ट्विशा शर्मा केस: भोपाल एम्स में -80°C स्टोरेज सुविधा नहीं, पुलिस ने परिवार से शव लेने का आग्रह किया
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश पुलिस ने 20 मई 2026 को ट्विशा शर्मा के परिवार से भोपाल एम्स के मुर्दाघर से उनका पार्थिव शरीर अपने कब्जे में लेने का आग्रह किया। यह कदम तब उठाया गया जब एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग ने लिखित रूप से सूचित किया कि शव को सड़ने से बचाने के लिए -80 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता है, जो संस्थान में उपलब्ध नहीं है।
मामले का पृष्ठभूमि
समर्थ सिंह की पत्नी ट्विशा शर्मा का 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में उनके घर पर निधन हो गया। पुलिस के अनुसार, उनकी मौत कथित तौर पर आत्महत्या के कारण हुई। 13 मई को भोपाल एम्स में पोस्टमॉर्टम किया गया और तब से शव संस्थान के मुर्दाघर में रखा हुआ है — यानी इस रिपोर्ट के समय आठ दिनों से अधिक।
एम्स की एडवाइजरी और तकनीकी चुनौती
18 मई 2026 की रात को भोपाल एम्स के फोरेंसिक विभाग ने एक लिखित एडवाइजरी जारी की। इसमें स्पष्ट किया गया कि शव को दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए -80 डिग्री सेल्सियस तापमान आवश्यक है, जबकि सामान्य मुर्दाघर फ्रीजर केवल -4 डिग्री से +4 डिग्री सेल्सियस के बीच काम करते हैं। विभाग ने कहा कि इस तापमान पर सड़ने की प्रक्रिया धीमी तो होती है, किंतु पूरी तरह नहीं रुकती। इस एडवाइजरी के आधार पर कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन ने ट्विशा के पिता को पत्र लिखकर शव अपने कब्जे में लेने का अनुरोध किया।
परिवार का रुख और अदालत में अर्जी
परिवार ने शव अपने कब्जे में लेने से तब तक इनकार कर दिया है, जब तक मध्य प्रदेश से बाहर दूसरा पोस्टमॉर्टम नहीं हो जाता। मंगलवार को परिवार ने भोपाल की मजिस्ट्रेट अदालत में एक अर्जी दाखिल कर नई दिल्ली एम्स में स्वतंत्र पोस्टमॉर्टम कराने की माँग की। परिवार का तर्क है कि किसी प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान की स्वतंत्र मेडिकल राय से जाँच पर जनता का भरोसा बहाल होगा।
पुलिस का स्पष्टीकरण
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पुलिस को दूसरे पोस्टमॉर्टम पर कोई आपत्ति नहीं है। हालाँकि, शव की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए परिवार से शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब मामला न्यायिक और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर जाँच के दायरे में है।
आगे क्या होगा
मजिस्ट्रेट अदालत में दाखिल अर्जी पर सुनवाई अपेक्षित है, जिसमें नई दिल्ली एम्स में दूसरे पोस्टमॉर्टम का अनुरोध किया गया है। अदालत के फैसले पर ही यह तय होगा कि शव कहाँ और कैसे स्थानांतरित किया जाएगा। शव की बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर अदालत से त्वरित सुनवाई की उम्मीद है।