19 अगस्त 2026
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राजनाथ सिंह की सियोल यात्रा: भारत-दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा साइबर सहयोग समेत 3 अहम समझौते

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राजनाथ सिंह की सियोल यात्रा: भारत-दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा साइबर सहयोग समेत 3 अहम समझौते

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सियोल यात्रा महज़ शिष्टाचार नहीं थी — यह भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति का व्यावहारिक विस्तार है। डिफेंस साइबर सहयोग, शैक्षणिक साझेदारी और 'काइंड-एक्स' पहल के साथ, भारत-दक्षिण कोरिया संबंध अब सरकारी बैठकों से आगे तकनीकी और औद्योगिक साझेदारी की दिशा में बढ़ रहे हैं।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सियोल यात्रा के दौरान 20 मई 2026 को भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 3 रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
समझौतों में डिफेंस साइबर सहयोग , नेशनल डिफेंस कॉलेज व कोरिया नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के बीच शैक्षणिक सहयोग और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में साझेदारी शामिल हैं।
राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक और DAPA मंत्री ली योंग-चेओल से द्विपक्षीय वार्ता की।
दोनों देशों ने संयुक्त विकास, उत्पादन और निर्यात के नए अवसरों पर सहमति जताई; 'काइंड-एक्स' पहल के रोडमैप पर चर्चा हुई।
रक्षा मंत्री ने सियोल स्थित नेशनल सेमेट्री ऑफ कोरिया में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सियोल यात्रा के दौरान 20 मई 2026 को भारत और दक्षिण कोरिया के बीच तीन महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें डिफेंस साइबर सहयोग, दोनों देशों के प्रमुख रक्षा शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में साझेदारी शामिल हैं। इन समझौतों को दोनों देशों की विशेष रणनीतिक साझेदारी को बहुआयामी और भविष्योन्मुखी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

मुख्य समझौते और उनकी विषय-वस्तु

हस्ताक्षरित समझौतों में सबसे उल्लेखनीय है डिफेंस साइबर सहयोग से जुड़ा करार, जो दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच साइबर खतरों से निपटने की संयुक्त क्षमता को मज़बूत करेगा। इसके अतिरिक्त, भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज और दक्षिण कोरिया की कोरिया नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के बीच शैक्षणिक और शोध सहयोग का समझौता भी संपन्न हुआ। तीसरा समझौता संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में दोनों देशों के संयुक्त योगदान को संस्थागत रूप देने से संबंधित है।

उच्च-स्तरीय बैठकें और चर्चा के मुद्दे

राजनाथ सिंह ने सियोल में दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक और डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन के मंत्री ली योंग-चेओल से अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता की। इन बैठकों में रक्षा उत्पादन, रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता जैसे विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

मंत्री ली योंग-चेओल के साथ हुई बैठक में दोनों पक्षों ने संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त निर्यात के नए अवसर तलाशने पर सहमति जताई। इस बैठक में महत्वाकांक्षी 'काइंड-एक्स' (KIND-X) पहल के रोडमैप पर भी चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की नवाचार क्षमताओं को एकीकृत कर रक्षा क्षेत्र में उन्नत समाधान विकसित करना है।

राजनाथ सिंह का बयान

दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री के साथ वार्ता के बाद राजनाथ सिंह ने कहा, 'भारत और दक्षिण कोरिया क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और तकनीकी सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता रखते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच 'विशेष रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में और अधिक मजबूत होगी' तथा दोनों पक्ष 'साझा हितों और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर मिलकर काम करते रहेंगे।'

राष्ट्रीय समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि

महत्वपूर्ण बैठकों से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार की सुबह सियोल स्थित नेशनल सेमेट्री ऑफ कोरिया पहुँचे, जहाँ उन्होंने पुष्प अर्पित कर दक्षिण कोरिया के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि 'इन वीर जवानों का साहस, समर्पण और देशभक्ति की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।' यह कूटनीतिक संकेत दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामरिक सम्मान को रेखांकित करता है।

विशेषज्ञ दृष्टिकोण और आगे की राह

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार राजनाथ सिंह का यह दौरा भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा संबंधों को नई गति देगा। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है और भारत अपने रक्षा-औद्योगिक आधार को विविधता देने की कोशिश में है। गौरतलब है कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' 2015 में स्थापित हुई थी, और तब से रक्षा व्यापार एवं तकनीकी सहयोग दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 'काइंड-एक्स' जैसी पहल इस साझेदारी को सरकार-से-सरकार के स्तर से आगे उद्योग और नवाचार के स्तर तक ले जाने का प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या दोनों देशों के रक्षा उद्योग नौकरशाही बाधाओं को पार कर वास्तविक सह-उत्पादन तक पहुँच पाते हैं। गौरतलब है कि भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा व्यापार अभी भी अपनी क्षमता से काफ़ी कम है, और साइबर सहयोग जैसे समझौते तब तक प्रभावी नहीं होंगे जब तक उनके क्रियान्वयन की समय-सीमा और जवाबदेही तय न हो।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह की सियोल यात्रा में कौन-से समझौते हुए?
20 मई 2026 को सियोल में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच तीन रक्षा समझौते हुए — डिफेंस साइबर सहयोग, नेशनल डिफेंस कॉलेज व कोरिया नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के बीच शैक्षणिक सहयोग, और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में साझेदारी। ये समझौते दोनों देशों की विशेष रणनीतिक साझेदारी को व्यावहारिक रूप देने की कोशिश हैं।
'काइंड-एक्स' पहल क्या है?
'काइंड-एक्स' (KIND-X) भारत और दक्षिण कोरिया की एक संयुक्त रक्षा नवाचार पहल है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की तकनीकी और नवाचार क्षमताओं को एकीकृत कर रक्षा क्षेत्र में उन्नत समाधान विकसित करना है। राजनाथ सिंह और DAPA मंत्री ली योंग-चेओल की बैठक में इसके रोडमैप पर चर्चा हुई।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा संबंध कितने पुराने हैं?
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' 2015 में स्थापित हुई थी। तब से दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार और तकनीकी सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और 20 मई 2026 के समझौते इस साझेदारी को नई गहराई देते हैं।
इन समझौतों से हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ये समझौते हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन और तकनीकी साझेदारी को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब इस क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है।
राजनाथ सिंह ने सियोल में और क्या किया?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार की सुबह सियोल स्थित 'नेशनल सेमेट्री ऑफ कोरिया' में पुष्प अर्पित कर दक्षिण कोरिया के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि भारत, कोरिया गणराज्य के वीर नायकों की विरासत का सम्मान करने में पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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