कच्छ में ऊंटनी का दूध बना आजीविका का सहारा, सरहद डेयरी दे रही ₹50-55 प्रति लीटर
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के कच्छ क्षेत्र के रेगिस्तानी इलाकों में पशुपालन पर निर्भर सैकड़ों परिवारों के लिए ऊंटनी का दूध अब एक ठोस आजीविका स्रोत के रूप में उभर रहा है। सरहद डेयरी की संगठित खरीद प्रणाली के ज़रिये ऊंट पालकों को ₹50 से ₹55 प्रति लीटर की दर से भुगतान मिल रहा है — जो पहले की तुलना में कहीं बेहतर है। राज्य सरकार की नवोन्मेषी योजनाओं ने इस बदलाव को संभव बनाया है।
सरहद डेयरी की भूमिका
सरहद डेयरी देश की अपनी तरह की पहली डेयरी है जो ऊंटनी का दूध खरीदने के साथ-साथ उससे पनीर, आइसक्रीम और तरल दूध जैसे उत्पाद भी तैयार करती है। इस संगठित ढाँचे से पहले ऊंट पालकों को दूध बेचने और भुगतान पाने दोनों में कठिनाई होती थी, क्योंकि उनका कोई स्थायी ठिकाना नहीं होता और वे चारे की तलाश में भटकते रहते हैं। डेयरी ने इस समस्या को सुलझाते हुए एक सुगम संग्रह प्रणाली स्थापित की है।
दूध खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि
वर्ष 2025-26 में सरहद डेयरी ने औसतन 5,158 लीटर दूध प्रतिदिन खरीदा, जबकि 2024-25 में यह आँकड़ा 4,754 लीटर प्रतिदिन था। भुगतान के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है — 2024-25 में ऊंट पालकों को लगभग ₹8.72 करोड़ का भुगतान किया गया, जो 2025-26 में बढ़कर लगभग ₹9.60 करोड़ हो गया है। यह वृद्धि इस पहल की बढ़ती स्वीकार्यता और माँग दोनों को दर्शाती है।
पालकों की आवाज़
ऊंट पालक आशाभाई रबारी के शब्दों में, 'पहले हमारा जीवन बहुत कठिन था। सरकार के सहयोग और दुग्ध संघ के मार्गदर्शन के कारण हमारे ऊंटों की जान बच गई; अन्यथा कोई हमारी परवाह नहीं करता। अब जीवन बहुत आसान हो गया है।' एक अन्य पालक देवभाई रबारी ने बताया, 'अब हम ऊंटनी का दूध डेयरी को भेजते हैं, जिसके बदले हमें ₹50 प्रति लीटर मिलते हैं।' गौरतलब है कि पहले यही दूध बहुत कम दामों पर बिकता था और कोई संगठित खरीदार नहीं था।
ऊंटनी के दूध का औषधीय महत्त्व
ऊंटनी के दूध को अक्सर 'सुपरफूड' की संज्ञा दी जाती है। इसे टीबी, मधुमेह, ऑटिज्म और एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों में फायदेमंद माना जाता है। देश और विदेश दोनों बाज़ारों में इसकी माँग लगातार बढ़ रही है, जिससे इस उत्पाद की व्यावसायिक संभावनाएँ और विस्तृत हो रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कच्छ के पशुपालक समुदाय को टिकाऊ आजीविका के नए विकल्पों की सख्त ज़रूरत थी।
आगे की राह
सरहद डेयरी की यह पहल कच्छ के पशुपालक परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यदि दूध खरीद का यही रुझान जारी रहा और नए उत्पादों की माँग बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में यह मॉडल राज्य के अन्य पशुपालक समुदायों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है।