपस में लपेटकर हथेलियाँ जोड़ें और 20 से 30 सेकंड तक एक बिंदु पर दृष्टि केंद्रित रखें। गहरी सांस लेते हुए संतुलन बनाए रखें और फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटें।
गरुड़ासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
जिन व्यक्तियों के घुटने, टखने या कंधे में हाल ही में कोई चोट लगी हो, उन्हें गरुड़ासन से बचना चाहिए। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को यह आसन किसी प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में ही करना उचित है।
क्या आयुष मंत्रालय ने गरुड़ासन को मान्यता दी है?
हाँ, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने गरुड़ासन को एक उत्कृष्ट योगासन के रूप में अनुशंसित किया है। मंत्रालय के अनुसार यह आसन संतुलन, एकाग्रता, शारीरिक मजबूती और जोड़ों की सक्रियता के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
राष्ट्र प्रेस
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