19 अगस्त 2026
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UNSC सुधार: भारत का आरोप — बहुमत की राय दबाई जा रही है, G4 ने माँगा निष्पक्ष दस्तावेज़

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UNSC सुधार: भारत का आरोप — बहुमत की राय दबाई जा रही है, G4 ने माँगा निष्पक्ष दस्तावेज़

सारांश

UNSC सुधार वार्ता में भारत ने खुलकर कहा — बहुमत की राय दबाई जा रही है। G4 की ओर से स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने दस्तावेज़ीकरण पर सवाल उठाए और चेतावनी दी कि बिना टेक्स्ट-आधारित वार्ता के IGN प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।

मुख्य बातें

भारत ने 20 मई 2026 को IGN बैठक में UNSC सुधार दस्तावेज़ीकरण पर आपत्ति दर्ज कराई।
स्थायी प्रतिनिधि पी.
हरीश ने कहा — बहुमत के समर्थन को 'महत्वपूर्ण समर्थन' कहना सटीक नहीं है।
G4 (भारत, ब्राज़ील, जर्मनी, जापान) ने तत्काल टेक्स्ट-आधारित वार्ता शुरू करने की माँग दोहराई।
UFC समूह (नेतृत्व: इटली; समर्थन: पाकिस्तान) प्रक्रियागत नियमों से आधिकारिक ड्राफ्ट को रोक रहा है।
हरीश ने चेतावनी दी — बिना टेक्स्ट वार्ता के IGN प्रक्रिया में कोई वास्तविक प्रगति नहीं होगी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधार वार्ता में भारत ने 20 मई 2026 को गंभीर आपत्ति दर्ज कराई — आरोप लगाया कि पिछली बैठक के आधिकारिक दस्तावेज़ में स्थायी और अस्थायी सदस्यता विस्तार के व्यापक समर्थन को जानबूझकर कमतर दिखाया गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने इंटरगवर्नमेंटल नेगोशिएशंस (IGN) की बैठक में G4 समूह की ओर से यह बात कही।

मुख्य आपत्ति: 'महत्वपूर्ण समर्थन' नहीं, बहुमत है

हरीश ने स्पष्ट किया कि अधिकांश सदस्य देश UNSC में दोनों श्रेणियों — स्थायी और अस्थायी — की सीटें बढ़ाने के पक्ष में हैं। उनके अनुसार इस समर्थन को दस्तावेज़ में केवल 'महत्वपूर्ण समर्थन' कहना बहुमत की भावना को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं करता।

उन्होंने कहा, "जी-4 चाहता है कि इस सत्र का एलिमेंट्स पेपर सदस्य देशों की राय और भावना को सही और निष्पक्ष तरीके से दिखाए।" यह बयान उस समय आया जब अफ्रीकी देशों के संयुक्त प्रस्ताव — जिसमें दोनों प्रकार की सीटें बढ़ाने की माँग है — को व्यापक समर्थन मिल चुका है।

G4 समूह की स्थिति

G4 में भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान शामिल हैं — चारों देश UNSC में स्थायी सदस्यता के दावेदार हैं और सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के सबसे मुखर समर्थक माने जाते हैं। G4 पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि एक संयुक्त मॉडल तैयार कर टेक्स्ट-आधारित वार्ता तत्काल शुरू होनी चाहिए।

हरीश ने रेखांकित किया कि ऐसा मॉडल पूरी निष्पक्षता से तैयार होना चाहिए और इसमें सभी देशों व समूहों की राय समाहित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि "संयुक्त मॉडल बातचीत की शुरुआत है, अंत नहीं" — इसे केवल न्यूनतम साझा सहमति तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

UFC का अवरोध और प्रक्रियागत गतिरोध

'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' (UFC) नामक छोटे देशों का समूह स्थायी सदस्यता विस्तार का विरोध करता है। इटली इस गुट की अगुवाई करता है और पाकिस्तान इसके मुखर समर्थकों में है। यह समूह प्रक्रियागत नियमों का उपयोग कर आधिकारिक ड्राफ्ट टेक्स्ट को आगे बढ़ने से रोकता रहा है।

UFC का तर्क है कि जब तक पूर्ण सहमति न बने, कोई वार्ता-पाठ तैयार नहीं हो सकता। इसी कारण अब तक कोई आधिकारिक ड्राफ्ट नहीं बन पाया है और 'एलिमेंट्स पेपर' ही वार्ता को जीवित रखने का एकमात्र माध्यम बना हुआ है।

भारत की चेतावनी और आगे का रास्ता

हरीश ने चेतावनी दी कि यदि टेक्स्ट-आधारित वार्ता जल्द नहीं शुरू हुई, तो IGN प्रक्रिया में कोई वास्तविक प्रगति संभव नहीं होगी। उन्होंने कहा कि विभिन्न समूहों के बीच सेतु बनाने वाले प्रस्ताव और नए विचार केवल टेक्स्ट-आधारित वार्ता से ही उभर सकते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब UNSC सुधार की माँग दशकों पुरानी है और कई विकासशील देश — विशेषकर अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका — स्थायी सदस्यता के विस्तार को वैश्विक प्रतिनिधित्व की दृष्टि से अपरिहार्य मानते हैं। G4 का यह दबाव संकेत देता है कि सुधार समर्थक देश अब प्रक्रियागत अवरोध को और सहन करने के मूड में नहीं हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीतिक है — दस्तावेज़ में 'बहुमत' की जगह 'महत्वपूर्ण समर्थन' लिखना वार्ता की दिशा को सूक्ष्मता से प्रभावित करता है। UFC का प्रक्रियागत अवरोध दशकों से UNSC सुधार को ठंडे बस्ते में रखने की सिद्ध रणनीति रही है, और G4 अब इस खेल को खुलकर नाम दे रहा है। गौरतलब है कि भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को अमेरिका, फ्रांस और रूस का समर्थन मिल चुका है, फिर भी प्रक्रिया वहीं अटकी है। असली सवाल यह है कि क्या G4 के पास UFC के प्रक्रियागत वीटो को तोड़ने का कोई व्यावहारिक रास्ता है — या यह दबाव भी पिछले सत्रों की तरह बयानों तक सीमित रहेगा।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UNSC सुधार वार्ता में भारत ने क्या आपत्ति जताई?
भारत ने कहा कि IGN बैठक के दस्तावेज़ में स्थायी और अस्थायी सदस्यता विस्तार के बहुमत समर्थन को 'महत्वपूर्ण समर्थन' कहकर कमतर दिखाया गया है। स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने माँग की कि एलिमेंट्स पेपर सदस्य देशों की राय को निष्पक्ष रूप से प्रतिबिंबित करे।
G4 समूह क्या है और इसकी माँग क्या है?
G4 में भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान शामिल हैं — ये चारों UNSC में स्थायी सदस्यता के दावेदार हैं। G4 की माँग है कि एक संयुक्त मॉडल तैयार कर बिना देरी के टेक्स्ट-आधारित वार्ता शुरू की जाए।
'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' (UFC) समूह UNSC सुधार क्यों रोक रहा है?
UFC स्थायी सदस्यता विस्तार का विरोध करता है और प्रक्रियागत नियमों का उपयोग कर आधिकारिक ड्राफ्ट टेक्स्ट को आगे बढ़ने से रोकता है। इटली इस समूह की अगुवाई करता है और पाकिस्तान इसके मुखर समर्थकों में है; UFC का तर्क है कि पूर्ण सहमति के बिना कोई वार्ता-पाठ नहीं बन सकता।
'एलिमेंट्स पेपर' क्या होता है और यह क्यों अहम है?
एलिमेंट्स पेपर एक अनौपचारिक दस्तावेज़ है जिसमें विभिन्न सुधार प्रस्तावों के समर्थन का उल्लेख किया जाता है। चूँकि UFC के विरोध के कारण कोई आधिकारिक ड्राफ्ट टेक्स्ट नहीं बन पाया है, यह पेपर ही IGN वार्ता को जीवित रखने का एकमात्र माध्यम बना हुआ है।
UNSC सुधार में अगला कदम क्या होगा?
G4 ने माँग की है कि टेक्स्ट-आधारित वार्ता तत्काल शुरू हो और एक संयुक्त मॉडल सभी समूहों की राय को समाहित करते हुए तैयार किया जाए। पी. हरीश ने चेतावनी दी है कि बिना इस कदम के IGN प्रक्रिया में कोई वास्तविक प्रगति संभव नहीं होगी।
राष्ट्र प्रेस
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