क्या संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद सुधारों को अगले सत्र के लिए स्थगित किया?

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क्या संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद सुधारों को अगले सत्र के लिए स्थगित किया?

सारांश

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद सुधारों को 17वीं बार स्थगित कर दिया है। सदस्य देशों के बीच चर्चा के लिए कोई सहमति नहीं बन पाने के कारण यह निर्णय लिया गया। जी-4 देशों ने सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है।

Key Takeaways

  • सुरक्षा परिषद सुधारों का स्थगित होना एक गंभीर मुद्दा है।
  • सदस्य देशों के बीच सहमति की कमी से समस्या बढ़ रही है।
  • जी-4 देशों ने सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
  • संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
  • सुरक्षा परिषद की संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के परिदृश्य पर आधारित है।

संयुक्त राष्ट्र, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। सुरक्षा परिषद सुधारों को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा में लगातार गतिरोध बना हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, महासभा ने 17वीं बार सुरक्षा परिषद सुधारों को स्थगित किया। इसका मुख्य कारण यह है कि सदस्य देशों के बीच चर्चा के लिए कोई एजेंडा तय करने पर सहमति नहीं बनी।

महासभा ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद सुधार और नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने की चर्चा को अगले सत्र में भेजने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया।

जी-4 संगठन (भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान) की ओर से बोलते हुए जापान ने कहा कि सुरक्षा परिषद की विफलता संयुक्त राष्ट्र में विश्वास और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने की उसकी क्षमता को कमजोर कर रही है। जापान के स्थायी मिशन के राजनीतिक अनुभाग के मंत्री इरिया ताकायुकी ने कहा, "सुरक्षा परिषद सुधार की लगातार विफलता सिर्फ परिषद से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और बहुपक्षीय प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।"

उन्होंने कहा, "इस वास्तविकता को देखते हुए कि संयुक्त राष्ट्र में विश्वास डगमगा गया है और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अस्थिर है, परिषद सुधार न केवल संयुक्त राष्ट्र को मजबूत करने के लिए, बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।" मंत्री इरिया ताकायुकी ने कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जो केवल कुछ देशों की चिंता नहीं, बल्कि सभी सदस्य देशों से संबंधित है।

जी-4 के चारों देश लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने और एक-दूसरे का समर्थन करने की मांग कर रहे हैं। इरिया ने कहा, "गंभीर अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों और उनसे निपटने में सुरक्षा परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए परिषद में तत्काल सुधार की जरूरत है और इसे बिना किसी देरी के आगे बढ़ाया जाना चाहिए।"

इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशन (आईजीएन), जो सुरक्षा परिषद सुधारों की एक प्रक्रिया है, उसमें एक प्रगति के रूप में इरिया ने सह-अध्यक्षों द्वारा तैयार किए गए संशोधित "एलिमेंट्स पेपर" का उल्लेख किया, जो विभिन्न देशों और संगठनों के रुख को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि दस्तावेज में यह स्वीकार नहीं किया गया है कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य परिषद में स्थायी और अस्थायी सदस्यों को जोड़ना चाहते हैं।

आईजीएन प्रक्रिया 2009 में शुरू हुई थी। हालांकि, सुधारों को रोकने वाले देशों का एक समूह यूएफसी (यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस) बन गया, जिसमें इटली और पाकिस्तान शामिल हैं। ये देश बिना किसी आम सहमति या सुधारों के 'टेक्स्ट-आधारित बातचीत' का विरोध करते हैं, जिसके कारण प्रक्रिया बार-बार रुक जाती है। हालांकि, जी4 और अधिकांश देश 'टेक्स्ट-आधारित बातचीत' के पक्ष में हैं।

इस बीच, महासभा अध्यक्ष फिलोमेना यांग की प्रवक्ता शेरोन बिर्च ने कहा कि सत्र के दौरान आईजीएन प्रक्रिया में प्रगति हुई है। सुधार वार्ताओं में नई ऊर्जा आई है और सदस्य देश पहले से कहीं अधिक सक्रियता से चर्चा में शामिल हुए हैं।

बता दें कि सुरक्षा परिषद की संरचना आज भी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के परिदृश्य पर आधारित है, जिसमें विजेता देशों को स्थायी सदस्यता मिली।

परिषद में अंतिम सुधार 57 साल पहले हुआ, जब चार अस्थायी सदस्य जोड़े गए। इससे उनकी संख्या 10 हो गई, लेकिन स्थायी सदस्यों की सूची में कोई नया सदस्य नहीं जोड़ा गया। उस समय संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता 113 थी, लेकिन अब 193 है, जबकि परिषद में अब भी केवल 15 सदस्य (5 स्थायी और 10 अस्थायी) हैं, जिनमें ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका पांच स्थायी सदस्य हैं।

Point of View

हमारा दृष्टिकोण यह है कि सुरक्षा परिषद सुधारों को लेकर इस गतिरोध को तोड़ने की आवश्यकता है। यह केवल कुछ देशों का मुद्दा नहीं है; यह पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। हमें एक मजबूत और प्रभावी संयुक्त राष्ट्र की आवश्यकता है, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सके।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता क्यों है?
सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि वर्तमान संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के परिदृश्य पर आधारित है, जिससे कई देशों का प्रतिनिधित्व नहीं हो पाता।
जी-4 संगठन क्या है?
जी-4 संगठन भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान का एक समूह है, जो सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग करता है।
आईजीएन प्रक्रिया क्या है?
आईजीएन प्रक्रिया, इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशन, सुरक्षा परिषद सुधारों की दिशा में चर्चा करने का एक मंच है।
सुरक्षा परिषद में कितने स्थायी सदस्य हैं?
सुरक्षा परिषद में वर्तमान में 5 स्थायी सदस्य हैं: ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस, और संयुक्त राज्य अमेरिका।
सुरक्षा परिषद में अंतिम सुधार कब हुआ था?
सुरक्षा परिषद में अंतिम सुधार 57 साल पहले हुआ था।