भारत की एआई और मटेरियल साइंस पर रिसर्च का वैश्विक मंच: आई-इनवेंटिव 2026
सारांश
Key Takeaways
- 150 से अधिक नवाचारों का प्रदर्शन
- वीडियो पिचिंग सत्र का आयोजन
- आईआईटी और स्टार्टअप्स की भागीदारी
- नवाचार पाइपलाइन का निर्माण
- अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के अवसर
नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देश में टेक्नोलॉजी से संबंधित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन होने वाला है। 'आई-इनवेंटिव 2026' नामक यह कार्यक्रम भारत के अनुसंधान को व्यावहारिक तकनीकों में परिवर्तित करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा। यह आयोजन सोमवार से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के द्वारा संचालित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में 150 से अधिक नवाचारों की प्रदर्शनी होगी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य सेवाओं, मटेरियल साइंस, पृथ्वी विज्ञान और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित हैं। इसके अलावा, 50 से अधिक स्टार्टअप और 20 से अधिक वेंचर कैपिटल निवेशक फंडिंग और विकास के नए अवसरों की खोज में भाग लेंगे। यह आयोजन आईआईटी आईएसएम धनबाद में आयोजित किया जाएगा। 6 और 7 अप्रैल को होने वाला यह कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अकादमिक जगत, उद्योग, स्टार्टअप और निवेशकों को एकजुट करना है ताकि उनके अनुसंधान को वास्तविकता में बदला जा सके।
'भारत इनोवेट्स 2026' के साथ मिलकर यह पहल भारत की नवाचार क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का कार्य करेगी। भारत इनोवेट्स 2026 एक वैश्विक एक्सेलेरेटर के रूप में 100 से 120 डीप-टेक स्टार्टअप्स और प्रमुख संस्थानों को 13 अत्याधुनिक क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से जोड़ेगा। वहीं, 'आई-इनवेंटिव 2026' देश में एक मजबूत नवाचार पाइपलाइन तैयार करेगा, जो राष्ट्रीय स्तर से वैश्विक स्तर तक तकनीकों को पहुंचाने में सहायक होगा।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम के दौरान दो नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन भी किया जाएगा। 'रीन्यू कॉर्प सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का लक्ष्य कोयला खनन से जुड़े समुदायों को सशक्त बनाकर सतत विकास को बढ़ावा देना है, जबकि 'वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' महत्वपूर्ण खनिजों पर अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए लगभग 5 मिलियन डॉलर की सहायता के साथ स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा, उच्च स्तरीय गोलमेज बैठक, विभिन्न समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर, स्टार्टअप पिचिंग सत्र और तकनीकी प्रदर्शनी भी इस आयोजन का हिस्सा होंगे, जिससे अनुसंधान और उद्योग के बीच सीधा संबंध मजबूत होगा।
संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सुकुमार मिश्रा ने कहा कि 'आई-इनवेंटिव 2026' संस्थान की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें अनुसंधान को वास्तविक प्रभाव में बदलने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 'भारत इनोवेट्स 2026' के सहयोग से यह पहल भारत को डीप-टेक नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस पहल का अगला चरण 14 से 16 जून 2026 के बीच फ्रांस के नीस शहर में आयोजित होगा, जहाँ भारत के शीर्ष डीप-टेक स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
इस दौरान अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों, सह-विकास और वैश्विक बाजार तक पहुंच के नए अवसर भी खुलेंगे। 'आई-इनवेंटिव 2026' और 'भारत इनोवेट्स 2026' मिलकर भारत के अनुसंधान और नवाचार को प्रयोगशालाओं से निकालकर उद्योग, समाज और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में एक मजबूत और प्रभावी कदम हैं।
वास्तव में, यह भारतीय नवाचारों को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम में आईआईटी धनबाद के साथ-साथ आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी जम्मू, आईआईटी रुड़की और आईआईटी बीएचयू जैसे प्रमुख संस्थानों की सक्रिय भागीदारी होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मंच भारत के उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करेगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति देगा।