एशियन गेम्स 2026: भारत ने कबड्डी में ईरान को 40-34 से हराकर नौवाँ गोल्ड जीता, पवन सहरावत बोले 'खाली पेट गोल्ड जीता'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को आइची में एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में ईरान को 40-34 से पराजित कर ऐतिहासिक नौवाँ एशियन गेम्स गोल्ड मेडल अपने नाम किया। टीम ने इस संस्करण में अजेय रहते हुए यह खिताब हासिल किया। भारतीय दल के ओपनिंग सेरेमनी में ध्वजवाहक रहे स्टार खिलाड़ी पवन सहरावत ने बताया कि फाइनल से पहले पूरी टीम ने कुछ भी नहीं खाया था — गोल्ड जीतने के बाद ही उन्होंने ठीक से भोजन किया।
रोमांचक फाइनल का पूरा घटनाक्रम
मुकाबले के पहले हाफ में भारतीय टीम ईरान से 17-18 से पीछे थी, लेकिन दूसरे हाफ में पूरी तरह बदला हुआ रूप दिखाते हुए मैच का पासा पलट दिया। अर्जुन देशवाल और देवांक दलाल ने आक्रमण की बागडोर सँभाली, जबकि सुमित और जयदीप ने रक्षापंक्ति में निर्णायक भूमिका अदा की।
मैच खत्म होने से करीब 10 मिनट पहले अर्जुन ने ईरानी कप्तान फजल अत्राचली को पार करते हुए 'ऑलआउट' की स्थिति बनाई, जिससे भारत को पाँच अंकों की निर्णायक बढ़त मिल गई। इसके बाद सुमित ने अमीरमोहम्मद जफर दानिश को ताकतवर टैकल किया और राहुल सेठपाल ने अंतिम क्षणों में एक और अहम बचाव कर जीत पक्की की।
पवन सहरावत की भावुक कहानी
पवन ने बताया, "मैं मैच को लेकर बहुत उत्साहित था। शाम को होने वाले मैच में क्या होगा, इसे लेकर मैं बहुत उत्साहित था। भले ही हमें पता हो कि हम अच्छा खेल रहे हैं और हमने अच्छी प्रैक्टिस की है, लेकिन जब तक नतीजा नहीं आ जाता, तब तक यह बात दिमाग में रहती है। वे 40 मिनट बहुत अहम थे।"
फाइनल से पहले खाना न खाने के बारे में उन्होंने कहा, "हर कोई भावुक होता है, इसलिए ऐसे पलों में मैं भी भावुक हो जाता हूँ। बात यह थी कि एक बार 40 मिनट पूरे हो जाएँ, तो हम अच्छे से खाएँगे-पिएँगे। सिर्फ एक नहीं, बल्कि उसके बाद गोल्ड भी आ गया है।" यह जज़्बा ही था जिसने भारतीय टीम को 'खाली पेट गोल्ड' दिलाया।
कोच रणधीर सहरावत को समर्पण
पवन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच रणधीर सहरावत को देते हुए यह गोल्ड मेडल उन्हें समर्पित किया। उन्होंने कहा, "मैं इसे अपने कोच रणधीर सहरावत को समर्पित करना चाहता हूँ, क्योंकि उन्हीं की वजह से मुझे यह मेडल मिला है।" साथ ही उन्होंने सरकार से अपने कोच के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार पर विचार करने का आग्रह किया, यह कहते हुए कि कई अर्जुन पुरस्कार विजेता खिलाड़ियों ने उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया है।
मेडल टैली और टीम की खुशी
गोल्ड जीतने वाले खिलाड़ी जयदीप ने कहा, "हम बहुत खुश हैं। हम पीछे चल रहे थे, लेकिन आज हमने देखा कि महिला कबड्डी टीम ने भी गोल्ड मेडल जीता और हमने भी जीता। हम प्रार्थना करेंगे कि हमारे देश का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी आने वाले खिलाड़ी, चाहे वे कुश्ती, बॉक्सिंग या किसी भी अन्य खेल में हों, गोल्ड मेडल जीतें।"
देवांक दलाल ने कहा, "मैं भगवान का धन्यवाद करना चाहूँगा। हमारा सपना साकार हुआ है। टीम बहुत अच्छा खेली। हम गोल्ड मेडल लेकर घर जा रहे हैं। मैं यह पदक सभी भारतीय खिलाड़ियों को समर्पित करता हूँ।"
गौरतलब है कि पवन ने ओपनिंग सेरेमनी में निशानेबाज मनु भाकर के साथ भारत का झंडा थामा था। इस भूमिका को वे एक चमत्कार मानते हुए कहते हैं, "जापान बहुत खूबसूरत है। मेरे लिए, जापान ने इतिहास रचा है। मैं फ्लैग बियरर था। मैं मनु भाकर जैसी बेहतरीन एथलीट के साथ था।"
आगे क्या
भारतीय कबड्डी टीम की यह जीत देश की समग्र मेडल टैली के लिए भी महत्वपूर्ण है। पवन ने बताया कि टीम मेडल टैली पर नज़र रख रही थी और उनके अनुसार दो गोल्ड जुड़ने से पहले भारत छठे स्थान पर था। अब कुश्ती, बॉक्सिंग और अन्य खेलों में भारतीय खिलाड़ियों से और पदकों की उम्मीद है, जो देश की अंतिम रैंकिंग तय करेंगे।