पंजाब रोडवेज कर्मचारियों की चेतावनी: मांगें नहीं मानी तो मान सरकार के खिलाफ 5-6 लाख यात्रियों में करेंगे प्रचार
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब रोडवेज के कर्मचारियों ने भगवंत मान सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। बुधवार, 20 मई को अमृतसर के सेंट्रल बस स्टैंड पर हुए जोरदार प्रदर्शन में कर्मचारियों ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे रोज़ाना बसों में सफर करने वाले 5 से 6 लाख यात्रियों के बीच सरकार के खिलाफ प्रचार अभियान चलाएंगे। कर्मचारियों का यह विरोध पंजाब के हर जिले में एक साथ चलाया जा रहा है।
मुख्य मांगें और पृष्ठभूमि
कर्मचारी मुख्यतः दो मांगों को लेकर सड़कों पर हैं — संगरूर जेल में बंद अपने 10 साथियों की रिहाई और आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण। कैशियर बलजीत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सत्ता में आने से पहले जो वादे किए थे, वे साढ़े चार साल बीत जाने के बाद भी पूरे नहीं हुए। उन्होंने बताया कि सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों को 10 साल बाद नियमित करने का आश्वासन दिया था, जो अब तक अधूरा है।
परिवहन मंत्री से बैठक बेनतीजा
कर्मचारियों ने बताया कि 18 मई को परिवहन मंत्री हरपाल चीमा के साथ बैठक हुई थी, लेकिन उससे कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इसके बाद कर्मचारियों ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। 25 जुलाई को बसें डिपो में खड़ी रखी जाएंगी और 26 जुलाई को मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन होगा। यदि इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो तीन दिवसीय हड़ताल का भी विकल्प खुला है।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
रोडवेज कर्मचारी सुभाष वैद्य ने कहा कि जब से यह सरकार सत्ता में आई है, कर्मचारी लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन एक भी मांग नहीं मानी गई। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार हमारी बात नहीं सुनती तो हम 5-6 लाख यात्रियों के सामने सरकार का असली चेहरा उजागर करेंगे।' कर्मचारियों ने यह भी कहा कि जो लोग इस सरकार को बनाने में योगदान दे सकते हैं, वे इसे हटाने के लिए भी प्रचार कर सकते हैं।
राजनीतिक संदर्भ
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और विपक्षी दल कई मुद्दों पर मान सरकार को घेर रहे हैं। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने 2022 के चुनाव में सरकारी कर्मचारियों की समस्याओं को सुलझाने का वादा किया था। कर्मचारी संगठनों का असंतोष विपक्ष को अतिरिक्त राजनीतिक हथियार दे सकता है।
आगे की राह
फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि 25 जुलाई की समयसीमा से पहले यदि सरकार बातचीत के लिए आगे नहीं आई तो आंदोलन और तीखा होगा। पंजाब रोडवेज की बसों पर लाखों यात्री निर्भर हैं, इसलिए संभावित हड़ताल का असर आम जनता पर भी पड़ सकता है।