क्या एनआईटी के कोर्स में सुधार होगा, उभरती तकनीकों पर रहेगा ध्यान?: धर्मेंद्र प्रधान
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नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों एवं विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान परिषद की 13वीं बैठक में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि इस अवसर पर यह निर्णय लिया गया कि एनआईटी अब अपने कोर्स को उभरती प्रौद्योगिकियों के आधार पर नए सिरे से विकसित करेगी।
उन्होंने कहा कि एनआईटी में वर्तमान में कई उत्कृष्ट कोर्स चल रहे हैं, लेकिन आज की आवश्यकता और वैश्विक परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इनको और अधिक सुधारित किया जाएगा। पीएचडी अब सिर्फ एक पब्लिकेशन या वाक्यांश तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसे उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किला से घोषणा की थी कि जॉब क्रिएटर और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा। हमारी एनआईटी में स्टार्टअप इकोसिस्टम मौजूद है, इसे और तेज करने के लिए रिसर्च पार्क खोलने का निर्णय लिया गया है। जहां भी यह पहले से है, वहां इसे और बढ़ावा दिया जाएगा और जहां नहीं है, वहां इसे स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि इंजीनियरिंग कोर्स और रिसर्च मातृभाषा में हों तो छात्रों की समझ में वृद्धि होगी और समस्या-आधारित अध्ययन से समाधान निकल सकेगा। इस पर भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में 7 अंतरराष्ट्रीय इंजीनियर और शोधकर्ता समाज हैं, जिन्हें एक-एक विषय सौंपा गया है। प्रत्येक के लिए एक कंपनी बनाई जाएगी ताकि वे अपने स्टार्टअप इकोसिस्टम को आगे बढ़ा सकें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत को गति देने के लिए इसे जन आंदोलन में परिवर्तित कर दिया है। इसे आगे बढ़ाने में हमारी एनआईटी और अंतरराष्ट्रीय इंजीनियर व शोधकर्ता समाज महत्वपूर्ण कड़ी बनेंगे।
उन्होंने बताया कि आज की बैठक में विशेषज्ञ और सभी संस्थानों के निदेशक शामिल थे। सभी ने सहमति जताई कि मिलकर इसे आगे बढ़ाएंगे। भारत को स्किल हब बनाने की दिशा में हम अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ वैश्विक जरूरतों को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। यह काम भारत में रहकर और विदेश में रहकर भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि मातृभाषा में पढ़ाई हो। यह छात्रों पर निर्भर करेगा कि वे किस भाषा में अध्ययन करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि इसे 22 भाषाओं में प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। जैसी आवश्यकताएं होंगी, उसी के अनुसार आगे निर्णय लिए जाएंगे।