पाकिस्तान में 2026 के पहले चार महीनों में खसरे से 71 बच्चों की मौत, 4,541 मामले दर्ज
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान में 2026 के पहले चार महीनों में खसरे से 71 बच्चों की मौत हुई।
- सबसे अधिक 40 मौतें सिंध में; पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में 12-12 मौतें।
- इस अवधि में कुल 4,541 खसरे के मामले दर्ज; सर्वाधिक 1,712 मामले खैबर पख्तूनख्वा में।
- पाकिस्तान में 10 लाख से अधिक 'जीरो-डोज' बच्चे; यह उन 10 देशों में शामिल जहाँ सबसे अधिक ऐसे बच्चे हैं।
- सरकार 'विश्व टीकाकरण सप्ताह' के दौरान मुफ्त एमआर वैक्सीन और जागरूकता अभियान चला रही है।
पाकिस्तान में 2026 के पहले चार महीनों में खसरे से 71 बच्चों की मौत हो चुकी है और 4,541 मामले सामने आए हैं। अखबार 'डॉन' ने सरकारी आंकड़ों के हवाले से यह जानकारी दी है। यह आँकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब पाकिस्तान सरकार 'विश्व टीकाकरण सप्ताह' के दौरान स्वास्थ्य साक्षरता और वैक्सीन जागरूकता अभियान चला रही है।
मौतों और मामलों का प्रांतवार विवरण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 71 मौतों में सबसे अधिक 40 मौतें सिंध में दर्ज की गईं। इसके बाद पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में 12-12 मौतें हुईं, जबकि बलूचिस्तान में 4 मौतें दर्ज की गईं।
कुल 4,541 मामलों में से 1,712 मामले खैबर पख्तूनख्वा में, 1,198 मामले पंजाब में, 1,183 मामले सिंध में, 151 मामले पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में, 55 मामले इस्लामाबाद में, 45 मामले पाकिस्तान-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में और 17 मामले बलूचिस्तान में सामने आए।
कम टीकाकरण: समस्या की जड़
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के एक संपादकीय के अनुसार, पाकिस्तान में अभी भी दस लाख से अधिक 'जीरो-डोज' बच्चे हैं — यानी ऐसे बच्चे जिन्हें कभी कोई वैक्सीन नहीं लगी। पाकिस्तान उन दस देशों में शामिल है जहाँ सबसे अधिक 'जीरो-डोज' बच्चे पाए जाते हैं।
कुछ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी इसकी वजह है, लेकिन संपादकीय के अनुसार कई बार लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर डर और गलत धारणाएँ भी इसका कारण बनती हैं। गौरतलब है कि 2025 में ही यह अनुमान लगाया गया था कि कम टीकाकरण दर की वजह से दुनिया भर में रोकथाम योग्य बीमारियों को नियंत्रित करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों पर असर पड़ेगा।
सरकार का प्रयास
पाकिस्तान सरकार टीकाकरण अभियानों के दौरान सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर एमआर (खसरा और रूबेला) वैक्सीन मुफ्त में उपलब्ध कराती है। हालाँकि, कई लोग वैक्सीन लगवाने से हिचकिचाते हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार 'विश्व टीकाकरण सप्ताह' के अवसर पर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चला रही है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को टीका लगाया जा सके।
खसरा: एक रोकथाम योग्य लेकिन घातक बीमारी
खसरा एक अत्यंत तेजी से फैलने वाला वायरल रोग है और दुनिया भर में छोटे बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, उचित टीकाकरण से इस बीमारी को पूरी तरह रोका जा सकता है।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पाकिस्तान का चल रहा जागरूकता अभियान 'जीरो-डोज' बच्चों तक पहुँचने में सफल हो पाता है और खसरे के मामलों में गिरावट लाई जा सकती है।