आविन दूध खरीद मूल्य विवाद: तमिलनाडु के डेयरी किसान ₹34 से ₹50 प्रति लीटर की मांग पर अड़े
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के डेयरी किसानों ने राज्य सरकार की प्रमुख सहकारी संस्था आविन के दूध खरीद मूल्य में तत्काल बढ़ोतरी की मांग की है। किसानों का कहना है कि ₹34 प्रति लीटर की मौजूदा सरकारी खरीद दर और निजी डेयरी कंपनियों द्वारा दी जा रही ₹50 प्रति लीटर की दर के बीच बढ़ते अंतर के कारण सहकारी नेटवर्क से उनका मोहभंग हो रहा है। 20 जुलाई को सामने आई इस मांग के पीछे बढ़ती उत्पादन लागत और चरागाहों की घटती उपलब्धता को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
किसान संगठनों के अनुसार, आविन वर्तमान में औसतन ₹34 प्रति लीटर की दर से दूध खरीद रही है। इसके विपरीत, कई निजी डेयरी कंपनियाँ ₹50 प्रति लीटर तक का भुगतान कर रही हैं। कुछ किसान सीधे घरों में दूध बेचकर ₹62 प्रति लीटर तक की कमाई कर रहे हैं। इस मूल्य अंतर के कारण बड़ी संख्या में दूध उत्पादक आविन की सहकारी समितियों से दूरी बना रहे हैं, जिससे आविन को मिलने वाले दूध की कुल मात्रा में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है।
उत्पादन लागत में वृद्धि की असली वजह
किसानों ने बताया कि पहले गाँवों में मवेशी सामूहिक चरागाहों पर चरते थे, जिससे चारे पर होने वाला खर्च न्यूनतम रहता था। अब चरागाहों की भारी कमी के कारण किसानों को पूरे वर्ष हरा चारा बाज़ार से खरीदना पड़ता है। इसके अलावा पशुओं की बीमारी से होने वाली मौतें और दूध उत्पादन में अनिश्चितता भी किसानों की आय को प्रभावित कर रही है। किसानों के अनुसार, मौजूदा खरीद मूल्य से केवल उत्पादन लागत की भरपाई हो पाती है — शुद्ध आय नगण्य या शून्य रह जाती है।
आविन और सहकारी नेटवर्क पर असर
आविन दशकों से तमिलनाडु के डेयरी किसानों के लिए एक भरोसेमंद और स्थिर बाज़ार की भूमिका निभाती रही है। राज्यभर में फैली सहकारी समितियों के व्यापक नेटवर्क के ज़रिए यह संस्था किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सेतु का काम करती है। लेकिन किसानों का निजी खरीदारों और सीधी बिक्री की ओर बढ़ता रुझान आविन की दूध संग्रह क्षमता को कमज़ोर कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में दूध की माँग स्थिर बनी हुई है।
किसान संगठनों की मांगें
किसान संगठनों ने तमिलनाडु सरकार से माँग की है कि आविन का दूध खरीद मूल्य निजी डेयरी कंपनियों की दरों के बराबर किया जाए। उनका तर्क है कि बेहतर खरीद मूल्य मिलने से तीन लक्ष्य एक साथ हासिल होंगे — किसान दोबारा सहकारी नेटवर्क से जुड़ेंगे, आविन की दूध संग्रह व्यवस्था मज़बूत होगी और पूरे तमिलनाडु में उपभोक्ताओं के लिए दूध की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। गौरतलब है कि कई किसानों ने पहले ही दूध देने वाले पशुओं की संख्या कम कर दी है, जबकि कुछ ने डेयरी व्यवसाय पूरी तरह छोड़ दिया है।
आगे क्या होगा
अभी तक तमिलनाडु सरकार की ओर से खरीद मूल्य संशोधन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि सरकार इस माँग पर ध्यान नहीं देती, तो आलोचकों का कहना है कि आविन के सहकारी नेटवर्क से और अधिक किसानों का पलायन हो सकता है, जो दीर्घकालिक रूप से राज्य में दूध आपूर्ति की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है।