12 अगस्त 2026
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बलूचिस्तान के सुराब में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक: 30 से अधिक नागरिकों की मौत, महिलाएँ-बच्चे भी शामिल

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बलूचिस्तान के सुराब में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक: 30 से अधिक नागरिकों की मौत, महिलाएँ-बच्चे भी शामिल

सारांश

बलूचिस्तान के सुराब में पाकिस्तानी वायु सेना के कथित हवाई हमले ने 30 से अधिक नागरिकों की जान ली — महिलाएँ और बच्चे भी शामिल। अस्पतालों की घेराबंदी और मीडिया पर पाबंदी के आरोपों के बीच बलूच संगठनों ने इसे 'नरसंहार' बताते हुए संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

मुख्य बातें

पाकिस्तानी वायु सेना ने 12 अगस्त 2026 को बलूचिस्तान के सुराब जिले के गिदर इलाके में हवाई हमला किया।
कथित तौर पर महिलाओं और बच्चों समेत 30 से अधिक नागरिक मारे गए, कई घायल।
मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच के अनुसार, अस्पतालों को सेना ने घेरा और मेडिकल स्टाफ को इलाज से रोका गया।
बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की नेता सबिहा बलूच ने हमले को 'नरसंहार' बताया।
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने संयुक्त राष्ट्र , अमेरिका , यूके और यूरोपीय संघ से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
पाकिस्तानी सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

पाकिस्तानी वायु सेना ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को बलूचिस्तान के सुराब जिले के गिदर इलाके में हवाई हमला किया, जिसमें कथित तौर पर महिलाओं और बच्चों समेत 30 से अधिक नागरिक मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनों ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए तत्काल अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग की है।

हमले का विवरण

मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने स्थानीय रिपोर्टों के हवाले से बताया कि पाकिस्तानी वायु सेना ने सुराब के गिदर इलाके में आम नागरिकों के आवासीय क्षेत्रों पर 'जबरदस्त बमबारी' की, जिससे नागरिक हताहत हुए और संपत्तियों को भारी नुकसान पहुँचा। उन्होंने यह भी बताया कि ड्रोन और कोबरा गनशिप हेलीकॉप्टर इलाके के आसमान में लगातार गश्त कर रहे हैं।

चिकित्सा सहायता पर कथित रोक

मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'इन रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाँ बम बरसाए गए वहाँ के अस्पतालों को सेना ने घेर रखा है। ये लोग चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ को डरा-धमका कर पीड़ितों का इलाज करने से रोक रहे हैं। रिपोर्ट्स से यह भी पता चला है कि कुछ लोगों की मौत समय पर इलाज न मिल पाने की वजह से हुई।' यह आरोप, यदि सत्य हैं, तो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

बलूच संगठनों की प्रतिक्रिया

बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की नेता सबिहा बलूच ने इस हमले को 'नरसंहार' करार दिया। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'वो इलाका पाकिस्तानी सेना से घिरा हुआ है। बचाव टीम, मेडिकल स्टाफ, एम्बुलेंस और पत्रकारों के आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई है। मानवीय मदद और स्वतंत्र दस्तावेजीकरण होने देने से रोकना गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है और इस पर तुरंत अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ध्यान देने की जरूरत है।' सबिहा ने पत्रकारों, मेडिकल टीमों, मानवीय संगठनों और वैश्विक समुदाय से पीड़ितों तक तत्काल सहायता पहुँचाने की अपील की।

अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग

मानवाधिकार संस्था बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने इस घटना की तत्काल, स्वतंत्र, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में जाँच की माँग की। संगठन ने कहा, 'मारे गए और घायल हुए लोगों की पहचान और जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, और जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आम लोगों — खासकर महिलाओं और बच्चों — की सुरक्षा करना देश की बुनियादी जिम्मेदारी है।'

BVJ ने संयुक्त राष्ट्र, यूएन मानवाधिकार तंत्र, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अन्य सदस्यों से अपील की कि वे बलूचों पर कथित 'ज्यादती और युद्ध अपराधों' को लेकर चुप न रहें।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और बलूच अलगाववादी समूहों के बीच दशकों पुराना सशस्त्र संघर्ष जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन पहले से ही इस क्षेत्र में नागरिकों की स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं। पाकिस्तानी सरकार या सेना की ओर से इस हमले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्वतंत्र सत्यापन के लिए पत्रकारों और राहत कर्मियों की पहुँच कथित तौर पर प्रतिबंधित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे पाकिस्तानी सेना आमतौर पर 'आतंकवाद-रोधी अभियान' के रूप में प्रस्तुत करती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि मीडिया और राहत कर्मियों की पहुँच पर कथित प्रतिबंध स्वतंत्र सत्यापन को असंभव बना देता है — और यही पैटर्न इस संघर्ष में बार-बार देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की 'गहरी चिंता' की बयानबाजी अब तक ज़मीन पर बदलाव लाने में विफल रही है। असली परीक्षा यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी सरकारें इस बार बयानों से आगे बढ़कर जवाबदेही सुनिश्चित करने का दबाव बनाती हैं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान के सुराब में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक क्या है?
12 अगस्त 2026 को पाकिस्तानी वायु सेना ने बलूचिस्तान के सुराब जिले के गिदर इलाके में हवाई हमला किया, जिसमें कथित तौर पर महिलाओं और बच्चों समेत 30 से अधिक नागरिक मारे गए। बलूच मानवाधिकार संगठनों ने इसे नागरिक आबादी पर जानबूझकर किया गया हमला बताया है।
क्या पाकिस्तानी सेना ने इस हमले की पुष्टि की है?
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सरकार या सेना की ओर से अभी तक इस हमले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्वतंत्र पत्रकारों और राहत कर्मियों की इलाके तक पहुँच कथित तौर पर प्रतिबंधित होने के कारण तथ्यों का स्वतंत्र सत्यापन कठिन है।
बलूच संगठनों ने इस हमले पर क्या माँग की है?
बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) और बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने तत्काल, स्वतंत्र और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में जाँच की माँग की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूके और यूरोपीय संघ से हस्तक्षेप की अपील की है।
अस्पतालों और मेडिकल स्टाफ पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच के अनुसार, हमले के बाद सेना ने इलाके के अस्पतालों को घेर लिया और चिकित्सकों व मेडिकल स्टाफ को घायलों का इलाज करने से कथित तौर पर रोका गया। उनका दावा है कि समय पर इलाज न मिलने के कारण कुछ लोगों की मौत हुई।
बलूचिस्तान में यह संघर्ष क्यों जारी है?
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और बलूच अलगाववादी समूहों के बीच दशकों पुराना सशस्त्र संघर्ष चल रहा है, जो प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण, राजनीतिक अधिकारों और स्वायत्तता की माँगों से जुड़ा है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन लंबे समय से इस क्षेत्र में नागरिकों की स्थिति पर चिंता जताते रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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