केरल में चुनाव बाद बिजली कटौती लौटी, दूध ₹52 से ₹56 प्रति लीटर होने की तैयारी
सारांश
Key Takeaways
- केरल में मंगलवार से आधे घंटे की लोड शेडिंग लागू, हाल के वर्षों में पहली नियमित बिजली कटौती।
- मिल्मा ने दूध की कीमत ₹52 से बढ़ाकर ₹56 प्रति लीटर करने का प्रस्ताव तैयार किया।
- दोनों बदलाव 9 अप्रैल के मतदान के कुछ दिनों बाद, आचार संहिता 6 मई तक लागू।
- मूल्य वृद्धि के लिए मिल्मा को चुनाव आयोग (ECI) की अनुमति लेनी होगी।
- मिल्मा 3,102 सोसायटियों के ज़रिए 10.6 लाख से अधिक डेयरी किसानों से जुड़ी है।
- एलडीएफ ने चुनाव प्रचार में बिजली कटौती न होना और स्थिर कीमतें अपनी प्रमुख उपलब्धि बताई थीं।
केरल में 9 अप्रैल को हुए मतदान के महज कुछ दिनों बाद दो बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के चुनावी दावों पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। तिरुवनंतपुरम से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य में मंगलवार से आधे घंटे की लोड शेडिंग लागू कर दी गई है और मिल्मा ने दूध की कीमत ₹52 से बढ़ाकर ₹56 प्रति लीटर करने का प्रस्ताव तैयार किया है। हाल के वर्षों में यह पहला अवसर है जब केरल में इस तरह की नियमित बिजली कटौती की गई है।
बिजली कटौती का ताज़ा घटनाक्रम
राज्य में मंगलवार से आधे घंटे की लोड शेडिंग लागू की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने बिना बिजली कटौती के निर्बाध आपूर्ति को अपनी प्रमुख प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में पेश किया था। गौरतलब है कि वाम मोर्चे ने लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का दावा करते हुए अपने शासन मॉडल को एक मिसाल बताया था।
दूध की कीमत बढ़ाने का प्रस्ताव
बिजली कटौती की घोषणा के 48 घंटे के भीतर, केरल को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (मिल्मा) ने दूध की कीमत ₹52 से बढ़ाकर ₹56 प्रति लीटर करने का फैसला लिया। मिल्मा के चेयरमैन के अनुसार, यह प्रस्ताव पिनराई विजयन सरकार को भेजा जाएगा। हालाँकि, वर्तमान में आचार संहिता 6 मई तक लागू है, इसलिए कीमत बढ़ाने के लिए मिल्मा को चुनाव आयोग (ECI) से अनुमति लेनी होगी।
मिल्मा: केरल की सहकारी डेयरी संस्था
मिल्मा की स्थापना 1980 में 'ऑपरेशन फ्लड' के तहत की गई थी। यह तीन-स्तरीय सहकारी संस्था आज 3,102 सोसायटियों के माध्यम से 10.6 लाख से अधिक डेयरी किसानों से जुड़ी है। तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम और मालाबार में इसके क्षेत्रीय यूनियन सक्रिय हैं। यह संस्था केरल की डेयरी आत्मनिर्भरता और सहकारी मॉडल की सफलता का प्रतीक मानी जाती है।
राजनीतिक हलचल और असर
इन दोनों फैसलों ने राज्य में राजनीतिक बहस तेज कर दी है। एलडीएफ ने चुनाव प्रचार के दौरान बिजली कटौती का न होना और जरूरी वस्तुओं की स्थिर कीमतें — दोनों को प्रशासनिक कुशलता का प्रमाण बताया था। ऐसे में चुनाव नतीजों से पहले इन बदलावों ने राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया है, क्योंकि ये सीधे उन वादों से टकराते हैं जिन्हें मतदाताओं के सामने रखा गया था।
आगे क्या होगा
मिल्मा के दूध मूल्य वृद्धि प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय चुनाव आयोग की स्वीकृति पर निर्भर करेगा, जो 6 मई तक आचार संहिता लागू रहने के कारण अनिवार्य है। बिजली कटौती की अवधि और विस्तार को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक समयसीमा नहीं बताई गई है। चुनाव परिणामों के बाद नई सरकार के सामने इन दोनों मुद्दों पर जनता को जवाब देने की चुनौती होगी।