अमेरिकी साइबर कमांड का चीन पर फोकस: एडमिरल ब्रैडली बोले — AI और साइबर क्षमता बढ़ाना अब अनिवार्य
सारांश
अमेरिकी सीनेट की सुनवाई में साइबर कमांड और स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के शीर्ष अधिकारियों ने साफ कहा — चीन अब सिर्फ एक प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक खतरा है। 'साइबरकॉम 2.0' और AI में बढ़त बनाए रखने की यह कोशिश अमेरिका की नई सैन्य सोच का केंद्र बन रही है।
मुख्य बातें
एडमिरल फ्रैंक ब्रैडली ने 29 अप्रैल 2026 को सीनेट सुनवाई में कहा कि अमेरिकी सेना का प्राथमिक दीर्घकालिक फोकस चीन पर रहेगा।
जनरल जोशुआ रुड ने जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीक में बढ़त बनाए रखना अमेरिकी सैन्य श्रेष्ठता के लिए अनिवार्य है।
अमेरिका ने चीन को अपनी दीर्घकालिक रणनीतिक चुनौती मानते हुए साइबर और स्पेशल ऑपरेशन क्षेत्रों में अपनी सैन्य क्षमताएं तेज़ी से बढ़ाने का संकल्प जताया है। 29 अप्रैल 2026 को वाशिंगटन में अमेरिकी सीनेट की सुनवाई के दौरान यूएस स्पेशल ऑपरेशंस कमांड और साइबर कमांड के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बढ़ते वैश्विक मुकाबले के इस दौर में तकनीकी बढ़त बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता है। अधिकारियों ने बीजिंग को प्राथमिक खतरे के रूप में रेखांकित करते हुए रूस, ईरान और ट्रांसनेशनल नेटवर्क से उत्पन्न चुनौतियों का भी उल्लेख किया।
सीनेट सुनवाई में क्या कहा एडमिरल ब्रैडली ने
एडमिरल फ्रैंक ब्रैडली ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा,
संपादकीय दृष्टिकोण
लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अमेरिकी साइबर वर्कफोर्स की भर्ती और प्रशिक्षण की रफ्तार बीजिंग की तैयारी से मेल खा सकती है। सांसदों की यह चिंता कि लगातार बढ़ती माँग से कर्मचारियों पर दबाव पड़ रहा है, इस महत्वाकांक्षी एजेंडे की सबसे बड़ी कमज़ोरी को उजागर करती है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अमेरिका की साइबर ऑपरेशन रणनीति में चीन पर फोकस क्यों बढ़ा है?
अमेरिकी सीनियर कमांडरों के अनुसार, चीन अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीतिक चुनौती है। बीजिंग सैन्य अनुप्रयोगों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सक्रिय रूप से उपयोग कर रहा है और अमेरिकी बुनियादी ढाँचे में 'डिसरप्टिव कैपेबिलिटीज' तैनात करने की तैयारी कर रहा है, जिससे तकनीकी प्रतिस्पर्धा अनिवार्य हो गई है।
'साइबरकॉम 2.0' क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
'साइबरकॉम 2.0' पेंटागन का एक बड़ा सुधार कार्यक्रम है जिसका लक्ष्य साइबर वर्कफोर्स को मज़बूत करना और इनोवेशन की गति तेज़ करना है। साइबर नीति के लिए रक्षा सहायक सचिव कैथरीन सटन के अनुसार, दुश्मन अब जासूसी से आगे बढ़कर अमेरिकी बुनियादी ढाँचे में विध्वंसकारी क्षमताएं तैनात कर रहे हैं।
एडमिरल फ्रैंक ब्रैडली ने सीनेट सुनवाई में क्या कहा?
एडमिरल ब्रैडली ने कहा कि अमेरिकी सेना को एक साथ कई खतरों — चीन, रूस, ईरान और ट्रांसनेशनल नेटवर्क — से निपटना होगा, लेकिन प्राथमिक दीर्घकालिक फोकस बीजिंग पर ही रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी रोकथाम रणनीति में मज़बूत गठबंधन सबसे ज़रूरी तत्व है।
इंडो-पैसिफिक में अमेरिकी साझेदारी की क्या भूमिका है?
एडमिरल ब्रैडली के अनुसार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन का मुकाबला करने के लिए गठबंधन मज़बूत करना और साझेदार देशों की क्षमता बढ़ाना अनिवार्य है। दशकों से बना भरोसा और विश्वसनीयता अमेरिका को इंटेलिजेंस साझा करने और साझेदारों का समर्थन करने में मदद करती है।
AI और तकनीकी प्रतिस्पर्धा अमेरिका-चीन सैन्य मुकाबले में क्यों अहम है?
जनरल जोशुआ रुड ने कहा कि जैसे-जैसे AI सैन्य अभियानों में गहराई से शामिल होता जाएगा, अमेरिका को हर पहलू में तकनीकी बढ़त बनाए रखनी होगी। सांसदों ने भी चेतावनी दी कि चीन नई तकनीक का सक्रिय रूप से सैन्य उपयोग कर रहा है, जिससे यह प्रतिस्पर्धा निर्णायक बन गई है।