एशियन गेम्स कबड्डी: थाईलैंड का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज, कोच रवींद्र शेट्टी बोले — '36 साल बाद मिली यह उपलब्धि'
सारांश
मुख्य बातें
थाईलैंड पुरुष कबड्डी टीम के कोच रवींद्र शेट्टी ने 26 सितंबर 2026 को तोकाई (जापान) में आयोजित एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद कहा कि यह ऐतिहासिक पदक थाईलैंड में कबड्डी की तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। 1990 में एशियन गेम्स में कबड्डी की शुरुआत के बाद से यह थाईलैंड का पुरुष वर्ग में पहला महाद्वीपीय पदक है — 36 वर्षों की प्रतीक्षा का अंत।
मुख्य घटनाक्रम
शुक्रवार को तोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में खेले गए सेमीफाइनल में थाईलैंड को मौजूदा चैंपियन भारत से 28-66 से हार का सामना करना पड़ा। भारत ने हाफ-टाइम तक 37-18 की बढ़त बना ली थी और दूसरे हाफ में अपना दबदबा और मज़बूत करते हुए मैच जीता। गौरतलब है कि सेमीफाइनल में पहुँचते ही थाईलैंड का ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित हो गया था, क्योंकि इस प्रतियोगिता में तीसरे स्थान के लिए अलग मैच नहीं खेला जाता।
भारत इस टूर्नामेंट में ग्रुप-ए में चार जीत के साथ अपराजित रहते हुए सेमीफाइनल में पहुँचा था — जो उसके वर्चस्व को दर्शाता है।
कोच रवींद्र का सफर: शून्य से ऐतिहासिक पोडियम तक
रवींद्र शेट्टी पिछले तीन वर्षों से थाईलैंड में कबड्डी की कोचिंग दे रहे हैं। उन्होंने 2022 हांगझोऊ एशियन गेम्स के बाद वहाँ शुरुआत की थी। उन्होंने बताया, 'मैंने तीन साल पहले वहाँ शून्य से शुरुआत की थी। हांगझोऊ एशियन गेम्स के बाद मैंने काम शुरू किया। अब, कबड्डी सीखने के बाद वे आगे बढ़ रहे हैं। अब, थाईलैंड में भी कबड्डी लोकप्रिय हो रही है।'
यह ऐसे समय में आया है जब कबड्डी का अंतरराष्ट्रीय विस्तार धीमा माना जाता था। थाईलैंड की इस कामयाबी ने खेल के वैश्वीकरण की संभावनाओं को नई ऊर्जा दी है।
जमीनी विकास: अकादमी और युवा कार्यक्रम
रवींद्र ने बताया कि थाईलैंड में स्कूल स्तर पर कबड्डी को बढ़ावा दिया जा रहा है और हर चार महीने में युवा खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित होती हैं। उनकी अकादमी में अभी 35 लड़कियाँ और 30 लड़के प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो बैंकॉक, चोनबुरी और अन्य प्रांतों से आते हैं। उन्होंने कहा, 'अभी स्कूली स्तर पर कबड्डी शुरू हो रही है। हमारे अध्यक्ष हर चार महीने में युवा खेल आयोजित करते हैं। इसी वजह से कबड्डी का विकास हो रहा है।'
रवींद्र की कोचिंग पृष्ठभूमि
रवींद्र शेट्टी का अनुभव बहुआयामी है। वे प्रो कबड्डी लीग के 9वें सीजन में कोच रह चुके हैं और 2023 में ईरान में आयोजित जूनियर वर्ल्ड कप में भारतीय कोचिंग टीम का हिस्सा थे। उन्होंने बताया, 'उस समय मैं प्रो कबड्डी कोच था। उसके बाद मैंने जूनियर भारतीय टीम की जिम्मेदारी संभाली।'
थाईलैंड से जुड़ने का मौका उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता की बैठक के दौरान मिला, जहाँ थाई अधिकारियों ने उनसे सीधे संपर्क किया। उन्होंने कहा, 'उन्होंने कहा कि वे मुझे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाएंगे, इसलिए मैं आ गया। मैं ब्रॉन्ज मेडल जीतकर बहुत खुश हूँ।'
आगे की राह
थाईलैंड की इस उपलब्धि से एशिया में कबड्डी के विस्तार की नई संभावनाएँ खुली हैं। यदि युवा कार्यक्रम इसी गति से आगे बढ़ते रहे, तो थाईलैंड अगले महाद्वीपीय चक्र में और मज़बूत दावेदार के रूप में उभर सकता है।