दक्षिण कोरिया और फ्रांस ने सियोल में सुरक्षा और रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर किया विचार

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दक्षिण कोरिया और फ्रांस ने सियोल में सुरक्षा और रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर किया विचार

सारांश

सियोल में, दक्षिण कोरिया और फ्रांस के रक्षा प्रमुखों ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और हथियार उद्योग सहयोग पर चर्चा की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच 140 साल के राजनयिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने की बात की गई।

Key Takeaways

  • क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने हेतु सहयोग।
  • द्विपक्षीय रक्षा और हथियार उद्योग में वृद्धि।
  • कोरियन पेनिनसुला की शांति एवं स्थिरता को सुनिश्चित करना।
  • पूर्व सैनिकों के समर्थन में सहयोग का विस्तार।
  • रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभावों पर ध्यान।

सियोल, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण कोरिया और फ्रांस के रक्षा प्रमुखों ने शुक्रवार को सियोल में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और द्विपक्षीय रक्षा तथा हथियार उद्योग सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। इस बारे में जानकारी दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने दी।

यह बैठक दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक और उनकी फ्रांसीसी समकक्ष कैथरीन वॉट्रिन के बीच हुई, जब दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच शिखर वार्ता सियोल में चल रही थी।

योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आन ग्यू-बैक ने कहा कि दोनों देशों के बीच 140 साल पुराना राजनयिक संबंध है, और उन्होंने कोरियन पेनिनसुला की शांति और स्थिरता में योगदान देने के लिए फ्रांस का धन्यवाद किया।

दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा माहौल में अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कोरियन पेनिनसुला और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए रणनीतिक संचार और समन्वय को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।

आन ग्यू-बैक ने बताया कि उत्तर कोरिया की बढ़ती परमाणु और मिसाइल क्षमताएं और रूस के साथ अवैध सैन्य सहयोग न केवल कोरियाई प्रायद्वीप, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी गंभीर चुनौती हैं। उन्होंने सियोल के प्रयासों के लिए फ्रांस से निरंतर रुचि और समर्थन की मांग की, ताकि कोरियाई प्रायद्वीप का परमाणु निराकरण और स्थायी शांति स्थापित हो सके।

इस बीच, रक्षा प्रमुखों ने यह आकलन किया कि सैन्य प्रशिक्षण और अंतरिक्ष क्षेत्र में उनका सहयोग बढ़ा है, और अन्य सुरक्षा क्षेत्रों में ऐसे सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

उन्होंने यह भी सहमति व्यक्त की कि फ्रांस और दक्षिण कोरिया हथियार उद्योग के साझेदार हैं, दोनों वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम हैं, और इस क्षेत्र में अपने सहयोग को परस्पर पूरक तरीके से बढ़ाने की आवश्यकता है।

इसके अलावा, सियोल की वेटरन्स मिनिस्ट्री ने कहा कि दक्षिण कोरिया और फ्रांस ने शुक्रवार को 1950-53 के कोरियन युद्ध के पूर्व सैनिकों के लिए समर्थन बढ़ाने हेतु एक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

मंत्रालय के अनुसार, पूर्व सैनिक मंत्री क्वोन ओह-यूल और फ्रांस की सशस्त्र सेना की मंत्री कैथरीन वॉट्रिन ने पूर्व सैनिक मामलों पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर समारोह में भाग लिया।

इस समझौते के अंतर्गत दोनों एजेंसियों ने कोरियाई युद्ध में फ्रांस की भागीदारी के रिकॉर्ड को एकत्रित करने और साझा करने, युद्ध पूर्व सैनिकों और शोक संतप्त परिवारों का सम्मान सुनिश्चित करने, और दिवंगत युद्ध पूर्व सैनिकों के लिए एक स्मारक सुविधा स्थापित करने पर सहयोग करने का निर्णय लिया है।

यह समझौता 2023 में पूर्व सैनिक मामलों पर सहयोग के लिए हस्ताक्षरित इरादे के पत्र के बाद आया है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि दक्षिण कोरिया और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाना न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता के लिए भी जरूरी है। दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग का यह स्तर प्रशंसा के योग्य है।
NationPress
05/04/2026

Frequently Asked Questions

दक्षिण कोरिया और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को मजबूत करना और द्विपक्षीय रक्षा तथा हथियार उद्योग में सहयोग बढ़ाना है।
क्या इस बैठक का कोई ऐतिहासिक महत्व है?
हां, यह बैठक 140 साल के राजनयिक संबंधों की पृष्ठभूमि में हुई है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है।
क्या इस सहयोग का प्रभाव कोरियन पेनिनसुला पर पड़ेगा?
यह सहयोग कोरियन पेनिनसुला की शांति और स्थिरता में सकारात्मक योगदान दे सकता है।
क्या उत्तर कोरिया की गतिविधियों पर इस सहयोग का असर होगा?
जी हां, इस सहयोग से उत्तर कोरिया की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं के खिलाफ एक सामूहिक प्रयास किया जा सकता है।
इस समझौते में पूर्व सैनिकों का क्या स्थान है?
समझौते में कोरियाई युद्ध के पूर्व सैनिकों की सहायता का प्रावधान है, जिससे उनके योगदान को मान्यता मिलेगी।
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