बलोच नेता की ट्रंप से अपील: सुराब हवाई हमले में 30+ नागरिकों की मौत, पाकिस्तान से माँगा जाए जवाब
सारांश
मुख्य बातें
बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने 19 अगस्त 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर माँग की है कि वे बलूचिस्तान के सुराब में पाकिस्तानी वायु सेना द्वारा किए गए कथित हवाई हमलों की जाँच कराएँ और जवाबदेही तय करें। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 30 से अधिक आम नागरिकों की मौत कथित तौर पर हुई बताई जाती है।
मुख्य घटनाक्रम
यह घटना 12 अगस्त की सुबह हुई, जब कथित तौर पर पाकिस्तानी वायु सेना ने सुराब के गिदार इलाके में रिहायशी क्षेत्रों पर बमबारी की। बलोच कार्यकर्ताओं के अनुसार इस हमले में भारी जन-धन की हानि हुई और पूरा गाँव प्रभावित हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों और बलोच सशस्त्र समूहों के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है।
तारा चंद की ट्रंप से माँगें
अपने पत्र में तारा चंद ने अमेरिकी प्रशासन से कई ठोस कदमों की माँग की। उन्होंने लिखा, 'हम सम्मानपूर्वक आपके प्रशासन से आग्रह करते हैं कि वह इन गंभीर आरोपों की जाँच करे और यह पता लगाए कि क्या इस कथित ऑपरेशन में अमेरिका में बने किसी विमान, हथियार, ड्रोन, टेक्नोलॉजी, पुर्जों या अन्य सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया गया था।'
चंद ने यह भी माँग की कि पाकिस्तान को सप्लाई किए गए अमेरिकी रक्षा उपकरणों के 'एंड-यूज' (अंतिम उपयोग) की उचित समीक्षा हो। साथ ही, यदि अमेरिकी हथियार हस्तांतरण की शर्तों का उल्लंघन साबित हो, तो किसी निष्पक्ष एजेंसी से जाँच कराई जाए और संबंधित सैन्य सहायता की समीक्षा की जाए।
पत्र में भावनात्मक अपील करते हुए कहा गया, 'राष्ट्रपति, बलोच बच्चे की जान भी दुनिया के किसी भी बच्चे की जान जितनी ही कीमती है। हम अमेरिका से सबूतों के बारे में पहले से कोई राय बनाने के लिए नहीं कह रहे हैं — हम आपके प्रशासन से सच्चाई का पता लगाने, नागरिकों की सुरक्षा करने और जवाबदेही तय करने के लिए कह रहे हैं।'
पाकिस्तान का आधिकारिक पक्ष और उस पर विवाद
पाकिस्तानी सशस्त्र बलों की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक ने सुराब की घटना को एक आतंकवादी समूह से जुड़े 'व्हीकल-बॉर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस' (VBIED) के समय से पहले फटने का नतीजा बताया। हालाँकि, बलोच कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने इस बयान को 'झूठा और मनगढ़ंत' करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया।
बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा: 'डीजी ISPR, जो पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक प्रवक्ता के तौर पर काम करता है, लंबे समय से विवादित सैन्य अभियानों के बारे में अपने गुमराह करने वाले और मनगढ़ंत बयानों को लेकर कड़ी आलोचना का सामना कर रहा है।' उन्होंने आगे आरोप लगाया कि 'सुराब नरसंहार सामूहिक सजा देने की एक सोची-समझी कार्रवाई थी।'
बलोच समुदाय का पक्ष
सुराब के स्थानीय निवासियों और बलोच कार्यकर्ताओं का दावा है कि पाकिस्तान वायु सेना ने अँधेरे की आड़ में जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बनाया, जिससे पूरा गाँव बुरी तरह प्रभावित हुआ। गौरतलब है कि बलूचिस्तान में इस तरह के आरोप नए नहीं हैं — मानवाधिकार संगठन वर्षों से इस क्षेत्र में नागरिकों पर अत्याचार के दस्तावेज जमा करते रहे हैं।
तारा चंद ने अपने पत्र में यह भी कहा कि वे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने और अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार हैं, ताकि जाँच में सहयोग किया जा सके।
आगे क्या होगा
अमेरिकी प्रशासन की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका-पाकिस्तान संबंध पहले से ही कई मोर्चों पर जटिल दौर से गुजर रहे हैं। बलोच समुदाय को उम्मीद है कि अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्य भी इस मुद्दे पर सवाल उठाएँगे।