गर्मियों में रात को बार-बार प्यास लगना: आयुर्वेद बताता है वात-पित्त असंतुलन का संकेत

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गर्मियों में रात को बार-बार प्यास लगना: आयुर्वेद बताता है वात-पित्त असंतुलन का संकेत

सारांश

गर्मियों में रात को बार-बार प्यास लगना सिर्फ गर्मी का असर नहीं — आयुर्वेद इसे वात और पित्त दोष के असंतुलन का संकेत मानता है। मुलेठी, नारियल पानी, त्रिफला कुल्ला और सीमित घी से इस समस्या को जड़ से ठीक करने की राह आयुर्वेद में मौजूद है।

Key Takeaways

  • गर्मियों में रात को मुंह सूखना और बार-बार प्यास लगना शरीर के तरल असंतुलन का संकेत है।
  • आयुर्वेद इसे वात और पित्त दोष के असंतुलन से जोड़ता है, जो पाचन और शरीर में जलन बढ़ाता है।
  • मुलेठी चूसने से मुंह में नमी बनी रहती है और लार का उत्पादन बढ़ता है।
  • नारियल पानी पित्त को संतुलित करता है और शरीर को अंदर से ठंडक देता है।
  • त्रिफला से कुल्ला करने पर मुंह का रूखापन कम होता है; घी सीमित मात्रा में पाचन और नमी बनाए रखने में सहायक है।
  • समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें।

गर्मियों में रात के समय बार-बार प्यास लगना और मुंह सूखना एक सामान्य शिकायत बन चुकी है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर में वात और पित्त दोष के असंतुलन का स्पष्ट संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या को नज़रअंदाज़ करना शरीर की आंतरिक गड़बड़ी को और गहरा कर सकता है।

रात में प्यास लगने के कारण क्या हैं

गर्मी के मौसम में उच्च तापमान शरीर की प्राकृतिक नमी को तेज़ी से कम कर देता है। इसके अलावा देर रात खाना खाना, अत्यधिक तला-भुना भोजन, मानसिक तनाव और शरीर में पानी की कमी भी रात के समय मुंह सूखने और बार-बार प्यास लगने के प्रमुख कारण हो सकते हैं। ये कारण आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों पर शरीर को प्रभावित करते हैं।

गौरतलब है कि जब बार-बार पानी पीने के बाद भी प्यास नहीं बुझती, तो यह केवल निर्जलीकरण नहीं, बल्कि शरीर के तरल असंतुलन की गहरी समस्या हो सकती है।

आयुर्वेद क्या कहता है

आयुर्वेद इस स्थिति को वात और पित्त दोष का असंतुलन मानता है। वात और पित्त का बिगड़ा संतुलन शरीर में गर्मी और पाचन-संबंधी समस्याओं को बढ़ाता है, जिससे शरीर में जलन और रूखापन उत्पन्न होता है। आयुर्वेदिक मत के अनुसार वात को शांत करने के लिए गर्म, तरल और पौष्टिक आहार लेना चाहिए, जबकि पित्त को संतुलित करने के लिए शरीर को ठंडक पहुँचाने वाले उपाय अपनाने चाहिए।

आयुर्वेदिक उपाय और समाधान

आयुर्वेद में इस समस्या के लिए मुलेठी का सेवन विशेष रूप से लाभकारी बताया गया है। मुलेठी के टुकड़े को चूसते रहने से मुंह में नमी बनी रहती है और लार का उत्पादन भी तेज़ होता है। साथ ही यह गले और पाचन तंत्र दोनों को दुरुस्त रखने में सहायक है।

इसके अतिरिक्त नारियल पानी का नियमित सेवन शरीर को अंदर से शीतल करता है और पित्त को संतुलित रखने में मदद करता है। यदि शरीर पर्याप्त रूप से हाइड्रेट रहे, तो रात के समय बार-बार प्यास लगने और मुंह सूखने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

त्रिफला से कुल्ला करना भी आयुर्वेद में एक प्रभावी उपाय बताया गया है। त्रिफला का कुल्ला मुंह के अंदर के रूखेपन को कम करता है और नमी बनाए रखता है। इसके साथ ही सीमित मात्रा में घी का सेवन शरीर की नमी और पाचन को सुगम बनाने में सहायक माना जाता है।

आम जनता पर असर और सावधानियाँ

यह ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के मौसम में रात को सोने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, हल्का और सुपाच्य भोजन करना और तनाव से बचना ज़रूरी है। यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहेगा।

Point of View

लेकिन आयुर्वेद की दृष्टि से यह शरीर की गहरी आंतरिक गड़बड़ी का संकेत है जिसे समय रहते पहचानना ज़रूरी है। मुख्यधारा की स्वास्थ्य कवरेज जहाँ केवल 'अधिक पानी पिएं' तक सीमित रहती है, वहीं आयुर्वेद दोष-आधारित कारण और व्यक्तिगत उपाय की बात करता है — जो आधुनिक पोषण विज्ञान से भिन्न लेकिन पूरक दृष्टिकोण है। हालाँकि, पाठकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि मधुमेह या किडनी की बीमारी जैसी स्थितियों में भी रात को अत्यधिक प्यास लगती है, इसलिए केवल आयुर्वेदिक उपायों पर निर्भर रहने से पहले चिकित्सकीय जाँच आवश्यक है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

गर्मियों में रात को बार-बार प्यास क्यों लगती है?
गर्मी में उच्च तापमान शरीर की नमी तेज़ी से घटाता है और देर रात खाना, तला-भुना भोजन तथा मानसिक तनाव भी इसमें योगदान करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह वात और पित्त दोष के असंतुलन का संकेत है।
आयुर्वेद में रात को मुंह सूखने का क्या उपाय बताया गया है?
आयुर्वेद में मुलेठी चूसना, नारियल पानी पीना, त्रिफला से कुल्ला करना और सीमित मात्रा में घी का सेवन करना प्रमुख उपाय बताए गए हैं। ये उपाय मुंह की नमी बनाए रखने और पित्त को संतुलित करने में सहायक हैं।
मुलेठी रात की प्यास में कैसे मदद करती है?
मुलेठी के टुकड़े को चूसने से मुंह में लार का उत्पादन बढ़ता है और नमी बनी रहती है। यह गले और पाचन तंत्र दोनों को दुरुस्त रखने में भी सहायक है।
वात और पित्त असंतुलन को कैसे ठीक करें?
वात को शांत करने के लिए गर्म, तरल और पौष्टिक आहार लें, जबकि पित्त को संतुलित करने के लिए नारियल पानी जैसे शीतल पेय और ठंडक देने वाले उपाय अपनाएँ। दोनों दोषों को संतुलित रखने से रात की प्यास और जलन में राहत मिल सकती है।
रात को प्यास लगने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
यदि आयुर्वेदिक उपाय अपनाने के बाद भी समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना ज़रूरी है। मधुमेह और किडनी की बीमारी जैसी स्थितियों में भी अत्यधिक प्यास लगना एक सामान्य लक्षण है, इसलिए चिकित्सकीय जाँच अनिवार्य हो सकती है।
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