ऋषभ पंत टेस्ट उप-कप्तानी के हकदार थे, IPL से आकलन गलत: मोहम्मद कैफ
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ऋषभ पंत को टेस्ट टीम की उप-कप्तानी से हटाना उचित नहीं था। कैफ के अनुसार, पंत ने रेड-बॉल क्रिकेट में कोई ऐसी चूक नहीं की जो इस फैसले को सही ठहराए, और वे भारतीय टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े मैच-विनर बल्लेबाजों में से एक हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
पिछले साल इंग्लैंड दौरे के लिए शुभमन गिल को रेड-बॉल कप्तान नियुक्त किए जाने के बाद ऋषभ पंत को टेस्ट टीम का उप-कप्तान बनाया गया था। इसे व्यापक रूप से इस बात का संकेत माना गया था कि चयन समिति पंत को भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार कर रही है। जब गिल गर्दन की चोट के कारण गुवाहाटी टेस्ट से बाहर हो गए, तब पंत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की कप्तानी भी संभाली — हालाँकि उस मुकाबले में भारत को 408 रनों की बड़ी हार झेलनी पड़ी और सीरीज 0-2 से गँवानी पड़ी।
IPL प्रदर्शन और उप-कप्तानी का बदलाव
आईपीएल 2026 में पंत ने लखनऊ सुपर जायंट्स की कप्तानी करते हुए 13 में से 9 मैच गँवाए। बल्लेबाजी में भी उनका प्रदर्शन उम्मीदों से कमतर रहा — उन्होंने 28.60 की औसत से 286 रन बनाए। इसके बाद अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट के लिए केएल राहुल को उप-कप्तान की जिम्मेदारी दे दी गई।
कैफ की दलील: फॉर्मेट को न मिलाएँ
'जियोहॉटस्टार' पर अपनी बात रखते हुए कैफ ने कहा, "ऋषभ पंत ने कुछ भी गलत नहीं किया है। रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल क्रिकेट दो बिल्कुल अलग फॉर्मेट हैं। आप आईपीएल के आधार पर उनका आकलन कर रहे हैं, यह कह रहे हैं कि वह बतौर कप्तान अच्छा काम नहीं कर रहे हैं, उनकी टीम हार रही है, और वह रन नहीं बना रहे हैं, लेकिन मेरा मानना है कि टेस्ट में एक बल्लेबाज के तौर पर भारत के लिए ऋषभ पंत से बड़ा मैच-विनर कोई नहीं है।"
कैफ ने चयन नीति की असंगति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "समस्या यह है कि लोग फॉर्मेट को आपस में मिला देते हैं। आकिब नबी को मौका क्यों नहीं मिला? क्या इसलिए कि उन्होंने आईपीएल में विकेट नहीं लिए? ये दोनों पूरी तरह से अलग फॉर्मेट हैं। केएल राहुल 34 साल के हैं। एक तरफ, आप मोहम्मद शमी को यह कहकर नहीं चुनते कि उम्र उनके पक्ष में नहीं है और आप युवा खिलाड़ियों की तलाश में हैं। इसलिए, मैं चाहूंगा कि वे एक जैसे रहें।"
चयन नीति पर सवाल
कैफ का तर्क है कि अजित आगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति को फॉर्मेट-विशिष्ट मापदंड अपनाने चाहिए। उनके अनुसार, "या तो फॉर्म के आधार पर चुनें, चाहे उम्र कुछ भी हो, और अगर आप रन बना रहे हैं या विकेट ले रहे हैं, तो आपको चुना जाना चाहिए।" यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय क्रिकेट में नेतृत्व और चयन को लेकर बहस तेज़ हो गई है।
आगे क्या
अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट में केएल राहुल की उप-कप्तानी यह तय करेगी कि चयन समिति का यह निर्णय दीर्घकालिक नीति बदलाव है या महज़ एक अस्थायी प्रयोग। पंत का टेस्ट करियर और रेड-बॉल नेतृत्व क्षमता निकट भविष्य में भारतीय क्रिकेट की सबसे चर्चित बहसों में से एक बनी रहेगी।