भोपाल दहेज हत्या: रिटायर्ड जिला जज की मां और वकील बेटे पर FIR, ट्विशा शर्मा की मौत का मामला
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल में 34 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद पुलिस ने उनकी सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या एवं दहेज उत्पीड़न की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में यह एफआईआर गुरुवार देर रात दर्ज हुई — परिवार के लगातार धरने और कमिश्नर कार्यालय में हंगामे के बाद।
मुख्य घटनाक्रम
नोएडा की मूल निवासी ट्विशा मंगलवार रात भोपाल के लहरपुर स्थित बाग मुगलिया एक्सटेंशन में अपने घर की छत पर पाइप से लटकी हुई मिलीं। उनके पति उन्हें तत्काल एम्स भोपाल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। ट्विशा ने मात्र 6 महीने पहले — 12 दिसंबर 2025 को — समर्थ सिंह से विवाह किया था; दोनों की मुलाकात एक डेटिंग ऐप पर हुई थी।
ट्विशा MBA डिग्रीधारक थीं और दिल्ली की एक कंपनी में कई वर्षों से कार्यरत थीं। उनकी सास गिरिबाला सिंह फरवरी 2023 में भोपाल जिला न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं, जबकि समर्थ सिंह जिला न्यायालय में वकालत करते हैं।
परिवार के आरोप
ट्विशा के परिवार ने आत्महत्या की कहानी को सिरे से नकारते हुए हत्या और सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया है। परिवार का दावा है कि समर्थ और उनकी मां ने जाँचकर्ताओं को गुमराह करने के लिए झूठी कहानी गढ़ी। ट्विशा के भाई हर्षित शर्मा ने कहा कि पुलिस दोनों आरोपियों के प्रभाव और दबदबे के कारण शुरुआत में कार्रवाई से बचती रही।
परिवार और रिश्तेदार पिछले दो दिनों से कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठे थे। गुरुवार को तख्तियाँ लेकर जुटे प्रदर्शनकारियों ने कमिश्नर कार्यालय तक पहुँचकर तत्काल गिरफ्तारी की माँग की।
पुलिस की प्रतिक्रिया
सहायक पुलिस आयुक्त रजनीश कश्यप कौल ने शुक्रवार को पुष्टि की कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस टीमें आरोपियों के आवास तथा अन्य संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। हालाँकि, गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब न्यायिक पृष्ठभूमि वाले परिवारों से जुड़े दहेज मामलों में पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि विवाह के महज़ छह महीने के भीतर हुई इस मौत ने भोपाल में व्यापक आक्रोश उत्पन्न किया है।
आगे क्या होगा
पुलिस के अनुसार, छापेमारी जारी है और दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द अपेक्षित है। परिवार ने माँग की है कि मामले की जाँच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि आरोपियों के न्यायिक संपर्कों का प्रभाव जाँच पर न पड़े। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्य इस मामले की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।