जलूद सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन: CM मोहन यादव बोले — '₹271 करोड़ की यह परियोजना राष्ट्रीय उपलब्धि है'
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 29 अप्रैल 2026 को खरगोन जिले के जलूद (महेश्वर के समीप) में स्थित 60 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन किया और इसे 'राष्ट्रीय उपलब्धि' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए स्वच्छ ऊर्जा और जनभागीदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत निर्मित इस संयंत्र की कुल लागत लगभग ₹271 करोड़ है। इसकी सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसे ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से वित्त पोषित किया गया है, जिससे आम नागरिकों को सीधे इस परियोजना में निवेश करने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री यादव ने इसे अपनी तरह का देश का पहला ऐसा संयंत्र बताया, जिसका श्रेय मध्य प्रदेश को जाता है।
नागरिक निवेश और रिटर्न
ग्रीन बॉन्ड योजना के तहत कोई भी नागरिक ₹1 लाख के अधिकतम 10 बॉन्ड तक खरीद सकता है। यादव के अनुसार, इन बॉन्डों पर 20 वर्षों में लगभग 8 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न मिलने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, आवश्यकता पड़ने पर इन बॉन्डों को बेचा भी जा सकता है, जो इन्हें एक लचीला निवेश विकल्प बनाता है।
बिजली आपूर्ति और पर्यावरणीय लाभ
यह संयंत्र इंदौर नगर निगम को बिजली की आपूर्ति करेगा और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना बिजली उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण, दोनों मोर्चों पर लाभकारी है और हरित ऊर्जा क्षेत्र में इसे सर्वश्रेष्ठ मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना की लागत 10 वर्षों के भीतर वसूल होने की उम्मीद है, जिसके बाद यह लाभ उत्पन्न करने लगेगी।
मध्य प्रदेश का ऊर्जा सफर
यादव ने राज्य के बिजली क्षेत्र में हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश बिजली की कमी से उबरकर अब किफायती बिजली उपलब्ध कराने की स्थिति में पहुँच चुका है। गौरतलब है कि इस परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में रखी थी, और अब इसका उद्घाटन राज्य सरकार की कार्यान्वयन क्षमता को रेखांकित करता है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें अक्षय ऊर्जा के लक्ष्यों को तेज़ी से हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं। जलूद संयंत्र का ग्रीन बॉन्ड मॉडल यदि सफल रहा, तो यह अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय टेम्पलेट बन सकता है और सौर ऊर्जा परियोजनाओं में जन-वित्तपोषण की नई संभावनाएँ खोल सकता है।