एएनआरएफ ने 10 कन्वर्जेंस रिसर्च सेंटर चुने, 945 प्रस्तावों में से IIT-NIT समेत शीर्ष संस्थान शामिल
सारांश
मुख्य बातें
अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने 20 मई 2025 को 10 कन्वर्जेंस रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का चयन किया है, जिनका उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान को सामाजिक विज्ञान और मानविकी के साथ एकीकृत कर जटिल सामाजिक चुनौतियों का समाधान खोजना है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस चयन की पुष्टि एक आधिकारिक बयान में की। कुल 945 प्रस्तावों में से इन दस केंद्रों को चुना गया, जो इस पहल की व्यापक राष्ट्रीय स्वीकार्यता को दर्शाता है।
चयनित संस्थान और उनका दायरा
इस कार्यक्रम में चुने गए दस संस्थान हैं — आईआईटी गांधीनगर, एनआईएएस बेंगलुरु, आईआईटी मद्रास, एनआईटी अगरतला, आईएचडी दिल्ली, आईआईटी धारवाड़, आईआईएम जम्मू, आईआईटी कानपुर, चाणक्य विश्वविद्यालय और पीएसजीआर कृष्णम्मल कॉलेज फॉर वूमेन। यह सूची भौगोलिक और संस्थागत विविधता दोनों को प्रतिबिंबित करती है — उत्तर से दक्षिण और प्रौद्योगिकी संस्थानों से महिला महाविद्यालय तक।
शोध के विषय और प्राथमिकताएँ
ये केंद्र पुरातत्व, पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, डिजिटल मानविकी, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और कम्प्यूटेशनल इकोनॉमिक्स जैसे बहु-विषयक क्षेत्रों पर केंद्रित रहेंगे। कार्यक्रम की संरचना के अनुसार प्रत्येक केंद्र में एकल संस्थान के भीतर या विभिन्न शैक्षणिक, सार्वजनिक एवं निजी संस्थानों के बीच अंतर-विषयक सहयोग अनिवार्य है।
सहयोगी नेटवर्क की व्यापकता
इन केंद्रों से जुड़े सह-प्रधान अन्वेषक (को-पीआई) कुल 20 सहयोगी संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस नेटवर्क में राज्य विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईटी, एनआईटी, निजी विश्वविद्यालय, कॉलेज और मान्यता प्राप्त अनुसंधान एवं विकास संस्थान सम्मिलित हैं। यह संरचना सुनिश्चित करती है कि शोध के परिणाम केवल प्रतिष्ठित संस्थानों तक सीमित न रहकर व्यापक शैक्षणिक समुदाय तक पहुँचें।
राष्ट्रीय नीति से जुड़ाव
एएनआरएफ का यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की बहु-विषयक शिक्षा की अवधारणा से प्रेरित है और 'विकसित भारत 2047' के दीर्घकालिक विजन के अनुरूप तैयार किया गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स और बिग डेटा एनालिटिक्स के युग में विज्ञान और सामाजिक विज्ञान का यह समन्वय सामाजिक-आर्थिक प्रगति के नए मार्ग प्रशस्त कर सकता है, साथ ही सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक हो सकता है।
आगे की राह
गौरतलब है कि 945 प्रस्तावों की भारी संख्या यह संकेत देती है कि देश भर के शोध संस्थान बहु-विषयक अनुसंधान के प्रति गंभीर रुचि रखते हैं। चयनित केंद्रों से अपेक्षा है कि वे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय समस्याओं — जैसे कृषि संकट, शहरीकरण की चुनौतियाँ और सार्वजनिक स्वास्थ्य — के लिए साक्ष्य-आधारित नीति समाधान तैयार करें।