21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आविन दूध खरीद मूल्य विवाद: तमिलनाडु के डेयरी किसान ₹34 से ₹50 प्रति लीटर की मांग पर अड़े

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आविन दूध खरीद मूल्य विवाद: तमिलनाडु के डेयरी किसान ₹34 से ₹50 प्रति लीटर की मांग पर अड़े

सारांश

तमिलनाडु में आविन और निजी डेयरी कंपनियों के खरीद मूल्य के बीच ₹16 प्रति लीटर का अंतर किसानों को सहकारी नेटवर्क से दूर कर रहा है। चरागाहों की कमी और बढ़ती लागत के बीच डेयरी खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है।

मुख्य बातें

आविन वर्तमान में ₹34 प्रति लीटर की दर से दूध खरीद रही है, जबकि निजी डेयरी कंपनियाँ ₹50 प्रति लीटर तक दे रही हैं।
सीधी घरेलू बिक्री में किसानों को ₹62 प्रति लीटर तक मिल रहा है — आविन दर से लगभग दोगुना।
चरागाहों की कमी के कारण किसानों को पूरे वर्ष हरा चारा खरीदना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई है।
कई किसानों ने दूध देने वाले पशुओं की संख्या घटाई; कुछ ने डेयरी व्यवसाय पूरी तरह छोड़ दिया ।
किसान संगठनों ने तमिलनाडु सरकार से आविन की खरीद दरें निजी कंपनियों के बराबर करने की माँग की है।

तमिलनाडु के डेयरी किसानों ने राज्य सरकार की प्रमुख सहकारी संस्था आविन के दूध खरीद मूल्य में तत्काल बढ़ोतरी की मांग की है। किसानों का कहना है कि ₹34 प्रति लीटर की मौजूदा सरकारी खरीद दर और निजी डेयरी कंपनियों द्वारा दी जा रही ₹50 प्रति लीटर की दर के बीच बढ़ते अंतर के कारण सहकारी नेटवर्क से उनका मोहभंग हो रहा है। 20 जुलाई को सामने आई इस मांग के पीछे बढ़ती उत्पादन लागत और चरागाहों की घटती उपलब्धता को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

किसान संगठनों के अनुसार, आविन वर्तमान में औसतन ₹34 प्रति लीटर की दर से दूध खरीद रही है। इसके विपरीत, कई निजी डेयरी कंपनियाँ ₹50 प्रति लीटर तक का भुगतान कर रही हैं। कुछ किसान सीधे घरों में दूध बेचकर ₹62 प्रति लीटर तक की कमाई कर रहे हैं। इस मूल्य अंतर के कारण बड़ी संख्या में दूध उत्पादक आविन की सहकारी समितियों से दूरी बना रहे हैं, जिससे आविन को मिलने वाले दूध की कुल मात्रा में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है।

उत्पादन लागत में वृद्धि की असली वजह

किसानों ने बताया कि पहले गाँवों में मवेशी सामूहिक चरागाहों पर चरते थे, जिससे चारे पर होने वाला खर्च न्यूनतम रहता था। अब चरागाहों की भारी कमी के कारण किसानों को पूरे वर्ष हरा चारा बाज़ार से खरीदना पड़ता है। इसके अलावा पशुओं की बीमारी से होने वाली मौतें और दूध उत्पादन में अनिश्चितता भी किसानों की आय को प्रभावित कर रही है। किसानों के अनुसार, मौजूदा खरीद मूल्य से केवल उत्पादन लागत की भरपाई हो पाती है — शुद्ध आय नगण्य या शून्य रह जाती है।

आविन और सहकारी नेटवर्क पर असर

आविन दशकों से तमिलनाडु के डेयरी किसानों के लिए एक भरोसेमंद और स्थिर बाज़ार की भूमिका निभाती रही है। राज्यभर में फैली सहकारी समितियों के व्यापक नेटवर्क के ज़रिए यह संस्था किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सेतु का काम करती है। लेकिन किसानों का निजी खरीदारों और सीधी बिक्री की ओर बढ़ता रुझान आविन की दूध संग्रह क्षमता को कमज़ोर कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में दूध की माँग स्थिर बनी हुई है।

किसान संगठनों की मांगें

किसान संगठनों ने तमिलनाडु सरकार से माँग की है कि आविन का दूध खरीद मूल्य निजी डेयरी कंपनियों की दरों के बराबर किया जाए। उनका तर्क है कि बेहतर खरीद मूल्य मिलने से तीन लक्ष्य एक साथ हासिल होंगे — किसान दोबारा सहकारी नेटवर्क से जुड़ेंगे, आविन की दूध संग्रह व्यवस्था मज़बूत होगी और पूरे तमिलनाडु में उपभोक्ताओं के लिए दूध की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। गौरतलब है कि कई किसानों ने पहले ही दूध देने वाले पशुओं की संख्या कम कर दी है, जबकि कुछ ने डेयरी व्यवसाय पूरी तरह छोड़ दिया है।

आगे क्या होगा

अभी तक तमिलनाडु सरकार की ओर से खरीद मूल्य संशोधन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि सरकार इस माँग पर ध्यान नहीं देती, तो आलोचकों का कहना है कि आविन के सहकारी नेटवर्क से और अधिक किसानों का पलायन हो सकता है, जो दीर्घकालिक रूप से राज्य में दूध आपूर्ति की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो किसानों का सहकारी संस्था से मोहभंग स्वाभाविक है, लेकिन इसका दीर्घकालिक नुकसान उपभोक्ताओं को भी उठाना पड़ सकता है — खासकर उन्हें जो किफायती और नियमित दूध आपूर्ति के लिए आविन पर निर्भर हैं। सरकार के सामने असली चुनौती यह है कि खरीद मूल्य बढ़ाए बिना आविन का घाटा नहीं बढ़ेगा, और बढ़ाने पर उपभोक्ता कीमतों पर दबाव आएगा — यह दुविधा नीतिगत साहस माँगती है, जिसका अभी अभाव दिखता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आविन का दूध खरीद मूल्य अभी कितना है और किसान क्या माँग रहे हैं?
आविन वर्तमान में औसतन ₹34 प्रति लीटर की दर से दूध खरीद रही है। किसान संगठनों की माँग है कि यह दर निजी डेयरी कंपनियों के बराबर यानी कम से कम ₹50 प्रति लीटर की जाए।
तमिलनाडु के डेयरी किसान आविन से क्यों दूर हो रहे हैं?
निजी डेयरी कंपनियाँ ₹50 और सीधी घरेलू बिक्री में ₹62 प्रति लीटर तक दे रही हैं, जबकि आविन केवल ₹34 देती है। इस बड़े मूल्य अंतर के कारण किसान अधिक आय के लिए वैकल्पिक चैनलों की ओर जा रहे हैं।
डेयरी किसानों की उत्पादन लागत इतनी क्यों बढ़ गई है?
चरागाहों की कमी के कारण किसानों को अब पूरे वर्ष बाज़ार से हरा चारा खरीदना पड़ता है, जो पहले मुफ्त में उपलब्ध होता था। पशुओं की बीमारी से होने वाली मौतें और दूध उत्पादन में अनिश्चितता भी लागत बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
आविन क्या है और तमिलनाडु में इसकी भूमिका क्या है?
आविन तमिलनाडु सरकार की प्रमुख डेयरी सहकारी संस्था है, जो राज्यभर में सहकारी समितियों के नेटवर्क के ज़रिए किसानों से दूध खरीदती है और उपभोक्ताओं तक पहुँचाती है। दशकों से यह संस्था किसानों को एक स्थिर और भरोसेमंद बाज़ार उपलब्ध कराती रही है।
खरीद मूल्य न बढ़ने से तमिलनाडु में दूध आपूर्ति पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि किसानों का आविन नेटवर्क से पलायन जारी रहा, तो राज्य में दूध की संगठित आपूर्ति कमज़ोर हो सकती है। इससे उन उपभोक्ताओं पर सबसे अधिक असर पड़ेगा जो किफायती दरों पर नियमित दूध के लिए आविन पर निर्भर हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले