एएनआरएफ ने 10 कन्वर्जेंस रिसर्च सेंटर चुने, 945 प्रस्तावों में से IIT-NIT समेत शीर्ष संस्थान शामिल

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एएनआरएफ ने 10 कन्वर्जेंस रिसर्च सेंटर चुने, 945 प्रस्तावों में से IIT-NIT समेत शीर्ष संस्थान शामिल

सारांश

एएनआरएफ ने 945 प्रस्तावों में से 10 कन्वर्जेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस चुने हैं जो विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और मानविकी को एक मंच पर लाएंगे। IIT, NIT, IIM और महिला महाविद्यालय तक फैला यह नेटवर्क NEP 2020 और 'विकसित भारत 2047' की नींव पर खड़ा है।

मुख्य बातें

एएनआरएफ ने 20 मई 2025 को 10 कन्वर्जेंस रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का चयन किया।
कुल 945 प्रस्तावों में से इन दस केंद्रों को चुना गया।
चयनित संस्थानों में आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, एनआईटी अगरतला, आईआईएम जम्मू और पीएसजीआर कृष्णम्मल कॉलेज फॉर वूमेन शामिल हैं।
केंद्र 20 सहयोगी संस्थानों के नेटवर्क से जुड़े हैं — राज्य विश्वविद्यालयों से लेकर निजी संस्थानों तक।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और 'विकसित भारत 2047' के विजन से प्रेरित है।

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने 20 मई 2025 को 10 कन्वर्जेंस रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का चयन किया है, जिनका उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान को सामाजिक विज्ञान और मानविकी के साथ एकीकृत कर जटिल सामाजिक चुनौतियों का समाधान खोजना है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस चयन की पुष्टि एक आधिकारिक बयान में की। कुल 945 प्रस्तावों में से इन दस केंद्रों को चुना गया, जो इस पहल की व्यापक राष्ट्रीय स्वीकार्यता को दर्शाता है।

चयनित संस्थान और उनका दायरा

इस कार्यक्रम में चुने गए दस संस्थान हैं — आईआईटी गांधीनगर, एनआईएएस बेंगलुरु, आईआईटी मद्रास, एनआईटी अगरतला, आईएचडी दिल्ली, आईआईटी धारवाड़, आईआईएम जम्मू, आईआईटी कानपुर, चाणक्य विश्वविद्यालय और पीएसजीआर कृष्णम्मल कॉलेज फॉर वूमेन। यह सूची भौगोलिक और संस्थागत विविधता दोनों को प्रतिबिंबित करती है — उत्तर से दक्षिण और प्रौद्योगिकी संस्थानों से महिला महाविद्यालय तक।

शोध के विषय और प्राथमिकताएँ

ये केंद्र पुरातत्व, पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, डिजिटल मानविकी, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और कम्प्यूटेशनल इकोनॉमिक्स जैसे बहु-विषयक क्षेत्रों पर केंद्रित रहेंगे। कार्यक्रम की संरचना के अनुसार प्रत्येक केंद्र में एकल संस्थान के भीतर या विभिन्न शैक्षणिक, सार्वजनिक एवं निजी संस्थानों के बीच अंतर-विषयक सहयोग अनिवार्य है।

सहयोगी नेटवर्क की व्यापकता

इन केंद्रों से जुड़े सह-प्रधान अन्वेषक (को-पीआई) कुल 20 सहयोगी संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस नेटवर्क में राज्य विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईटी, एनआईटी, निजी विश्वविद्यालय, कॉलेज और मान्यता प्राप्त अनुसंधान एवं विकास संस्थान सम्मिलित हैं। यह संरचना सुनिश्चित करती है कि शोध के परिणाम केवल प्रतिष्ठित संस्थानों तक सीमित न रहकर व्यापक शैक्षणिक समुदाय तक पहुँचें।

राष्ट्रीय नीति से जुड़ाव

एएनआरएफ का यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की बहु-विषयक शिक्षा की अवधारणा से प्रेरित है और 'विकसित भारत 2047' के दीर्घकालिक विजन के अनुरूप तैयार किया गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स और बिग डेटा एनालिटिक्स के युग में विज्ञान और सामाजिक विज्ञान का यह समन्वय सामाजिक-आर्थिक प्रगति के नए मार्ग प्रशस्त कर सकता है, साथ ही सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक हो सकता है।

आगे की राह

गौरतलब है कि 945 प्रस्तावों की भारी संख्या यह संकेत देती है कि देश भर के शोध संस्थान बहु-विषयक अनुसंधान के प्रति गंभीर रुचि रखते हैं। चयनित केंद्रों से अपेक्षा है कि वे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय समस्याओं — जैसे कृषि संकट, शहरीकरण की चुनौतियाँ और सार्वजनिक स्वास्थ्य — के लिए साक्ष्य-आधारित नीति समाधान तैयार करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है — क्या ये केंद्र प्रकाशन-संख्या से आगे जाकर नीति-प्रासंगिक शोध दे पाएंगे? भारत में बहु-विषयक शोध की परंपरा अभी भी कमज़ोर है; सामाजिक विज्ञान और STEM के बीच की खाई संस्थागत संस्कृति में गहरी जड़ें रखती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि चयनित सूची में IIT और IIM का वर्चस्व है — छोटे राज्य विश्वविद्यालय, जो ज़मीनी समस्याओं के सबसे करीब हैं, हाशिये पर हैं। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य तभी साकार होंगे जब इन केंद्रों का शोध सरकारी नीति-निर्माण से सीधे जुड़े, न कि केवल अकादमिक पत्रिकाओं तक सिमटे।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एएनआरएफ का कन्वर्जेंस रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कार्यक्रम क्या है?
यह अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) की एक पहल है जिसके तहत 10 केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सामाजिक विज्ञान और मानविकी को मिलाकर जटिल सामाजिक समस्याओं का समाधान खोजेंगे। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और 'विकसित भारत 2047' के विजन पर आधारित है।
इन 10 केंद्रों के लिए किन संस्थानों का चयन किया गया है?
चयनित संस्थानों में आईआईटी गांधीनगर, एनआईएएस बेंगलुरु, आईआईटी मद्रास, एनआईटी अगरतला, आईएचडी दिल्ली, आईआईटी धारवाड़, आईआईएम जम्मू, आईआईटी कानपुर, चाणक्य विश्वविद्यालय और पीएसजीआर कृष्णम्मल कॉलेज फॉर वूमेन शामिल हैं। ये केंद्र 20 सहयोगी संस्थानों के व्यापक नेटवर्क से भी जुड़े हैं।
ये रिसर्च सेंटर किन विषयों पर काम करेंगे?
ये केंद्र पुरातत्व, पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, डिजिटल मानविकी, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और कम्प्यूटेशनल इकोनॉमिक्स सहित विविध बहु-विषयक क्षेत्रों में शोध करेंगे। प्रत्येक केंद्र में अंतर-संस्थागत सहयोग अनिवार्य है।
एएनआरएफ के इस कार्यक्रम को कितने प्रस्ताव मिले थे?
इस कार्यक्रम के लिए देश भर के शैक्षणिक और शोध संस्थानों से कुल 945 प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें से 10 को अंतिम रूप से चुना गया। यह भारी प्रतिक्रिया बहु-विषयक अनुसंधान के प्रति संस्थानों की गहरी रुचि को दर्शाती है।
यह कार्यक्रम 'विकसित भारत 2047' से कैसे जुड़ा है?
एएनआरएफ का यह कार्यक्रम 'विकसित भारत 2047' के उस विजन से जुड़ा है जिसमें साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण और समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास पर ज़ोर है। एआई, रोबोटिक्स और बिग डेटा के साथ सामाजिक विज्ञान का समन्वय सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक माना जा रहा है।
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