बिहार विधानसभा: संजीव चौरसिया बने मुख्य सचेतक, मंजीत कुमार सिंह को उप मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 मई 2026 को बिहार विधानसभा के संसदीय कार्यों के सुचारु संचालन हेतु मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक और सचेतकों की नियुक्ति की। दीघा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीन बार के विधायक संजीव चौरसिया को सत्तारूढ़ गठबंधन का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है, जबकि बरौली से विधायक मंजीत कुमार सिंह को उप मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुख्य नियुक्तियाँ और बदलाव
इससे पहले मुख्य सचेतक के पद पर विनोद नारायण झा आसीन थे। उनकी जगह संजीव चौरसिया को यह दायित्व सौंपा गया है। उप मुख्य सचेतक बनाए गए मंजीत कुमार सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं। यह नियुक्तियाँ आगामी विधायी सत्र और सदन की रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए की गई हैं।
सचेतकों की पूरी सूची
सचेतक के रूप में नौ विधायकों को मनोनीत किया गया है — परिहार से गायत्री देवी, गोविंदगंज से राजू तिवारी, पिपरा से रामविलास कामत, हरलाखी से सुधांशु शेखर, मधुबन से राणा रणधीर, बेनीपुर से विनय कुमार चौधरी, बनमनखी से कृष्ण कुमार ऋषि, मसौढी से अरुण मांझी और पटना साहिब से रत्नेश कुमार। गौरतलब है कि जनता दल (यूनाइटेड) — JDU — के रामविलास कामत और विनय कुमार चौधरी को पहली बार सचेतक का दायित्व दिया गया है।
संजीव चौरसिया: पृष्ठभूमि और राजनीतिक कद
संजीव चौरसिया BJP के वरिष्ठ नेता हैं और अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं। उनके पिता गंगा प्रसाद चौरसिया सिक्किम के राज्यपाल रह चुके हैं। संजीव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से हैं और छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे हैं। वे पटना के दीघा से लगातार तीन बार विधायक चुने गए हैं और बिहार में BJP के संगठन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है।
नियुक्ति के बाद चौरसिया ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आभार व्यक्त करते हुए लिखा, 'बिहार विधानसभा में मुख्य सचेतक के रूप में नई जिम्मेदारी मिलने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी एवं केंद्रीय नेतृत्व के प्रति हृदय से आभार। साथ ही नवनियुक्त उप मुख्य सचेतक व सचेतकों को बधाई।'
सचेतक पद का महत्व
लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था में सचेतक का पद रीढ़ की हड्डी की तरह होता है — यह सुनिश्चित करता है कि दल के सदस्य सदन के भीतर आधिकारिक निर्देशों का पालन करें। इन नियुक्तियों से सरकार को सदन में अपने विधायी एजेंडे को अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और विपक्ष के हमलों का संगठित जवाब देने में मदद मिलेगी। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार मुख्य सचेतक को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है, जबकि उप सचेतक और सचेतकों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया जाता है।
आगे की राह
यह नियुक्तियाँ ऐसे समय में हुई हैं जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद NDA सरकार अपनी विधायी स्थिति को सुदृढ़ कर रही है। नव-नियुक्त सचेतक दल आगामी बजट सत्र और महत्वपूर्ण विधेयकों के दौरान गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।