भारत-यूएई साझेदारी और मजबूत, जयशंकर के दौरे और राजदूत के बयान ने दिखाया गहरा भरोसा
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सारांश
पश्चिम एशिया संकट ने दोस्त और दुश्मन की पहचान साफ कर दी — यूएई पर ईरानी हमलों के दौरान जहाँ पाकिस्तान का झुकाव ईरान की ओर दिखा, वहीं भारत ने खुलकर यूएई का साथ दिया। जयशंकर का दौरा और राजदूत का 'परिवार' वाला बयान बताते हैं कि भारत-यूएई रिश्ता अब रणनीतिक गहराई में नया अध्याय लिख रहा है।
Key Takeaways
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने युद्धविराम के बाद यूएई का दौरा किया और समर्थन व एकजुटता का संदेश दिया।
- यूएई राजदूत अब्दुलनासेर अलशाली ने कहा — "यूएई में आपका परिवार अकेला नहीं है" — जो दोनों देशों के गहरे रिश्तों को दर्शाता है।
- पॉलीटेइया रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई पर ईरानी हमलों के दौरान पाकिस्तान का झुकाव ईरान की ओर दिखा, जिससे यूएई में नाराजगी बढ़ी।
- यूएई ने कथित तौर पर पाकिस्तान से करीब ₹29,000 करोड़ (3.5 अरब डॉलर) का कर्ज लौटाने को कहा।
- भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के हमलों की निंदा करने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दौरे और यूएई राजदूत के भावनात्मक बयान के बाद, भारत-यूएई द्विपक्षीय साझेदारी पश्चिम एशिया संकट के बीच और प्रगाढ़ होती दिख रही है। थिंक टैंक 'पॉलीटेइया रिसर्च फाउंडेशन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच यह संबंध केवल औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि आपसी भरोसे और दीर्घकालिक स्थिरता पर टिकी साझेदारी है। 29 अप्रैल को सामने आई यह रिपोर्ट ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन तेज़ी से बदल रहा है।
राजदूत का भावनात्मक संदेश
भारत में यूएई के राजदूत अब्दुलनासेर अलशाली ने तनाव के दौरान कहा कि यूएई की नेतृत्व-शक्ति वहाँ रहने वाले भारतीयों को परिवार की तरह मानती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा,
Point of View
पाकिस्तान का ईरान-झुकाव और यूएई की तीखी प्रतिक्रिया (कर्ज वापसी की माँग) यह संकेत देती है कि खाड़ी देशों में इस्लामाबाद की साख तेज़ी से घट रही है। भारत के लिए यह एक रणनीतिक अवसर है — लेकिन इसे टिकाऊ बनाने के लिए व्यापार, ऊर्जा और प्रवासी सुरक्षा पर ठोस कदम ज़रूरी होंगे, केवल कूटनीतिक बयानबाज़ी पर्याप्त नहीं।
NationPress
29/04/2026
Frequently Asked Questions
भारत-यूएई साझेदारी इस संकट में क्यों और मजबूत हुई?
पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारत ने यूएई पर ईरानी हमलों की निंदा की, संयुक्त राष्ट्र में संबंधित प्रस्ताव का समर्थन किया और विदेश मंत्री जयशंकर ने युद्धविराम के बाद यूएई का दौरा किया। इन कदमों ने दोनों देशों के बीच भरोसे को और गहरा किया।
यूएई राजदूत ने भारतीयों के बारे में क्या कहा?
भारत में यूएई के राजदूत अब्दुलनासेर अलशाली ने तनाव के दौरान कहा कि यूएई की नेतृत्व-शक्ति वहाँ रहने वाले भारतीयों को परिवार की तरह मानती है और कहा — "यूएई में आपका परिवार अकेला नहीं है।" यह बयान दोनों देशों के मज़बूत मानवीय और कूटनीतिक रिश्तों को दर्शाता है।
यूएई और पाकिस्तान के बीच तनाव क्यों बढ़ा?
पॉलीटेइया रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई पर ईरानी हमलों के दौरान पाकिस्तान का रुख ईरान-समर्थक दिखा और इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता में यूएई के हितों को पर्याप्त अहमियत नहीं दी गई। इससे नाराज़ यूएई ने कथित तौर पर पाकिस्तान से करीब 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाने को कहा।
जयशंकर के यूएई दौरे में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूएई के नेताओं से मुलाकात में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और संघर्ष के असर जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यूएई के पक्ष में क्या किया?
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव का समर्थन किया जिसमें ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की गई और तुरंत शांति की अपील की गई। इससे स्पष्ट होता है कि भारत ने इस संकट में यूएई का खुलकर साथ दिया।