वंदे भारत एक्सप्रेस का जम्मू तवी तक विस्तार: 30 अप्रैल को रेल मंत्री वैष्णव दिखाएंगे हरी झंडी, 2 मई से नियमित सेवा

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वंदे भारत एक्सप्रेस का जम्मू तवी तक विस्तार: 30 अप्रैल को रेल मंत्री वैष्णव दिखाएंगे हरी झंडी, 2 मई से नियमित सेवा

सारांश

वंदे भारत एक्सप्रेस अब सिर्फ कटरा तक नहीं — सीधे जम्मू तवी तक। 20 कोच, दो जोड़ी ट्रेनें और बिना ट्रेन बदले वैष्णो देवी से अमरनाथ तक की यात्रा। 30 अप्रैल को रेल मंत्री वैष्णव हरी झंडी दिखाएंगे और 2 मई से यह सेवा लाखों तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की ज़िंदगी बदल देगी।

Key Takeaways

  • रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 30 अप्रैल 2026 को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन से विस्तारित वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे।
  • ट्रेन में 8 से बढ़ाकर 20 कोच किए गए; नियमित सेवा 2 मई से शुरू होगी।
  • कॉरिडोर पर दो जोड़ी ट्रेनें चलेंगी, जो लगभग 266 किमी की दूरी तय करेंगी।
  • यात्री अब जम्मू तवी से बिना ट्रेन बदले सीधे कटरा और श्रीनगर तक पहुंच सकेंगे।
  • ₹43,780 करोड़ की लागत से बने यूएसबीआरएल में 36 सुरंगें और 943 पुल शामिल हैं।
  • वंदे भारत -20 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में चलने में सक्षम — सर्दियों में राजमार्ग बंद होने पर जीवन रेखा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 30 अप्रैल 2026 को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन से विस्तारित जम्मू तवी-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन, जो पहले श्रीनगर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक संचालित होती थी, अब जम्मू तवी तक विस्तारित हो गई है। 2 मई से यह ट्रेन नियमित सेवा में आ जाएगी और कॉरिडोर पर दो जोड़ी ट्रेनें लगभग 266 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी।

विस्तार की पृष्ठभूमि और कोच में बदलाव

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को कटरा-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी, तब इसमें 8 डिब्बे थे। तब से यह ट्रेन लगातार पूरी क्षमता से चल रही है और यात्रियों की ओर से इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। अब ट्रेन में 20 कोच जोड़े गए हैं, जिससे बैठने की क्षमता एक झटके में दोगुनी से अधिक हो जाएगी। तीर्थयात्रा और पर्यटन के व्यस्त मौसम में आरक्षण और प्रतीक्षा सूची पर दबाव काफी कम होगा।

ट्रेन का समय-सारणी

पहली जोड़ी में ट्रेन संख्या 26401 जम्मू तवी से सुबह 6:20 बजे प्रस्थान करेगी और श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा, रियासी तथा बनिहाल में रुकते हुए सुबह 11:10 बजे श्रीनगर पहुंचेगी — यात्रा अवधि चार घंटे पचास मिनट। वापसी में ट्रेन संख्या 26402 श्रीनगर से दोपहर 2:00 बजे चलेगी और शाम 6:50 बजे जम्मू तवी पहुंचेगी। यह जोड़ी मंगलवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलेगी।

दूसरी जोड़ी में ट्रेन संख्या 26404 श्रीनगर से सुबह 8:00 बजे रवाना होगी और बनिहालकटरा में रुकते हुए दोपहर 12:40 बजे जम्मू तवी पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 26403 जम्मू तवी से दोपहर 1:20 बजे चलेगी और शाम 6:00 बजे श्रीनगर पहुंचेगी। यह जोड़ी बुधवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलेगी।

तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को फायदा

अब तक जम्मू तवी से आने वाले तीर्थयात्रियों को कटरा में ट्रेन बदलनी पड़ती थी या अलग से सड़क परिवहन की व्यवस्था करनी पड़ती थी। इस विस्तार के बाद यात्री सीधे जम्मू तवी से वंदे भारत में सवार होकर बिना ट्रेन बदले वैष्णो देवी बेस कैंप कटरा और श्रीनगर तक पहुंच सकेंगे। वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा को एक साथ जोड़ने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरा तीर्थयात्रा मार्ग अब एक ही निर्बाध रेल यात्रा में पूरा किया जा सकता है।

भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक अब जम्मू तवी स्टेशन से सवार होकर चिनाब पुल और अंजी खड्ड पुल जैसी विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग कृतियों को देखते हुए, हिमालय की सुरंगों से गुजरते हुए सीधे डल झील और मुगल गार्डन तक पहुंच सकेंगे। राजमार्ग बंद होने या मौसम की बाधाओं की चिंता अब नहीं रहेगी।

इंजीनियरिंग संरचनाओं का निरीक्षण

हरी झंडी दिखाने के बाद रेल मंत्री वैष्णव उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) की दो प्रमुख संरचनाओं का निरीक्षण करेंगे। अंजी खड्ड पुल भारत का पहला केबल-स्टे रेलवे पुल है, जो अंजी नदी घाटी से 331 मीटर ऊपर स्थित है और 96 उच्च-तन्यता वाले केबलों द्वारा स्थिर है। चिनाब रेल पुल नदी तल से 359 मीटर ऊपर स्थित विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे मेहराब पुल है — यह एफिल टॉवर से भी ऊंचा है।

₹43,780 करोड़ की कुल लागत से निर्मित यूएसबीआरएल में 119 किलोमीटर में फैली 36 सुरंगें और 943 पुल हैं। 272 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की बदौलत ही विस्तारित वंदे भारत सेवा संभव हो पाई है।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और स्थानीय जनता पर असर

कश्मीर की अर्थव्यवस्था पश्मीना शॉल, अखरोट की लकड़ी की नक्काशी, हाथ से बुने कालीन और केसर जैसे हस्तशिल्प पर टिकी है। एक तेज और विश्वसनीय रेल संपर्क व्यापार की लागत और समय दोनों घटाएगा। श्रीनगर से जम्मू जाने वाले छात्र, सरकारी अधिकारी, मरीज और व्यापारी — सभी के लिए कटरा में बाधित यात्रा की समस्या अब समाप्त हो गई है। सर्दियों में जब जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग भारी बर्फबारी से अवरुद्ध रहता है, तब -20 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में चलने के लिए डिज़ाइन की गई यह ट्रेन एक विश्वसनीय जीवन रेखा बनेगी।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा परिचालन निरंतरता की है। यूएसबीआरएल कॉरिडोर पर सुरंगों और पुलों की जटिल इंजीनियरिंग के बावजूद, सर्दियों में हिमस्खलन और भूकंपीय गतिविधि के कारण रेल संचालन पर पड़ने वाले प्रभाव की अभी पूरी तरह जांच नहीं हुई है। 20 कोच की क्षमता वृद्धि माँग के अनुरूप है, परंतु स्टेशन अवसंरचना — विशेषकर कटरा और बनिहाल में — इस बढ़ी हुई भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त है या नहीं, यह सवाल अनुत्तरित है। कश्मीरी हस्तशिल्प व्यापारियों और तीर्थयात्रियों के लिए यह सेवा वरदान है, लेकिन किराया सुलभता और मालवाहक सुविधाओं का विस्तार किए बिना इसका आर्थिक लाभ सीमित रहेगा।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

विस्तारित जम्मू तवी-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस कब से चलेगी?
हरी झंडी 30 अप्रैल 2026 को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव दिखाएंगे, लेकिन नियमित सेवा 2 मई 2026 से शुरू होगी। कॉरिडोर पर दो जोड़ी ट्रेनें लगभग 266 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी।
वंदे भारत एक्सप्रेस में कितने कोच जोड़े गए हैं?
ट्रेन में पहले 8 कोच थे, जिन्हें बढ़ाकर अब 20 कोच कर दिया गया है। इससे बैठने की क्षमता दोगुनी से अधिक हो गई है और तीर्थयात्रा व पर्यटन सीजन में प्रतीक्षा सूची का दबाव कम होगा।
जम्मू तवी-श्रीनगर वंदे भारत का समय क्या है?
ट्रेन 26401 जम्मू तवी से सुबह 6:20 बजे चलकर सुबह 11:10 बजे श्रीनगर पहुंचती है। ट्रेन 26404 श्रीनगर से सुबह 8:00 बजे चलकर दोपहर 12:40 बजे जम्मू तवी पहुंचती है। दोनों जोड़ियां सप्ताह में छह दिन चलती हैं।
इस विस्तार से वैष्णो देवी तीर्थयात्रियों को क्या फायदा होगा?
अब तीर्थयात्री जम्मू तवी से सीधे वंदे भारत में बैठकर बिना ट्रेन बदले कटरा (वैष्णो देवी बेस कैंप) और श्रीनगर तक पहुंच सकते हैं। वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा को जोड़ने वाले श्रद्धालु अब पूरा तीर्थयात्रा मार्ग एक ही निर्बाध रेल यात्रा में पूरा कर सकते हैं।
चिनाब पुल और अंजी खड्ड पुल क्यों खास हैं?
चिनाब रेल पुल नदी तल से 359 मीटर ऊपर स्थित विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे मेहराब पुल है — यह एफिल टॉवर से भी ऊंचा है। अंजी खड्ड पुल भारत का पहला केबल-स्टे रेलवे पुल है, जो 331 मीटर की ऊंचाई पर 96 उच्च-तन्यता वाले केबलों द्वारा स्थिर है। दोनों ₹43,780 करोड़ की यूएसबीआरएल परियोजना की रीढ़ हैं।
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